समता सैनिक दल की प्रमुख मांग
महाराष्ट्र में सामाजिक न्याय और बजट आवंटन को लेकर एक बार फिर आवाजें उठने लगी हैं। नागपुर के संविधान चौक पर समता सैनिक दल ने एक भव्य धरना और प्रदर्शन का आयोजन किया। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य महाराष्ट्र सरकार से यह मांग करना था कि राज्य के बजट में बौद्ध, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा विमुक्त एवं घुमंतू जातियों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में उचित हिस्सा दिया जाए।
प्रदर्शनकारियों ने न केवल धरना दिया बल्कि एक प्रतिनिधिमंडल ने नागपुर के जिलाधिकारी से मुलाकात कर विभिन्न मांगों का एक विस्तृत ज्ञापन भी सौंपा। यह आंदोलन महाराष्ट्र में सामाजिक और आर्थिक समानता की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

जनसंख्या और बजट में असमानता का सवाल
समता सैनिक दल के प्रतिनिधियों ने जो आंकड़े पेश किए हैं, वे काफी चौंकाने वाले हैं। महाराष्ट्र में बौद्ध और अनुसूचित जातियों की जनसंख्या लगभग 13.5 प्रतिशत है। इसके अलावा अनुसूचित जनजातियां करीब 10 प्रतिशत हैं और विमुक्त एवं घुमंतू जातियां भी लगभग 10 प्रतिशत आबादी का हिस्सा हैं।
अगर इन सभी को मिलाकर देखा जाए तो कुल मिलाकर 33.5 प्रतिशत आबादी ऐसी है जिसे राज्य के बजट में उनकी संख्या के अनुपात में पर्याप्त हिस्सा नहीं मिल रहा है। यह असमानता न केवल आर्थिक विकास में बाधक है बल्कि सामाजिक न्याय के सिद्धांत के भी खिलाफ है।
दक्षिण भारत के राज्यों का उदाहरण
समता सैनिक दल के नेताओं ने दक्षिण भारत के कई राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए अलग से बजट कानून लागू किया गया है। इस व्यवस्था के तहत इन वर्गों को उनकी जनसंख्या के अनुसार बजट में निश्चित हिस्सा सुनिश्चित किया जाता है।
कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में यह व्यवस्था सफलतापूर्वक काम कर रही है। इन राज्यों में अनुसूचित वर्गों के विकास के लिए बजट में एक निश्चित प्रतिशत आवंटन अनिवार्य कर दिया गया है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि महाराष्ट्र भी इसी तर्ज पर एक कानून बनाए।
6 मार्च 2026 के बजट में कानून पारित करने की मांग
आंदोलनकारियों ने विशेष रूप से यह मांग की है कि 6 मार्च 2026 को प्रस्तुत होने वाले महाराष्ट्र के बजट में यह कानून पारित किया जाए। उनका कहना है कि यदि अभी यह कानून नहीं बनाया गया तो सामाजिक और आर्थिक असमानता और बढ़ती जाएगी।
इस कानून के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि बौद्ध, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और विमुक्त जातियों को राज्य के विकास कार्यों में उचित हिस्सेदारी मिले। यह कदम न केवल संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप होगा बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा में भी एक ठोस पहल होगी।
रमाई आवास योजना की राशि बढ़ाने की मांग
ज्ञापन में सिर्फ बजट आवंटन का मुद्दा नहीं था बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण मांगें भी शामिल की गई हैं। इनमें से एक प्रमुख मांग रमाई आवास योजना की राशि बढ़ाने की है। यह योजना गरीब और वंचित वर्गों के लिए आवास उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई थी।
लेकिन वर्तमान में इस योजना के तहत मिलने वाली राशि काफी कम है और महंगाई के इस दौर में इससे एक पक्का मकान बनाना मुश्किल है। समता सैनिक दल का कहना है कि इस राशि में उचित वृद्धि की जाए ताकि गरीब परिवार भी अपना घर बना सकें।
छात्रवृत्ति में वृद्धि की आवश्यकता
शिक्षा के क्षेत्र में भी समता सैनिक दल ने महत्वपूर्ण मांग उठाई है। ज्ञापन में छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की राशि बढ़ाने की मांग की गई है। वर्तमान में अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के छात्रों को जो छात्रवृत्ति मिलती है, वह शिक्षा के बढ़ते खर्च के हिसाब से बहुत कम है।
किताबें, फीस, रहने-खाने का खर्च और अन्य शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने के लिए छात्रवृत्ति राशि पर्याप्त नहीं है। इसलिए मांग की गई है कि छात्रवृत्ति की राशि में महत्वपूर्ण वृद्धि की जाए ताकि गरीब परिवारों के बच्चे भी बिना किसी आर्थिक बाधा के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें।
डॉ. आंबेडकर व्यावसायिक संकुल की स्थापना
ज्ञापन में एक और महत्वपूर्ण मांग डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर व्यावसायिक संकुल स्थापित करने की है। यह संकुल अनुसूचित और पिछड़े वर्गों के युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल विकास के अवसर प्रदान करेगा।
ऐसे संकुलों की स्थापना से न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनने में भी मदद मिलेगी। डॉ. आंबेडकर के नाम पर इस तरह के संस्थान बनाना उनके सामाजिक और आर्थिक समानता के विचारों को साकार करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम होगा।
संविधान चौक पर भव्य धरना
समता सैनिक दल ने अपने आंदोलन के लिए संविधान चौक को चुना जो खुद में एक प्रतीकात्मक स्थान है। यह स्थान संविधान और सामाजिक न्याय का प्रतीक है। यहां धरना देना इस बात का संकेत है कि आंदोलनकारी अपनी मांगों को संवैधानिक अधिकारों के तहत उठा रहे हैं।
धरने में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद की। इस आंदोलन के दौरान लोगों ने नारे लगाए और सरकार से अपनी मांगों को गंभीरता से लेने का आह्वान किया।
जिलाधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन
धरना प्रदर्शन के बाद समता सैनिक दल के प्रतिनिधिमंडल ने नागपुर के जिलाधिकारी से मुलाकात की। इस मुलाकात में विभिन्न मांगों का एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि वे इस ज्ञापन को राज्य सरकार तक पहुंचाएं और इन मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह करें।
जिलाधिकारी ने प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि वे इस ज्ञापन को उचित माध्यम से राज्य सरकार तक पहुंचाएंगे। प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो वे और बड़े आंदोलन के लिए तैयार हैं।
सामाजिक न्याय की लड़ाई
यह आंदोलन केवल बजट आवंटन का मुद्दा नहीं है बल्कि यह सामाजिक न्याय और समानता की एक बड़ी लड़ाई का हिस्सा है। महाराष्ट्र में लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि वंचित वर्गों को उनका उचित हक मिले। लेकिन हर बार सरकारें इन मांगों को टाल देती हैं या फिर सिर्फ आश्वासन देकर रह जाती हैं।
इस बार समता सैनिक दल ने ठान लिया है कि वे तब तक आंदोलन जारी रखेंगे जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं। यह आंदोलन न केवल महाराष्ट्र के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल बन सकता है कि कैसे शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों की मांग की जाए।
समता सैनिक दल का यह आंदोलन महाराष्ट्र में सामाजिक और आर्थिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि सरकार इन मांगों पर गंभीरता से विचार करती है और उचित कदम उठाती है तो यह राज्य के वंचित वर्गों के लिए एक बड़ी राहत होगी और सामाजिक न्याय की दिशा में एक मजबूत कदम भी।