Batul Garai illegal coal mining conviction Paschim Bardhaman: पश्चिम बंगाल के आसनसोल इलाके में अवैध कोयला खनन के खिलाफ चल रहे अभियान के दौरान एक सुरक्षाकर्मी पर हमले के मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। पश्चिम बर्धमान जिला अदालत ने आरोपी बाटुल गड़ाई को आठ साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि अगर जुर्माना नहीं भरा गया तो एक महीने की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
घटना की पूरी कहानी
साल 2021 की 9 मई को ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) की टीम अवैध कोयला खनन के खिलाफ अभियान चला रही थी। इस दौरान कंपनी के सिक्योरिटी इंस्पेक्टर दिलीप प्रसाद के साथ हमले की घटना हुई। आरोप है कि बाटुल गड़ाई और उसके साथियों ने सुरक्षाकर्मी पर जानलेवा हमला किया।
जैसे ही घटना की सूचना मिली, सीआईएसएफ बल मौके पर पहुंचा। लेकिन तब तक आरोपी मौके से भाग चुके थे। बाद में पुलिस ने जांच के दौरान बाटुल गड़ाई को गिरफ्तार किया।

बाराबनी थाने में दर्ज हुआ मामला
इस हमले के बाद बाराबनी थाने में केस दर्ज किया गया। पुलिस ने लंबी जांच की और सभी सबूत इकट्ठे किए। मामला आसनसोल जिला अदालत में पहुंचा, जहां कुल 10 गवाहों ने अपनी गवाही दी।
गवाहों में ईसीएल के अधिकारी और स्थानीय लोग शामिल थे। सभी ने अपने बयानों में बाटुल गड़ाई की भूमिका की पुष्टि की। पीड़ित सुरक्षाकर्मी दिलीप प्रसाद ने भी अदालत में विस्तार से घटना का ब्योरा दिया।

अदालत का फैसला
पश्चिम बर्धमान जिला के जिला जज देबप्रसाद नाथ ने सभी सबूतों और गवाहों के बयानों को ध्यान से देखा। उन्होंने भारतीय दंड संहिता की धारा 325 और 307 के तहत बाटुल गड़ाई को दोषी पाया।
धारा 325 में गंभीर चोट पहुंचाने का प्रावधान है, जबकि धारा 307 हत्या के प्रयास से जुड़ी है। अदालत ने माना कि यह हमला सिर्फ धमकी नहीं, बल्कि जानलेवा था।
जज ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इसलिए सख्त सजा जरूरी है।

वकील की प्रतिक्रिया
सरकारी पक्ष के वकील अयनजीत बंद्योपाध्याय ने कहा कि अदालत ने बहुत सही फैसला लिया है। उन्होंने बताया कि इस तरह के मामलों में सख्ती जरूरी है ताकि कोई भी कानून को हाथ में लेने की हिम्मत न करे।
वकील ने यह भी कहा कि यह फैसला उन लोगों के लिए सबक होगा जो अवैध धंधे में शामिल हैं और कानून का पालन करने वाले अधिकारियों को डराने की कोशिश करते हैं।

अवैध कोयला कारोबार की समस्या
पश्चिम बंगाल के कोयला इलाकों में अवैध खनन लंबे समय से एक बड़ी समस्या रही है। स्थानीय माफिया और तस्कर खुलेआम कोयला चुराते हैं और बेचते हैं। इससे न सिर्फ सरकार को नुकसान होता है, बल्कि पर्यावरण को भी भारी क्षति पहुंचती है।
ईसीएल और अन्य कोयला कंपनियां समय-समय पर अभियान चलाती हैं। लेकिन इन अभियानों में काम करने वाले अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों को अक्सर खतरों का सामना करना पड़ता है। कई बार हमले भी होते हैं।
इलाके में प्रतिक्रिया
इस फैसले के बाद आसनसोल और आसपास के औद्योगिक इलाके में काफी चर्चा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह फैसला सही दिशा में उठाया गया कदम है।
प्रशासन और स्थानीय नेता मानते हैं कि यह फैसला अवैध कोयला कारोबार के खिलाफ एक मजबूत संदेश देता है। अब अपराधियों को डर रहेगा कि कानून तोड़ने पर उन्हें भी कड़ी सजा मिल सकती है।
कानून का संदेश
Batul Garai illegal coal mining conviction Paschim Bardhaman: यह फैसला इस बात का प्रमाण है कि न्याय व्यवस्था मजबूत है और समय लगने के बावजूद अपराधियों को सजा जरूर मिलती है। चार साल बाद भी अदालत ने पूरे मामले की गहन जांच की और सही फैसला सुनाया।
सुरक्षाकर्मियों और सरकारी कर्मचारियों पर हमले की घटनाओं को लेकर यह फैसला एक मिसाल बनेगा। अब अपराधी यह नहीं सोच पाएंगे कि वे ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को डरा सकते हैं।
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस तरह के और भी मामलों में जल्द फैसला आएगा और अपराधियों को सजा मिलेगी। यह इलाके में कानून व्यवस्था को मजबूत करने में मदद करेगा।