झारग्राम मेडिकल कॉलेज में मधुमक्खियों का कहर, ठप हुई आउटडोर सेवा
Giant Bee Swarm Attack Shuts OPD at Jhargram Medical College Hospital West Bengal: पश्चिम बंगाल के झारग्राम जिले से एक अजीब और चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मधुमक्खियों के एक विशाल झुंड ने ऐसा कहर बरपाया कि पूरी आउटडोर सेवा ठप हो गई। जो अस्पताल बीमारों को राहत देने के लिए होता है, वहीं खुद एक चिकित्सक, कई कर्मचारी और मरीजों के परिजन मधुमक्खियों के डंक से घायल हो गए। शुक्रवार से आउटडोर विभाग का मुख्य गेट बंद पड़ा है और इलाज के लिए आने वाले सैकड़ों मरीज दर-दर भटकने पर मजबूर हैं।
कहां से हुई इस आफत की शुरुआत
अस्पताल परिसर के मुख्य द्वार के पास एक बड़े पेड़ पर काफी समय से एक विशाल मधुमक्खी का छत्ता बना हुआ था। अचानक मधुमक्खियों का यह झुंड सक्रिय हो उठा और अस्पताल के मैदान में मौजूद लोगों पर टूट पड़ा। किसी को इतनी जल्दी कुछ समझने का मौका भी नहीं मिला। देखते ही देखते अस्पताल परिसर में भगदड़ मच गई और लोग इधर-उधर छिपने लगे। इस हमले में एक चिकित्सक, कई अस्पताल कर्मचारी और मरीजों के परिजनों को डंक का शिकार होना पड़ा। सभी घायलों को तुरंत उपचार दिया गया।
वन विभाग और दमकल की कोशिश रही बेनतीजा
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गुरुवार रात को वन विभाग और दमकल विभाग की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। लंबे समय तक प्रयास करने के बाद भी वे मधुमक्खी का छत्ता हटाने में सफल नहीं हो सकीं। मधुमक्खियों की तादाद और छत्ते का आकार इतना बड़ा था कि बिना किसी विशेष तकनीकी सहायता के उसे हटाना संभव नहीं हो सका। इस असफलता के बाद अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से आउटडोर विभाग के सभी गेट बंद रखने का निर्णय लिया।
मरीजों की बढ़ती परेशानी
आउटडोर सेवा बाधित होने का सबसे बड़ा खामियाजा उन गरीब और जरूरतमंद मरीजों को भुगतना पड़ रहा है जो दूर-दराज के गांवों से घंटों सफर कर इलाज के लिए आते हैं। मुख्य गेट बंद होने के कारण उन्हें इलाज के लिए वैकल्पिक रास्तों से प्रवेश करना पड़ रहा है जिससे भारी असुविधा हो रही है। कई मरीज बिना इलाज कराए ही लौटने को मजबूर हुए। यह स्थिति न केवल रोगियों के लिए कठिनाई का कारण है बल्कि अस्पताल की सामान्य कार्यप्रणाली के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गई है।
अस्पताल प्रशासन की चिंता और आगे की राह
अस्पताल प्रशासन ने स्वीकार किया है कि जब तक मधुमक्खी का छत्ता सुरक्षित तरीके से नहीं हटाया जाता तब तक सेवाओं को पूरी तरह सामान्य करना संभव नहीं है। इसके लिए विशेषज्ञों की मदद लेने पर विचार किया जा रहा है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि मरीजों की सेवाएं किसी वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए जारी रहें ताकि कोई भी जरूरतमंद इलाज से वंचित न रहे।
यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि अस्पताल परिसर में पेड़-पौधों और उन पर बनने वाले छत्तों की नियमित निगरानी कितनी जरूरी है। एक लापरवाही ने पूरे अस्पताल की व्यवस्था को हिलाकर रख दिया। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन कब तक इस समस्या का स्थायी समाधान निकालता है और झारग्राम मेडिकल कॉलेज की आउटडोर सेवाएं कब तक सामान्य हो पाती हैं।