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बाथरूम में शीशा लगाने से पहले जान लें ये जरूरी वास्तु नियम, गलती से भी ना करें ये काम

Bathroom Mirror Vastu Tips : बाथरूम में शीशा लगाने के नियम और सही दिशा की जानकारी
Bathroom Mirror Vastu Tips : बाथरूम में शीशा लगाने के नियम और सही दिशा की जानकारी
वास्तु शास्त्र के अनुसार बाथरूम में शीशा लगाना सही है, लेकिन सही दिशा और आकार का ध्यान रखना जरूरी है। शीशा उत्तर या पूर्व दिशा में लगाएं और दरवाजे के सामने कभी न लगाएं। गोलाकार या वर्गाकार आईना शुभ होता है। दक्षिण-पश्चिम दिशा के बाथरूम में पूर्व दीवार पर वर्गाकार शीशा लगाने से वास्तु दोष दूर होता है।
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हमारे घर की हर चीज और हर कोने का अपना एक खास महत्व होता है। वास्तु शास्त्र में घर के हर हिस्से को लेकर विशेष नियम बताए गए हैं। इन नियमों का पालन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और परिवार के सदस्यों को मानसिक शांति मिलती है। आज के समय में लोग अपने घर को सजाने और सुविधाजनक बनाने के लिए कई तरह की चीजों का इस्तेमाल करते हैं। इन्हीं में से एक है बाथरूम में शीशा लगाना।

बाथरूम घर का वह हिस्सा है जहां हम रोजाना सुबह की शुरुआत करते हैं। यहीं से हमारे दिन की शुरुआत होती है। ऐसे में इस जगह की ऊर्जा का सकारात्मक होना बेहद जरूरी है। वास्तु शास्त्र के अनुसार बाथरूम एक ऐसी जगह है जहां घर की नकारात्मक ऊर्जा इकट्ठा होती है। पानी के निरंतर प्रवाह के कारण यह स्थान विशेष रूप से संवेदनशील माना जाता है। इसलिए बाथरूम में किसी भी चीज को लगाने या रखने से पहले वास्तु नियमों का पालन करना आवश्यक हो जाता है।

बाथरूम में शीशे का महत्व

आजकल लगभग हर घर में बाथरूम में शीशा लगाया जाता है। यह हमारी दैनिक दिनचर्या का एक अहम हिस्सा बन गया है। सुबह उठकर मुंह धोने, ब्रश करने, बाल संवारने और तैयार होने के दौरान हम शीशे का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाथरूम में शीशा लगाने की भी एक सही विधि होती है? वास्तु शास्त्र में इसके लिए विशेष नियम बताए गए हैं।

वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, बाथरूम में शीशा लगाना गलत नहीं है। लेकिन इसकी दिशा, आकार और स्थिति का विशेष ध्यान रखना चाहिए। अगर इन बातों का ध्यान नहीं रखा गया तो यह घर में वास्तु दोष पैदा कर सकता है। इससे घर के सदस्यों को मानसिक परेशानी, स्वास्थ्य समस्याएं और आर्थिक नुकसान हो सकता है।

Bathroom Mirror Vastu Tips : बाथरूम में शीशा लगाने के नियम और सही दिशा की जानकारी
Bathroom Mirror Vastu Tips : बाथरूम में शीशा लगाने के नियम और सही दिशा की जानकारी

शीशा लगाने की सही दिशा

वास्तु के अनुसार बाथरूम में शीशा लगाने के लिए उत्तर और पूर्व दिशा सबसे उत्तम मानी जाती है। इन दिशाओं में शीशा लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। उत्तर दिशा को धन और समृद्धि का स्थान माना जाता है, जबकि पूर्व दिशा सूर्य की पहली किरणों का स्वागत करती है। इन दिशाओं में शीशा लगाने से घर के सदस्यों को मानसिक शांति मिलती है।

अगर आप बाथरूम में आईना लगाना चाहते हैं तो इसे पूर्व या उत्तर की दीवार पर ही लगाएं। इन दीवारों पर गोलाकार आईना लगाना सबसे बेहतर रहता है। गोलाकार आईना न सिर्फ देखने में अच्छा लगता है, बल्कि यह मन में सकारात्मक विचारों को भी जन्म देता है। गोल आकार की वस्तुएं वास्तु में शुभ मानी जाती हैं क्योंकि इनमें कोई नुकीला कोना नहीं होता।

Bathroom Mirror Vastu Tips : बाथरूम में शीशा लगाने के नियम और सही दिशा की जानकारी
Bathroom Mirror Vastu Tips : बाथरूम में शीशा लगाने के नियम और सही दिशा की जानकारी

दरवाजे के सामने शीशा लगाने से बचें

बाथरूम में शीशा लगाते समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे कभी भी दरवाजे के ठीक सामने नहीं लगाना चाहिए। इसके पीछे एक खास वास्तु तर्क है। जब हम बाथरूम में प्रवेश करते हैं तो हमारे साथ सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की ऊर्जाएं भी प्रवेश करती हैं। अगर दरवाजे के सामने शीशा लगा हो तो यह नकारात्मक ऊर्जा को वापस घर में परावर्तित कर देता है।

यह स्थिति घर में नकारात्मकता बढ़ा सकती है। इससे घर के सदस्यों में आपसी विवाद, स्वास्थ्य समस्याएं और मानसिक तनाव बढ़ सकता है। इसलिए हमेशा शीशे को दरवाजे से थोड़ी दूरी पर और पूर्व या उत्तर दिशा की दीवार पर ही लगाना चाहिए।

दक्षिण-पश्चिम दिशा में बने बाथरूम के लिए खास टिप्स

अगर आपके घर में बाथरूम दक्षिण-पश्चिम दिशा में बना है, तो यह वास्तु के अनुसार शुभ नहीं माना जाता। लेकिन अगर बाथरूम पहले से ही इस दिशा में बना हो तो कुछ उपायों से इस वास्तु दोष को कम किया जा सकता है। इसके लिए आप पूर्व दिशा की दीवार पर वर्गाकार आईना लगा सकते हैं। वर्गाकार आईना स्थिरता का प्रतीक होता है और यह दक्षिण-पश्चिम दिशा के वास्तु दोष को संतुलित करने में मदद करता है।

इस दिशा में वर्गाकार शीशा लगाने से घर में फैली नकारात्मक ऊर्जा धीरे-धीरे कम होने लगती है। साथ ही परिवार के सदस्यों को मानसिक शांति मिलती है और आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।

शीशे के आकार का महत्व

वास्तु में शीशे के आकार को भी बहुत महत्व दिया जाता है। बाथरूम में तीन तरह के आकार के शीशे इस्तेमाल किए जा सकते हैं – गोलाकार, वर्गाकार और आयताकार। गोलाकार आईना सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है और यह मन में शांति लाता है। वर्गाकार आईना स्थिरता देता है और आयताकार आईना संतुलन बनाए रखता है।

कभी भी टूटे हुए, धुंधले या दरारयुक्त शीशे का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसे शीशे नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देते हैं और घर में अशांति फैलाते हैं। हमेशा साफ, चमकदार और बिना दाग वाले शीशे का ही इस्तेमाल करें।

अन्य महत्वपूर्ण वास्तु सुझाव

बाथरूम के शीशे को नियमित रूप से साफ रखें। गंदे या धुंधले शीशे में देखना वास्तु के अनुसार अशुभ माना जाता है। इससे मानसिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। शीशे की साफ-सफाई का नियमित ध्यान रखें और उसे हमेशा चमकदार बनाए रखें।

बाथरूम में बड़ी दीवार के आकार का शीशा लगाने से बचें। इतना बड़ा शीशा ऊर्जा को बहुत तीव्रता से परावर्तित करता है, जो घर में असंतुलन पैदा कर सकता है। मध्यम आकार का शीशा ही लगाएं जो केवल चेहरा और ऊपरी शरीर दिखाए।

अगर संभव हो तो बाथरूम में शीशे के साथ पौधे या फूलों की तस्वीर भी लगा सकते हैं। यह सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने में मदद करता है। लेकिन ध्यान रहे कि बाथरूम में असली पौधे रखना वास्तु के अनुसार उचित नहीं माना जाता।

बाथरूम में शीशा लगाना कोई गलत बात नहीं है। लेकिन इसके लिए वास्तु नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। सही दिशा, सही आकार और सही स्थिति में लगाया गया शीशा घर में सकारात्मक ऊर्जा लाता है। उत्तर या पूर्व दिशा में गोलाकार या वर्गाकार शीशा लगाना सबसे उत्तम है। दरवाजे के सामने कभी भी शीशा नहीं लगाना चाहिए। इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप अपने घर में सकारात्मक माहौल बना सकते हैं और परिवार के सदस्यों के जीवन में खुशहाली ला सकते हैं।


नोट: यह जानकारी सामान्य वास्तु सिद्धांतों, धर्म ग्रंथों और विभिन्न माध्यमों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। किसी भी विशेष परामर्श के लिए वास्तु विशेषज्ञ से उचित सलाह अवश्य लें।


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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।