Silver Price Today: सोने की कीमतों में जहां तेजी बनी हुई है, वहीं दूसरी कीमती धातु चांदी की चमक इन दिनों कुछ फीकी नजर आ रही है। 12 फरवरी की सुबह घरेलू बाजार में चांदी का भाव 2,89,900 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। यह आंकड़ा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि महज कुछ सप्ताह पहले, जनवरी के दौरान, चांदी 4 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर को पार कर चुकी थी। इतनी तेज गिरावट ने निवेशकों और कारोबारियों दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
चांदी के दाम में उतार-चढ़ाव की कहानी
जनवरी में चांदी ने ऐतिहासिक ऊंचाई छूते हुए 4 लाख रुपये प्रति किलो का स्तर पार किया था। उस समय औद्योगिक मांग, वैश्विक अनिश्चितता और निवेशकों की खरीदारी ने कीमतों को ऊपर धकेला। लेकिन अब परिदृश्य बदलता दिख रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी का हाजिर भाव 85.51 डॉलर प्रति औंस पर है। वैश्विक स्तर पर आई नरमी और निवेशकों की मुनाफावसूली का असर घरेलू बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें नरम पड़ती हैं, तो भारतीय बाजार भी उससे अछूता नहीं रहता।
अंतरराष्ट्रीय संकेतों का असर
चांदी की कीमतें केवल घरेलू मांग से तय नहीं होतीं। यह धातु औद्योगिक उपयोग में भी बड़े पैमाने पर आती है—विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और ऑटोमोबाइल सेक्टर में। जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेत मिलते हैं या औद्योगिक मांग घटती है, तो चांदी की कीमतों पर दबाव बनता है।
हाल के दिनों में डॉलर की चाल और वैश्विक बाजार में अस्थिरता ने निवेशकों को सतर्क किया है। जहां सोना सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूती दिखा रहा है, वहीं चांदी में उतार-चढ़ाव अधिक देखने को मिल रहा है। मेरे अनुभव में, चांदी हमेशा सोने की तुलना में ज्यादा अस्थिर रहती है क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा औद्योगिक मांग पर निर्भर करता है।
जनवरी की तेजी के पीछे क्या कारण थे
जनवरी में चांदी की कीमतों में तेज उछाल के पीछे कई कारण थे। वैश्विक बाजार में अनिश्चितता, निवेशकों का कीमती धातुओं की ओर झुकाव और कुछ देशों में उत्पादन संबंधी चुनौतियों ने आपूर्ति को प्रभावित किया। इसके अलावा, घरेलू स्तर पर भी निवेश की मांग बढ़ी थी।
लेकिन जैसे ही बाजार ने ऊंचाई पर मुनाफावसूली शुरू की, कीमतों में गिरावट आने लगी। अक्सर देखा गया है कि जब कोई धातु अचानक बहुत तेजी से ऊपर जाती है, तो उसके बाद सुधार भी उतना ही तेज हो सकता है।
निवेशकों के लिए संकेत
चांदी की मौजूदा कीमत 2,89,900 रुपये प्रति किलो निवेशकों के लिए मिश्रित संकेत देती है। जो लोग ऊंचे स्तर पर खरीद चुके हैं, उनके लिए यह चिंता का विषय हो सकता है। वहीं जो नए निवेशक हैं, वे इसे अवसर के रूप में भी देख सकते हैं।
चांदी में निवेश करते समय लंबी अवधि का दृष्टिकोण जरूरी है। अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय बाजार के मूलभूत कारकों को समझना चाहिए। औद्योगिक मांग, वैश्विक आर्थिक स्थिति और मुद्रा की चाल—ये सभी कारक चांदी की दिशा तय करते हैं।
आगे क्या हो सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता लौटती है और औद्योगिक मांग में सुधार होता है, तो चांदी की कीमतों में फिर से मजबूती आ सकती है। हालांकि निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
घरेलू बाजार में भी शादी और त्योहारों का सीजन चांदी की मांग को प्रभावित करता है। ग्रामीण इलाकों में चांदी की खपत अधिक होती है, इसलिए वहां की आर्थिक स्थिति भी कीमतों पर असर डालती है।
चांदी की यह गिरावट केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि बाजार के बदलते रुख की कहानी है। जनवरी की ऊंचाई से फरवरी की नरमी तक का सफर यह बताता है कि कीमती धातुओं का बाजार कितना संवेदनशील है। ऐसे में निवेशकों को भावनाओं के बजाय तथ्यों और दीर्घकालिक रणनीति पर भरोसा करना चाहिए।
फिलहाल चांदी की चमक थोड़ी मंद जरूर पड़ी है, लेकिन बाजार की चाल कब करवट ले ले, यह कहना आसान नहीं। इसलिए सतर्कता और संतुलन ही सबसे बड़ी समझदारी है।