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Maharashtra News: पुलवामा हमले के शहीद वीर जवानों को 37वीं बटालियन द्वारा भावपूर्ण श्रद्धांजलि

Pulwama Attack Shaheed Tribute Ceremony CRPF: 37वीं बटालियन द्वारा शहीद जवानों को भावपूर्ण नमन और राष्ट्र सेवा का संकल्प
Pulwama Attack Shaheed Tribute Ceremony CRPF: 37वीं बटालियन द्वारा शहीद जवानों को भावपूर्ण नमन और राष्ट्र सेवा का संकल्प

Pulwama Attack Shaheed Tribute Ceremony CRPF: पुलवामा हमले में शहीद 40 वीर जवानों की स्मृति में 37वीं बटालियन द्वारा श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अधिकारियों और जवानों ने पुष्पांजलि अर्पित कर दो मिनट का मौन रखा। कमांडेंट ने शहीदों के साहस और बलिदान को याद करते हुए राष्ट्र सेवा और एकता का संकल्प दोहराया।

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शहीदों के बलिदान को याद करने का पावन अवसर

आज का दिन देश के लिए बहुत भावुक और गर्व से भरा हुआ है। 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में हुए आतंकी हमले में हमारे 40 वीर जवान शहीद हुए थे। इस दर्दनाक घटना को देश कभी नहीं भूल सकता। इसी अवसर पर 37वीं बटालियन, सीआरपीएफ द्वारा शहीदों की याद में एक गरिमामय और भावपूर्ण श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह उन वीर सपूतों के प्रति सच्चे सम्मान और कृतज्ञता की अभिव्यक्ति थी, जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन

37वीं बटालियन द्वारा आयोजित इस समारोह में सभी अधिकारियों और जवानों ने मिलकर शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। कार्यक्रम की शुरुआत पुष्पांजलि अर्पित कर और दो मिनट का मौन रखकर की गई। मौन के उस क्षण में पूरा वातावरण गंभीर और भावुक हो गया। हर चेहरे पर सम्मान और गर्व साफ दिखाई दे रहा था।

इस अवसर पर बटालियन के वरिष्ठ अधिकारी, अधीनस्थ अधिकारी और सभी जवान उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में शहीदों के सर्वोच्च बलिदान को नमन किया। यह आयोजन हमें यह याद दिलाता है कि देश की सुरक्षा के लिए हमारे जवान किस तरह हर पल तैयार रहते हैं।

कमांडेंट का प्रेरणादायक संबोधन

कार्यक्रम की अध्यक्षता 37वीं बटालियन के कमांडेंट श्री दव इंजिरकन किंडो ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पुलवामा का हमला कायरता और धोखे से किया गया था। यह हमला आतंकियों की गलत सोच को दिखाता है। लेकिन इस तरह की घटनाएं हमारे जवानों के हौसले को कभी कम नहीं कर सकतीं।

उन्होंने कहा कि वीर जवान कभी मरते नहीं हैं। वे अपने बलिदान के कारण देश की आत्मा में हमेशा जीवित रहते हैं। उनका साहस आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।

कमांडेंट ने यह भी कहा कि देशभक्ति केवल शब्द नहीं है। यह एक भावना है, एक जीवन जीने का तरीका है। जब तिरंगा लहराता है, तो उसमें केवल तीन रंग नहीं होते। उसमें शहीदों का खून, उनका विश्वास और एक सुरक्षित भारत का सपना शामिल होता है।

शहीदों का अद्वितीय साहस

पुलवामा हमला देश के इतिहास की एक दुखद घटना थी। उस दिन देश ने अपने 40 बहादुर जवान खो दिए। लेकिन इन जवानों ने जो साहस और समर्पण दिखाया, वह हमेशा याद रखा जाएगा।

आतंकियों ने सोचा था कि इस हमले से देश का मनोबल टूट जाएगा। लेकिन हुआ इसके ठीक उलट। पूरे देश ने एकजुट होकर शहीदों को सम्मान दिया और यह संदेश दिया कि भारत आतंक के सामने कभी झुकेगा नहीं।

इन शहीदों का बलिदान हमें यह सिखाता है कि देश की रक्षा के लिए सबसे बड़ा कर्तव्य है। उनके परिवारों ने भी जो त्याग किया है, वह भी उतना ही सम्मान के योग्य है।

देशभक्ति का सच्चा अर्थ

इस श्रद्धांजलि समारोह ने एक बार फिर यह सोचने का अवसर दिया कि देशभक्ति का असली अर्थ क्या है। देशभक्ति केवल नारों तक सीमित नहीं है। यह अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाने का नाम है।

हमारे जवान दिन-रात कठिन परिस्थितियों में देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं। चाहे मौसम कैसा भी हो, चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, वे अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटते।

आज जरूरत है कि हर नागरिक अपने स्तर पर देश के लिए जिम्मेदारी निभाए। नियमों का पालन करना, समाज में शांति बनाए रखना और एकता को मजबूत करना भी देश सेवा ही है।

एकता और संकल्प का संदेश

श्रद्धांजलि समारोह केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं था, बल्कि यह भविष्य के लिए संकल्प लेने का भी समय था। सभी अधिकारियों और जवानों ने शहीदों के आदर्शों पर चलने का प्रण लिया।

यह कार्यक्रम हमें याद दिलाता है कि आतंकवाद का सामना केवल हथियारों से नहीं, बल्कि मजबूत इरादों और एकजुट समाज से भी किया जाता है। जब पूरा देश एक साथ खड़ा होता है, तब कोई भी ताकत हमें कमजोर नहीं कर सकती।

आज के समय में राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण विषय है। पुलवामा जैसी घटनाएं हमें सतर्क रहने की सीख देती हैं। साथ ही यह भी बताती हैं कि हमारे जवान हर खतरे का सामना करने के लिए तैयार हैं।

शहीदों की अमर गाथा

पुलवामा के शहीद जवानों की कहानी केवल एक घटना नहीं है, बल्कि यह साहस और बलिदान की अमर गाथा है। उनके नाम और उनका योगदान हमेशा देश के इतिहास में दर्ज रहेंगे।

जब भी देश कठिन समय से गुजरेगा, तब इन वीरों की याद हमें आगे बढ़ने की ताकत देगी। उनके बलिदान से हमें यह सीख मिलती है कि देश की रक्षा सबसे बड़ा धर्म है।

37वीं बटालियन द्वारा आयोजित यह श्रद्धांजलि समारोह इस बात का प्रमाण है कि देश अपने वीर सपूतों को कभी नहीं भूलता। उनका सम्मान और स्मरण हर वर्ष इसी तरह किया जाता रहेगा।

यह आयोजन न केवल शहीदों को नमन था, बल्कि यह पूरे देश के लिए एक संदेश भी था कि हम सब मिलकर एक मजबूत, सुरक्षित और एकजुट भारत का निर्माण करेंगे।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।