National Workshop on “Indian Knowledge and Contemporary Society” Held at RTM Nagpur University: नागपुर शहर में रा. तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के रामानुजन हॉल में भारतीय ज्ञान और समकालीन समाज विषय पर एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह दो दिवसीय कार्यक्रम 13 और 14 फरवरी 2026 को संपन्न हुआ, जिसमें देशभर से शिक्षाविद, शोधार्थी और विद्यार्थियों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया।
विश्वविद्यालय में शिक्षा और ज्ञान की परंपरा
इस कार्यशाला का आयोजन स्नातकोत्तर समाजशास्त्र विभाग के नेतृत्व में किया गया। इसके साथ ही समाजशास्त्र पूर्व छात्र संघ, भंडारा स्थित जे. एम. पटेल कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय और आठवले समाजकार्य महाविद्यालय ने भी मिलकर इस आयोजन को सफल बनाया। कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर के मार्गदर्शन में इस कार्यशाला ने भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक संदर्भों में समझने का एक अनूठा मंच प्रदान किया।
उद्घाटन सत्र में गणमान्य व्यक्तित्व
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता वाणिज्य एवं प्रबंधन संकाय की अधिष्ठाता डॉ. मेधा कानेटकर ने की। इस अवसर पर समाजशास्त्र विभाग के प्रभारी प्रमुख डॉ. शैलेंद्र लेंडे, अध्ययन मंडल सदस्य डॉ. नरेश कोलते, पूर्व छात्र डॉ. धनंजय सोनटक्के तथा प्राचार्य डॉ. प्रदीप मेश्राम सहित कई विद्वान उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा को समकालीन शिक्षा व्यवस्था में शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

भारतीय ज्ञान परंपरा पर केंद्रित चर्चा
कार्यशाला में मुख्य रूप से भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा हुई। वक्ताओं ने बताया कि भारत की प्राचीन ज्ञान प्रणाली आज भी समकालीन समाज की समस्याओं का समाधान प्रदान कर सकती है। पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया गया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का महत्व
कार्यशाला में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के महत्व पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। विशेषज्ञों ने बताया कि नई शिक्षा नीति भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर विशेष ध्यान देती है। इससे विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। शिक्षाविदों ने कहा कि यह नीति भारतीय मूल्यों और आधुनिक शिक्षा के बीच सेतु का काम करेगी।

समकालीन सामाजिक समस्याओं पर विमर्श
कार्यशाला में समकालीन समाज की विभिन्न समस्याओं पर भी चर्चा की गई। सामाजिक असमानता, शैक्षिक विभाजन, और सांस्कृतिक पहचान के संकट जैसे मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। प्रतिभागियों ने माना कि भारतीय ज्ञान परंपरा में इन समस्याओं के समाधान मौजूद हैं। परंपरागत मूल्यों को आधुनिक संदर्भों में लागू करने की रणनीतियों पर काम करने की आवश्यकता बताई गई।
संवाद परंपरा का महत्व
भारतीय संवाद परंपरा पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। विद्वानों ने बताया कि प्राचीन भारत में शास्त्रार्थ और संवाद की समृद्ध परंपरा रही है। इस परंपरा को पुनर्जीवित करने से विद्यार्थियों में तर्कशक्ति और समालोचनात्मक सोच का विकास होगा। आधुनिक शिक्षा प्रणाली में संवाद और बहस की संस्कृति को बढ़ावा देने की जरूरत है।
समालोचनात्मक दृष्टि का विकास
कार्यशाला में विद्यार्थियों में समालोचनात्मक दृष्टि विकसित करने पर जोर दिया गया। शिक्षाविदों ने कहा कि केवल रटने की बजाय विद्यार्थियों को सोचने और प्रश्न करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु-शिष्य संवाद की परंपरा इसी दिशा में एक सशक्त माध्यम बन सकती है।
व्यापक भागीदारी और सहभागिता
इस राष्ट्रीय कार्यशाला में लगभग 150 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी, स्नातकोत्तर के विद्यार्थी और विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षक शामिल थे। सभी प्रतिभागियों ने विभिन्न सत्रों में सक्रिय रूप से भाग लिया और अपने विचार साझा किए। कार्यशाला के दौरान शोधपत्र प्रस्तुतियां, समूह चर्चा और इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किए गए।
शिक्षा में भारतीय मूल्यों का समावेश
National Workshop on “Indian Knowledge and Contemporary Society” Held at RTM Nagpur University: विशेषज्ञों ने माना कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली में भारतीय मूल्यों और ज्ञान परंपरा का समावेश बेहद जरूरी है। पश्चिमी शिक्षा पद्धति के साथ-साथ भारतीय दर्शन, योग, आयुर्वेद और परंपरागत कलाओं को पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए। इससे विद्यार्थियों का समग्र विकास होगा और वे अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहेंगे।
आगे की राह
कार्यशाला के समापन पर आयोजकों ने संकल्प लिया कि इस तरह के कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे। भारतीय ज्ञान परंपरा को शैक्षिक संस्थानों में स्थापित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए और भविष्य में इस विषय पर शोध को बढ़ावा देने का आह्वान किया गया।