बिहार विधानसभा में मंगल पांडे और विपक्ष के बीच तीखी बहस, सदन में बना तनाव का माहौल
Akash Srivastva, Bihar | Mangal Pandey Bihar Assembly debate On health: बिहार विधानसभा का सत्र इस बार एक बड़े हंगामे का गवाह बना। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे और विपक्ष के नेता आलोक मेहता के बीच जो बहस हुई, वह सदन की दीवारों से बाहर तक चर्चा में आ गई। बात इतनी बढ़ी कि ओसामा साहब और आलोक मेहता सहित तमाम विपक्षी सदस्य सदन छोड़कर बाहर चले गए। यह दृश्य बिहार की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे गया।

मंगल पांडे ने आलोक मेहता को दिया खुला जवाब
सदन में उस वक्त माहौल एकदम गरम हो गया जब स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने विपक्ष के नेता आलोक मेहता की तरफ मुड़कर सीधे कहा कि आलोक जी, भाषण मत दीजिए, सदन छोड़कर भागना पड़ेगा। यह बात सुनते ही सदन में शोर मच गया। सत्ता पक्ष के सदस्य मेज थपथपाने लगे और विपक्ष के सदस्य खड़े होकर विरोध जताने लगे।

मंगल पांडे का यह अंदाज पहली बार नहीं था कि उन्होंने विपक्ष को सीधे और तीखे शब्दों में जवाब दिया हो, लेकिन इस बार का लहजा कुछ ज्यादा ही तीखा था। सदन में बैठे सभी लोग इस पल को देखकर हैरान रह गए।
तीसरी बार स्वास्थ्य मंत्री, अनुभव भी दिखा
मंगल पांडे तीसरी बार बिहार के स्वास्थ्य मंत्री के रूप में काम कर रहे हैं। इस वजह से उनके पास इस विभाग का लंबा अनुभव है। जब विपक्ष ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए तो मंगल पांडे ने बिंदु दर बिंदु जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो काम किए हैं, वह जमीन पर दिखते हैं और लोगों तक पहुंचे हैं।
उन्होंने सदन में कहा कि विपक्ष सिर्फ बोलने के लिए बोलता है, लेकिन जब तथ्यों की बात आती है तो जवाब नहीं होता। उनके इस बयान के बाद सदन में एक बार फिर शोर बढ़ गया।

सिवान की बात सदन में उठाई
मंगल पांडे सिवान जिले से विधायक हैं। सदन में उन्होंने अपने इलाके सिवान से जुड़ी स्वास्थ्य सुविधाओं और योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सिवान में किस तरह से अस्पतालों को बेहतर बनाया गया है, नई सुविधाएं जोड़ी गई हैं और आम लोगों को इसका फायदा मिल रहा है।
उनका यह कदम इस बात का भी संकेत था कि वह अपने क्षेत्र की जरूरतों को लेकर सदन में बोलने से नहीं चूकते। सिवान के लोगों के लिए उन्होंने जो मुद्दे उठाए, उससे उनके विधायक के रूप में जुड़ाव भी साफ दिखा।

विपक्ष ने किया सदन से बाहर जाने का फैसला
जैसे-जैसे बहस तीखी होती गई, माहौल और तनावपूर्ण हो गया। विपक्ष के नेता आलोक मेहता ने जब देखा कि सदन में उनकी बात को वजन नहीं मिल रहा और सत्ता पक्ष का रुख आक्रामक है, तो उन्होंने बाकी विपक्षी सदस्यों के साथ मिलकर सदन छोड़ने का फैसला किया। ओसामा साहब सहित तमाम विपक्षी सदस्य सदन से बाहर चले गए।
यह वॉकआउट बिहार विधानसभा में एक बड़ी घटना बन गई। बाहर जाने के बाद विपक्षी नेताओं ने कहा कि सरकार सुनने के लिए तैयार नहीं है और सदन में बात करने का कोई मतलब नहीं रह गया था।
राजनीतिक जानकारों की राय
Mangal Pandey Bihar Assembly On health debate: राजनीति को करीब से देखने वाले जानकारों का कहना है कि यह बहस सिर्फ नेताओं की आपसी तकरार नहीं थी। इसके पीछे स्वास्थ्य व्यवस्था, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और विपक्ष की जवाबदेही से जुड़े असली सवाल थे।
जानकारों का यह भी कहना है कि जब सदन में इस तरह की बहस होती है, तो यह दरअसल जनता के मुद्दों को आवाज देने का एक तरीका होता है। लेकिन जब बात बयानबाजी में बदल जाए और विपक्ष सदन छोड़ दे, तो असली मुद्दे पीछे रह जाते हैं।
बिहार की राजनीति और आगे का रास्ता
बिहार विधानसभा में इस तरह की नोकझोंक पहले भी होती रही है। लेकिन जिस तरह से इस बार मंगल पांडे ने विपक्ष को सीधे ललकारा और विपक्ष ने सदन छोड़ा, वह आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में एक चर्चा का विषय बना रहेगा। सरकार और विपक्ष के बीच यह टकराव बताता है कि बिहार में राजनीतिक बहस अभी और तीखी होने वाली है।