केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि हाल के सभी मुक्त व्यापार समझौते भारत के राष्ट्रीय हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखते हुए किए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे समझौते यूरोपीय संघ के साथ हों या संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ, हर जगह किसानों के हितों को सबसे ऊपर रखा गया है।
उन्होंने यह बात आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के 64वें दीक्षांत समारोह में कही, जो नई दिल्ली में आयोजित हुआ। इस अवसर पर उन्होंने देश की कृषि उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की।
कृषि क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत
मंत्री ने कहा कि आज भारत कृषि उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। धान उत्पादन में भारत ने चीन को पीछे छोड़कर दुनिया में पहला स्थान हासिल किया है। साथ ही भारतीय गेहूं की किस्में भी दुनिया के कई देशों में अपनी गुणवत्ता के कारण पहचान बना रही हैं।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल किसानों की मेहनत ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिकों और शोध संस्थानों के लगातार प्रयासों का भी परिणाम है। कृषि क्षेत्र में नई तकनीक, बेहतर बीज और आधुनिक खेती के तरीकों ने उत्पादन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
किसानों के हित सर्वोपरि
शिवराज सिंह चौहान ने जोर देकर कहा कि सरकार का हर निर्णय किसानों को ध्यान में रखकर लिया जाता है। मुक्त व्यापार समझौतों के दौरान भी यह सुनिश्चित किया गया कि भारतीय किसानों को किसी प्रकार का नुकसान न हो। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि किसान अधिक कमाई करें और देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत बनी रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में कृषि क्षेत्र में निवेश और बढ़ाया जाएगा, जिससे खेती को और आधुनिक बनाया जा सके और किसानों की आय में निरंतर वृद्धि हो।
विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका
मंत्री ने समारोह में उपस्थित छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि देश तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर और विकसित भारत का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें युवाओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग देश के विकास के लिए करें। उन्होंने कहा कि जीवन में धैर्य और सकारात्मक सोच बहुत जरूरी है। कठिन परिस्थितियों में भी निराश होने के बजाय आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए।
कृषि अनुसंधान संस्थानों का महत्व
यह संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत कार्य करता है और पिछले कई दशकों से देश की खाद्य और पोषण सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। नए बीजों का विकास, जलवायु के अनुसार खेती के तरीके और नई तकनीकें विकसित करने में इस संस्थान की बड़ी भूमिका रही है।
दीक्षांत समारोह में कुल 470 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई, जिनमें 290 छात्रों को स्नातकोत्तर और 180 शोधार्थियों को पीएचडी की डिग्री दी गई। यह समारोह संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का प्रतीक रहा।
कृषि और व्यापार नीति का संतुलन जरूरी
आज के समय में वैश्विक व्यापार तेजी से बदल रहा है और देशों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। ऐसे में भारत के लिए यह जरूरी है कि वह व्यापार समझौतों के साथ-साथ अपने किसानों और उद्योगों के हितों को भी सुरक्षित रखे। मंत्री का यह बयान इस दिशा में सरकार की स्पष्ट नीति को दर्शाता है कि विकास और राष्ट्रीय हितों के बीच संतुलन बनाए रखा जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कृषि अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और सही व्यापार नीति को साथ-साथ आगे बढ़ाया जाए, तो भारत आने वाले वर्षों में कृषि निर्यात के क्षेत्र में भी बड़ी ताकत बन सकता है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।