Mahashivratri 2026 fast timing and fasting rules: महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार है जो भगवान शिव को समर्पित है। इस साल यह पर्व पूरे भारत में 15 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा। इस पावन दिन पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त सख्त व्रत रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और भगवान शिव तथा देवी पार्वती के दिव्य मिलन को याद करते हुए विधि-विधान से पूजा करते हैं। यह त्योहार फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है और इस दिन रात भर पूजा, मंदिरों में दर्शन और आध्यात्मिक अनुशासन का पालन किया जाता है।
महाशिवरात्रि का व्रत क्यों रखा जाता है
महाशिवरात्रि की रात को वह रात माना जाता है जब भगवान शिव और देवी पार्वती का दिव्य विवाह हुआ था। भक्त व्रत रखते हैं और पूजा करते हैं ताकि उन्हें आशीर्वाद, मानसिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति मिल सके। बहुत से लोग इस व्रत को शरीर और मन को शुद्ध करने का एक माध्यम भी मानते हैं और इससे उनकी आस्था मजबूत होती है। जो लोग पहली बार यह व्रत रख रहे हैं, उनके लिए सही तरीके अपनाना बेहद जरूरी है ताकि वे भक्ति भाव के साथ बिना किसी परेशानी के इस दिन को पूरा कर सकें।
मानसिक और शारीरिक तैयारी जरूरी है
व्रत शुरू करने से पहले भक्तों को संकल्प लेना चाहिए और अपने मन, शरीर और आत्मा को तैयार करना चाहिए। ध्यान, योग और सकारात्मक सोच जैसी गतिविधियां सही मानसिकता बनाने में मदद कर सकती हैं। व्रत से एक दिन पहले खाना कम करना भी शरीर को व्रत के लिए तैयार करने में सहायक होता है।
किस तरह का व्रत रखें यह चुनें
भक्त तीन सामान्य प्रकार के व्रत में से चुन सकते हैं: निर्जला व्रत यानी बिना पानी के, फलाहार व्रत यानी फल और दूध के साथ, या आंशिक व्रत। सही प्रकार का व्रत चुनना आपकी सेहत और व्यक्तिगत क्षमता पर निर्भर करता है।
शरीर में पानी की कमी न होने दें
व्रत रखते समय भी शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखना जरूरी है ताकि ऊर्जा का स्तर बना रहे। पर्याप्त पानी पीने से शरीर पूरे दिन स्थिर रहता है।
ब्रह्मचर्य का पालन करें
व्रत के दौरान विचारों और कर्मों में पवित्रता को महत्वपूर्ण माना जाता है। भक्तों को अनुशासन बनाए रखने और आध्यात्मिक साधनाओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
प्रार्थना करें और मंत्र जाप करें
महाशिवरात्रि को भगवान शिव की पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है। पंचाक्षरी मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से शांति और आशीर्वाद मिलता है। ॐ नमः शिवाय का जाप करना इस दिन विशेष फलदायी होता है।
मंदिर में दर्शन के लिए जाएं
शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करना इस दिन की प्रमुख रस्म है। कई भक्त रात भर भजन और प्रार्थना में भी भाग लेते हैं। चार बार शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी और शहद चढ़ाना बेहद पुण्यकारी माना जाता है।
पारणा का सही समय देखें
भक्तों को पंचांग में सही पारणा समय देखना चाहिए, जो व्रत खोलने के लिए शुभ माना जाता है। आमतौर पर अगले दिन सूर्योदय के बाद और चतुर्दशी तिथि समाप्त होने से पहले पारणा करना उचित होता है।
भारी शारीरिक गतिविधियां न करें
व्रत के दौरान कठिन काम करने से बचें क्योंकि इससे थकान हो सकती है। इसके बजाय शांत और आध्यात्मिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करें।
नकारात्मक विचारों से दूर रहें
यह दिन सकारात्मकता और भक्ति के लिए है। आध्यात्मिक रूप से जुड़े रहने के लिए नकारात्मक विचारों और कार्यों से बचना चाहिए।
तामसिक गतिविधियों से बचें
भक्तों को व्रत के दौरान शराब, जुआ, मांसाहारी भोजन, प्याज और लहसुन से दूर रहना चाहिए। यह सभी चीजें तामसिक मानी जाती हैं और व्रत की पवित्रता को भंग करती हैं।
रात में नींद न लें
महाशिवरात्रि रात भर की पूजा के लिए जानी जाती है। भक्तों को पूरी रात जागकर ध्यान करने और मंत्र जाप करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसे शिव जागरण भी कहते हैं।
नकारात्मक भावनाओं पर नियंत्रण रखें
गुस्सा, लालच, ईर्ष्या और अहंकार जैसी भावनाओं को नियंत्रण में रखना चाहिए क्योंकि भक्त आध्यात्मिक विकास पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
व्रत का महत्व और लाभ
Mahashivratri 2026 fast timing and fasting rules: महाशिवरात्रि का व्रत केवल एक रस्म नहीं है बल्कि यह एक आध्यात्मिक अनुभव है जो उपवास, प्रार्थना और आत्म-नियत्रण को मिलाता है। इन सरल नियमों और परहेज का पालन करने से भक्त भक्ति और सुविधा के साथ व्रत रख सकते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। यह व्रत जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है और मन को शांति प्रदान करता है।
इस साल 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। यह एक ऐसा दिन है जब पूरा देश भगवान शिव की आराधना में लीन हो जाता है। व्रत रखने वाले भक्तों को सही तरीके से तैयारी करनी चाहिए और सभी नियमों का पालन करना चाहिए। इससे न केवल व्रत सफलतापूर्वक पूरा होगा बल्कि भगवान शिव की कृपा भी प्राप्त होगी।