जरूर पढ़ें

देवघर बाबा बैद्यनाथ धाम में महाशिवरात्रि 2026 की भव्य तैयारी, बारात में शामिल होगा साइबर दैत्य

Maha Shivratri 2026 Baba Baidyanath Dham Deoghar: देवघर बैद्यनाथ धाम में भव्य तैयारी, साइबर दैत्य होगा बारात में शामिल
Maha Shivratri 2026 Baba Baidyanath Dham Deoghar: देवघर बैद्यनाथ धाम में भव्य तैयारी, साइबर दैत्य होगा बारात में शामिल FP: (Image Source: FB/@DeviShaktipeeth)

Maha Shivratri 2026 Baba Baidyanath Dham Deoghar: झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में 15 फरवरी को महाशिवरात्रि की भव्य तैयारी पूरी हो चुकी है। इस बार बाबा की बारात में पहली बार साइबर दैत्य शामिल होगा जो परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम होगा। मंदिर प्रशासन ने लाखों श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुरक्षा और सुविधाओं की व्यवस्था की है।

Updated:

झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में 15 फरवरी 2026 को मनाए जाने वाले महाशिवरात्रि पर्व की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस बार का महोत्सव खास होने वाला है क्योंकि पहली बार बाबा की बारात में पारंपरिक देवी देवताओं के साथ साइबर दैत्य भी शामिल होगा। यह आधुनिकता और परंपरा का अनूठा संगम होगा जो भक्तों के लिए एक नया अनुभव लेकर आएगा।

बैद्यनाथ धाम की विशेषता और महत्व

बाबा बैद्यनाथ धाम भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। लेकिन जो बात इसे सबसे अलग और खास बनाती है वह यह है कि यह एकमात्र ऐसा स्थान है जहां ज्योतिर्लिंग के साथ साथ शक्तिपीठ भी विराजमान है। मंदिर के पुजारी अजय परिहस्त बताते हैं कि पौराणिक कथाओं के अनुसार दक्ष के यज्ञ में माता सती के आत्मदाह के बाद जब भगवान शिव ने उनके शरीर को लेकर तांडव किया था तब विष्णु जी के सुदर्शन चक्र से सती का हृदय यहां गिरा था। इसीलिए इस स्थान को हार्दपीठ या हृदय पीठ कहा जाता है।

यहां ज्योतिर्लिंग के ठीक ऊपर माता सती का हृदय स्थापित माना जाता है। इस तरह शिव और शक्ति का अद्भुत मिलन यहां होता है। यही कारण है कि महाशिवरात्रि के दिन यहां की ऊर्जा चरम पर पहुंच जाती है और लाखों श्रद्धालु दर्शन और पूजा के लिए यहां आते हैं।

बाबा की बारात का विशेष आकर्षण

देवघर को बाबा का ससुराल माना जाता है। मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यही कारण है कि यहां शिवरात्रि को केवल धार्मिक पूजा के रूप में नहीं बल्कि एक भव्य विवाह उत्सव की तरह मनाया जाता है।

मंदिर परिसर में शिव और पार्वती के मंदिरों के शिखरों को लाल रेशमी धागे से गठबंधन किया जाता है। यह अखंड वैवाहिक सुख का प्रतीक होता है। रात में निकलने वाली बाबा की बारात इस उत्सव का मुख्य आकर्षण होती है। इस बारात में देवी देवता, भूत पिशाच और साधु संतों के वेश में हजारों भक्त शामिल होते हैं।

इस बार की बारात में एक नई परंपरा जुड़ने जा रही है। पहली बार बारात में साइबर दैत्य भी शामिल होगा। यह आधुनिक तकनीक और पारंपरिक आस्था का अद्भुत संगम होगा जो देखने में काफी रोचक होगा।

प्रशासन की सख्त व्यवस्था

मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन ने लाखों भक्तों की भीड़ को देखते हुए कड़े इंतजाम किए हैं। इस बार किसी भी वीआईपी या वीवीआईपी को विशेष पूजा या दर्शन की अनुमति नहीं दी गई है। सभी भक्तों को सामान्य कतार में खड़े होकर दर्शन करने होंगे। हालांकि जो लोग जल्दी दर्शन करना चाहते हैं उनके लिए 600 रुपये के कूपन से शीघ्र दर्शन की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

मंदिर परिसर के सभी 22 मंदिरों से उतारे गए पंचशूल को संबंधित शिखरों पर फिर से स्थापित किया जा रहा है। यह सुरक्षा और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। मंदिर के कपाट रातभर खुले रहेंगे जहां चारों प्रहर विशेष पूजा अर्चना होगी।

सुल्तानगंज से देवघर मार्ग पर विशेष सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, स्वास्थ्य शिविर और यातायात की समुचित व्यवस्था की गई है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

महाशिवरात्रि का पावन पर्व 15 फरवरी 2026 रविवार को मनाया जाएगा। निशीथ काल पूजा जो सबसे शुभ समय माना जाता है वह रात 12 बजकर 9 मिनट से लेकर 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगा। यह समय 16 फरवरी की आधी रात को होगा।

चार प्रहर की पूजा रात भर जारी रहेगी। प्रदोष काल और ब्रह्म मुहूर्त को विशेष फलदायी माना जाता है। भक्त जागरण करते हुए भोलेनाथ की आराधना करेंगे। पारण यानी व्रत तोड़ने का समय 16 फरवरी सुबह 7 बजे से शुरू होगा।

झारखंड के अन्य प्रमुख शिव मंदिरों में भी धूम

झारखंड राज्य के अन्य प्रमुख शिव मंदिरों में भी महाशिवरात्रि की भव्य तैयारियां की गई हैं। दुमका का बासुकीनाथ मंदिर जो देवघर से मात्र 43 किलोमीटर दूर है वहां भी विशेष मेले का आयोजन किया गया है। स्थानीय भजन कीर्तन और रोशनी की सजावट की गई है।

गिरिडीह का हरिहर धाम जहां दुनिया का सबसे बड़ा 65 फीट ऊंचा शिवलिंग स्थित है वहां भी विशेष रोशनी और सजावट की गई है। रात भर भजन कीर्तन का आयोजन रहेगा।

राजधानी रांची के पहाड़ी मंदिर में भी विशेष व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को विशेष आमंत्रण दिया गया है। पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग और सीसीटीवी की व्यवस्था की गई है।

तमाड़ क्षेत्र का देवड़ी मंदिर जो आदिवासी संस्कृति से गहराई से जुड़ा है वहां आदिवासी लोक नृत्य और पारंपरिक पूजा का आयोजन किया जाएगा। साहिबगंज के कर्णेश्वर धाम, पश्चिमी सिंहभूम के झारखंड महादेव मंदिर, खूंटी के अंगराबाड़ी शिव मंदिर, धनबाद के झींझी पहाड़ी में स्थित बुद्धा बाबा शिव मंदिर और रामगढ़ के टूटी झरना शिव मंदिर में भी विशेष तैयारियां की गई हैं।

वरिष्ठ पत्रकार दिलीप सिन्हा बताते हैं कि धनबाद के झींझी पहाड़ी में 900 से 1000 साल पुराना कालिंगा शैली का अद्भुत मंदिर है जो आस्था का बड़ा केंद्र है। अगर सरकार इस पर ध्यान दे तो यह पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है।

आस्था और आधुनिकता का संगम

इस बार की महाशिवरात्रि में परंपरा और आधुनिकता का अनूठा मेल देखने को मिलेगा। बारात में साइबर दैत्य का समावेश यह दर्शाता है कि धर्म और आस्था भी समय के साथ बदलाव को अपना रहे हैं। यह युवा पीढ़ी को भी धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का एक नया माध्यम बन सकता है।

मंदिर के पुजारी और प्रशासन का मानना है कि यह प्रयोग सफल रहा तो आने वाले समय में अन्य धार्मिक आयोजनों में भी आधुनिक तकनीक का उपयोग देखने को मिल सकता है।

भक्तों में इस बार के महोत्सव को लेकर खासा उत्साह है। देश भर से श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए देवघर पहुंचेंगे। रात भर चलने वाली पूजा और जागरण में लाखों भक्त हिस्सा लेंगे। मंदिर प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं के लिए हर तरह की सुविधा सुनिश्चित की है ताकि सभी को सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से दर्शन मिल सके।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।

Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।