माओवादी संगठन के सर्वोच्च नेता देवजी ने तेलंगाना पुलिस के सामने डाले हथियार
Top Maoist Leader Devji Surrenders to Telangana Police: देश की आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सुरक्षा एजेंसियों से लेकर नीति-निर्माताओं तक सभी को चौंका दिया है। माओवादी संगठन के सर्वोच्च नेता देवजी उर्फ तीपिरी तिरुपति ने अपने सोलह साथियों के साथ तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। यह घटना वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है। दस करोड़ रुपये का इनाम लेकर चल रहे इस माओवादी नेता के झुकने से पूरे संगठन की नींव हिल गई है।
संगठन पर क्या पड़ेगा असर
Tipiri Tirupati Surrender News: देवजी लंबे समय से माओवादी संगठन की रीढ़ माने जाते थे। उनकी रणनीतिक सोच और संगठनात्मक पकड़ के चलते सुरक्षा बलों को वर्षों तक उन्हें पकड़ने में सफलता नहीं मिली थी। सूत्रों के अनुसार, वे लंबे अरसे से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर थे और उनके आत्मसमर्पण की संभावना पिछले कुछ महीनों से जताई जा रही थी। अब जब वे स्वयं सामने आ गए हैं, तो संगठन के नेतृत्वहीन होने की आशंका प्रबल हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में संगठन के अन्य सदस्य भी या तो बिखर जाएंगे अथवा मुख्यधारा में लौटने का विकल्प चुनेंगे।
तेलंगाना पुलिस की बड़ी कूटनीतिक जीत
तेलंगाना पुलिस के लिए यह आत्मसमर्पण महज एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, खुफिया जानकारी और कूटनीतिक संवाद का परिणाम है। सुरक्षा एजेंसियों ने बिना किसी बड़े रक्तपात के देश के सबसे वांछित माओवादी नेताओं में से एक को कानून के सामने लाने में सफलता पाई है। यह उपलब्धि न केवल तेलंगाना के लिए बल्कि उन सभी राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक है जो वामपंथी उग्रवाद से जूझते आए हैं।
आधिकारिक घोषणा का इंतजार
सूत्रों का कहना है कि इस आत्मसमर्पण की आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत जानकारी अगले दो दिनों के भीतर सार्वजनिक की जाएगी। संभव है कि तेलंगाना सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय दोनों मिलकर एक संयुक्त बयान जारी करें। यह घोषणा माओवाद विरोधी अभियान की दिशा और आगे की रणनीति पर भी प्रकाश डाल सकती है।
देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए निर्णायक मोड़
Top Maoist Leader Devji Surrenders to Telangana Police: पिछले कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारों ने वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ बहुआयामी रणनीति अपनाई है, जिसमें सैन्य बल के साथ-साथ विकास योजनाओं और पुनर्वास कार्यक्रमों को भी महत्व दिया गया है। देवजी का आत्मसमर्पण इस नीति की सफलता का प्रमाण है। यह घटना इस बात का भी संकेत देती है कि माओवादी विचारधारा अब उस आकर्षण को खो चुकी है जिसके बल पर कभी यह आंदोलन जंगलों से लेकर शहरों तक फैला था। जब संगठन का शीर्ष नेता ही कानून के सामने झुक जाए, तो निचले स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटना स्वाभाविक है।
यह आत्मसमर्पण देश के लोकतांत्रिक ढांचे और संविधान में आस्था की जीत के रूप में देखा जाना चाहिए। आने वाले दिनों में इस घटना के दूरगामी परिणाम सामने आएंगे और वामपंथी उग्रवाद की पूरी संरचना पर इसका गहरा प्रभाव पड़ना तय है।