मुंबई में आयोजित ‘ग्लोबल इकोनॉमिक को-ऑपरेशन 2026’ सम्मेलन महाराष्ट्र और भारत की आर्थिक शक्ति को दर्शाने वाला एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम बन गया है। इस सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक दूरदर्शी बयान देते हुए कहा कि आने वाले समय में मुंबई वैश्विक पूंजी का प्रमुख प्रवेशद्वार बनने जा रही है। उन्होंने राज्य की आर्थिक उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए निवेशकों को आकर्षित करने का संदेश दिया।
फडणवीस ने अपने संबोधन में बताया कि महाराष्ट्र भारत के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में 14 से 15 प्रतिशत का योगदान देता है। यह आंकड़ा राज्य की आर्थिक मजबूती को साबित करता है। इसके साथ ही महाराष्ट्र विदेशी निवेश के मामले में भी देश में सबसे आगे है। विदेशी कंपनियां और निवेशक महाराष्ट्र को अपना पसंदीदा गंतव्य मानते हैं क्योंकि यहां व्यापार के लिए अनुकूल माहौल है।
मुख्यमंत्री ने औद्योगिक क्षेत्र में महाराष्ट्र की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राज्य का औद्योगिक उत्पादन में 20 प्रतिशत हिस्सा है। यह दर्शाता है कि मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे कार्यक्रमों में महाराष्ट्र की महत्वपूर्ण भागीदारी है। इसके अलावा पश्चिमी बंदरगाहों से होने वाले कंटेनर यातायात का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा महाराष्ट्र से होकर गुजरता है। यह राज्य को व्यापार का एक प्रमुख केंद्र बनाता है।
फडणवीस ने बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के संदर्भ में कहा कि आज के दौर में विश्वसनीय साझेदारी ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने कहा कि विश्व तेजी से बदल रहा है और इस बदलाव में भारत और महाराष्ट्र को अपनी विशेष भूमिका निभानी है। उन्होंने निवेशकों को आश्वस्त किया कि महाराष्ट्र सरकार हर संभव सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
विदेश मंत्री का संदेश
सम्मेलन में विदेश मंत्री एस जयशंकर भी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में वैश्विक परिदृश्य का विश्लेषण करते हुए कहा कि वर्तमान समय में दुनिया अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। ऐसे में डी-रिस्किंग यानी जोखिम कम करना और विविधीकरण बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत इस दिशा में सही कदम उठा रहा है।
जयशंकर ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उद्योग, तकनीक, अवसंरचना और नवाचार में समांतर प्रगति हो रही है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। यह विकास दर स्थिर बनी हुई है और आने वाले समय में यह और मजबूत होगी।
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि वैश्विक साझेदारी में भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारत अब केवल एक बाजार नहीं बल्कि एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में उभर रहा है। उन्होंने निवेशकों से आग्रह किया कि वे भारत की इस यात्रा में भागीदार बनें।
प्रधानमंत्री का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के लिए एक विशेष संदेश भेजा। उन्होंने कहा कि अनिश्चित वैश्विक माहौल में भारत आशा की किरण है। जब दुनिया के कई देश आर्थिक मंदी और अस्थिरता का सामना कर रहे हैं, भारत उच्च विकास दर बनाए हुए है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की विशेषता कम महंगाई, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और पारदर्शी कल्याणकारी वितरण है। डिजिटल इंडिया के तहत विकसित प्लेटफॉर्म्स ने सरकारी योजनाओं को सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने में क्रांति ला दी है। इससे भ्रष्टाचार कम हुआ है और पारदर्शिता बढ़ी है।
मोदी ने कहा कि भारत का डिजिटल भुगतान तंत्र दुनिया में सबसे उन्नत है। यूपीआई जैसी सुविधाओं ने छोटे कारोबारियों को भी डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ा है। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि भारत में निवेश सुरक्षित और लाभकारी है।
महाराष्ट्र की भूमिका
महाराष्ट्र भारत की आर्थिक राजधानी है। मुंबई में स्थित भारतीय रिजर्व बैंक, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और देश की प्रमुख कंपनियों के मुख्यालय इसे वित्तीय केंद्र बनाते हैं। राज्य सरकार ने निवेश को आकर्षित करने के लिए कई सुविधाएं शुरू की हैं।
राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मेट्रो परियोजनाएं, तटीय सड़कें और बंदरगाहों का आधुनिकीकरण इसमें शामिल हैं। ये सभी कदम मुंबई और महाराष्ट्र को वैश्विक निवेश का गंतव्य बनाने में मदद करेंगे।
वैश्विक साझेदारी का महत्व
आज की दुनिया में कोई भी देश अकेले तरक्की नहीं कर सकता। वैश्विक साझेदारी और सहयोग जरूरी है। भारत ने अपनी विदेश नीति में इस बात को प्राथमिकता दी है। सम्मेलन में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई।
इस सम्मेलन ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत और महाराष्ट्र वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान बना रहे हैं। मुंबई का वैश्विक पूंजी के प्रवेशद्वार के रूप में उभरना भारत की बढ़ती ताकत का प्रतीक है।