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‘Idli Kadai’ फिल्म समीक्षा: धनुष ने रसोई और भावनाओं का स्वाद चखा दिया

Idli Kadai Movie Review – Dhanush’s Heartwarming Culinary Drama
Idli Kadai Movie Review – Dhanush’s Heartwarming Culinary Drama
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‘Idli Kadai’ का कहानी सार

नई दिल्ली – अभिनेता और निर्देशक धनुष की नवीनतम फिल्म ‘Idli Kadai’ अपने स्वादिष्ट व्यंजन और भावनाओं के मेल से दर्शकों को आकर्षित करती है। फिल्म का मुख्य किरदार मुरुगन अपने पिता शिवनेशन की पारंपरिक इडली रेसिपी को पूरी तरह से सीखने और परफेक्ट बनाने की कोशिश करता है।

मुरुगन की चुनौती

मुरुगन लगातार वही रूटीन अपनाता है, वही सामग्री इस्तेमाल करता है और पीसने की प्रक्रिया को दोहराता है, लेकिन वह पिता की इडली जैसा स्वाद नहीं बना पाता। यही फिल्म का मुख्य तनाव बिंदु है – परफेक्शन और पारंपरिक ज्ञान के बीच संघर्ष। अंततः मुरुगन को सफलता मिलती है, यह दर्शाता है कि कभी-कभी कोई रहस्य नहीं, बल्कि अनुभव और हाथों का अदृश्य कौशल ही परफेक्ट स्वाद का राज होता है।

धनुष की निर्देशक क्षमता और अभिनय

‘Idli Kadai’ धनुष की चौथी निर्देशन में बनी फिल्म है। उन्होंने इस फिल्म में शहर और ग्रामीण जीवन के बीच के अंतर, पारिवारिक संबंध और युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं को खूबसूरती से प्रस्तुत किया है। मुख्य अभिनेता के रूप में धनुष ने अपने अभिनय में भावनाओं और हास्य का संतुलन बनाए रखा।

सहायक कलाकारों का योगदान

राजकिरण, नित्या मेनन, शालिनी पांडे, और अरुण विजय जैसे कलाकारों ने फिल्म में जीवंतता और वास्तविकता जोड़ी। राजकिरण ने पिता शिवनेशन की भूमिका में दिल जीत लिया, जबकि नित्या मेनन और शालिनी पांडे ने फिल्म में भावनात्मक गहराई बढ़ाई।

फिल्म की कथा और ट्विस्ट

मुरुगन, जो बैंकॉक के एक प्रसिद्ध होटल में शेफ बन चुका है, अपनी मंगनी और कैरियर के बीच फंसा होता है। अपने पिता की दुकान संभालने और परिवारिक दायित्व निभाने के लिए वह अपने शहर संकरापुरम लौटता है। कहानी में संघर्ष, पारिवारिक दबाव और सामाजिक अपेक्षाओं का मिश्रण है।

व्यावसायिक और भावनात्मक तत्व

फिल्म का पहला भाग कुछ क्लिच्ड और शहरी आलोचना पर आधारित है, लेकिन धीरे-धीरे यह भावनात्मक और पारिवारिक संबंधों के इर्द-गिर्द घूमती है। दर्शक मुरुगन के संघर्ष और सफलता में अपने अनुभवों को महसूस कर पाते हैं।

‘Idli Kadai’ एक ऐसी फिल्म है जो पारंपरिक स्वाद और आधुनिक जीवन शैली के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती है। धनुष ने निर्देशन और अभिनय दोनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। फिल्म दर्शकों को भावनात्मक रूप से संतुष्ट करती है और अंत में एक “फुल हार्ट” अनुभव देती है।

Aryan Ambastha

राष्ट्रभारत डॉट कॉम में लेखक एवं विचारक | वित्त और उभरती तकनीकों में गहरी रुचि | राजनीति एवं समसामयिक मुद्दों के विश्लेषक | कंटेंट क्रिएटर | नालंदा विश्वविद्यालय से स्नातक।

प्रौद्योगिकी, वित्त, राजनीति और समाज के आपसी संबंधों को समझने और व्याख्या करने का विशेष कौशल रखते हैं। जटिल विषयों को सरल, शोध-आधारित और संतुलित दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुँचाना इनकी पहचान है। संपर्क: aryan.ambastha@rashtrabharat.com