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हरदीप सिंह पुरी इस्तीफे की मांग: एपस्टीन मामले में कांग्रेस का तीखा हमला

Hardeep Singh Puri Resignation: एपस्टीन मामले में कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री पर साधा निशाना, इस्तीफे की मांग
Hardeep Singh Puri Resignation: एपस्टीन मामले में कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री पर साधा निशाना, इस्तीफे की मांग (FB Photo)

Hardeep Singh Puri Resignation: जेफ्री एपस्टीन फाइल्स में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम आने के बाद कांग्रेस ने उनके इस्तीफे की मांग की है। पवन खेड़ा ने कहा कि पुरी को एक सेकंड भी पद पर रहने का अधिकार नहीं है। राहुल गांधी ने भी सवाल उठाए हैं। विपक्ष ने आरोप लगाया कि पिछले 48 घंटों में मंत्री ने झूठ बोला है।

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Hardeep Singh Puri Resignation: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में हैं। जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइलों में उनका नाम सामने आने के बाद से कांग्रेस पार्टी लगातार उन पर हमला कर रही है। विपक्ष की ओर से अब उनके इस्तीफे की मांग उठने लगी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने साफ शब्दों में कहा है कि ऐसे व्यक्ति को एक सेकंड भी अपने पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। यह मामला देश की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे चुका है।

एपस्टीन फाइल्स में नाम आने से मचा बवाल

जेफ्री एपस्टीन एक ऐसा नाम है जो पूरी दुनिया में विवादों से घिरा रहा है। अमेरिका में उनके खिलाफ कई गंभीर आरोप लगे थे। जब एपस्टीन से जुड़ी गुप्त फाइलें सामने आईं, तो उसमें कई बड़े नामों का जिक्र था। इन्हीं फाइलों में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम भी सामने आया है। इसके बाद से कांग्रेस पार्टी उन पर लगातार सवाल उठा रही है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को इस मामले में सफाई देनी चाहिए और मंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।

कांग्रेस का तीखा हमला

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एएनआई से बातचीत करते हुए कहा कि हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की मांग उनकी पार्टी कर रही है। उन्होंने कहा कि इस व्यक्ति को एक पल भी अपने पद पर रहने का नैतिक अधिकार नहीं है। पवन खेड़ा ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले 48 घंटों में हरदीप पुरी ने केवल झूठ बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि डिजिटल इंडिया के लॉन्च से पहले एपस्टीन से हरदीप पुरी बात क्यों कर रहे थे। उस समय तो वह एक रिटायर्ड डिप्लोमैट थे, किसी पद पर नहीं थे।

राहुल गांधी ने भी उठाए सवाल

इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने भी इस मामले पर हरदीप सिंह पुरी को निशाना बनाया था। राहुल गांधी ने कहा था कि एपस्टीन फाइल्स में किसी केंद्रीय मंत्री का नाम आना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने सरकार से जवाब मांगा था कि आखिर यह संबंध क्यों था और इसके पीछे क्या कारण थे। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है।

पुरी की सफाई और विवाद

हरदीप सिंह पुरी की ओर से अभी तक इस मामले में कोई विस्तृत सफाई नहीं आई है। हालांकि उनके समर्थकों का कहना है कि यह एक राजनीतिक साजिश है। भाजपा के नेताओं का कहना है कि कांग्रेस बिना किसी ठोस सबूत के आरोप लगा रही है। लेकिन विपक्ष इस बात से संतुष्ट नहीं है। वह चाहता है कि इस मामले की पूरी तरह से जांच हो और सच सामने आए।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा

यह मामला अब संसद में भी उठाया जा रहा है। विपक्षी सांसद लगातार सरकार से सवाल पूछ रहे हैं। कांग्रेस के साथ-साथ अन्य विपक्षी दल भी इस मुद्दे को उठा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और भी गर्म हो सकता है। सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह इस मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करे।

जनता की प्रतिक्रिया

इस विवाद को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा हो रही है। लोग अपनी-अपनी राय दे रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि बिना पूरी जांच के किसी पर आरोप लगाना सही नहीं है। वहीं कुछ लोग विपक्ष के साथ खड़े हैं और मांग कर रहे हैं कि सच्चाई सामने आनी चाहिए। यह मामला राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर एक सामाजिक मुद्दा भी बन गया है।

नैतिकता का सवाल

राजनीति में नैतिकता का सवाल हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है। कांग्रेस का कहना है कि अगर किसी मंत्री के खिलाफ ऐसे गंभीर आरोप हैं, तो उन्हें खुद ही इस्तीफा दे देना चाहिए। यह नैतिकता की मांग है। लेकिन सत्तारूढ़ दल का कहना है कि केवल आरोपों के आधार पर किसी को इस्तीफा नहीं देना चाहिए। पहले जांच होनी चाहिए और सच सामने आना चाहिए।

आगे क्या होगा

अब देखना यह है कि इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। क्या सरकार किसी जांच के आदेश देगी? क्या हरदीप सिंह पुरी इस्तीफा देंगे? या फिर यह मामला समय के साथ शांत हो जाएगा? विपक्ष ने साफ कर दिया है कि वह इस मामले को यूं ही छोड़ने वाला नहीं है। वह संसद में और सड़कों पर इस मुद्दे को उठाता रहेगा।

देश की राजनीति पर असर

Hardeep Singh Puri Resignation: यह विवाद देश की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है। अगले चुनावों से पहले ऐसे मामले राजनीतिक दलों के लिए अहम हो जाते हैं। विपक्ष इस मुद्दे का इस्तेमाल सरकार के खिलाफ कर सकता है। वहीं सरकार की कोशिश होगी कि इस मामले को जल्द से जल्द शांत किया जाए। राजनीतिक पार्टियों के बीच यह मुद्दा एक बड़ी लड़ाई बन सकता है।

यह मामला केवल एक मंत्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाता है। लोग जानना चाहते हैं कि उनके नेता किस तरह के संबंध रखते हैं। पारदर्शिता की मांग हर समय की जरूरत है। इस मामले में जो भी सच हो, वह सामने आना चाहिए। तभी जनता का विश्वास बना रहेगा। राजनीति में साफ-सफाई और ईमानदारी की जरूरत हमेशा रहती है।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।