Petrol-Diesel Price: आज के समय में दिन की शुरुआत केवल अलार्म की आवाज या सूरज की पहली किरण से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की ताजा कीमतों से भी होती है। सुबह 6 बजे जैसे ही देश की तेल विपणन कंपनियां नई दरें जारी करती हैं, करोड़ों लोगों की निगाहें उन आंकड़ों पर टिक जाती हैं। वजह साफ है—पेट्रोल और डीजल केवल ईंधन नहीं, बल्कि आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी की धड़कन बन चुके हैं।
ऑफिस जाने वाला कर्मचारी हो, स्कूल बस चलाने वाला चालक हो या फिर फल-सब्जी का ठेला लगाने वाला व्यापारी—ईंधन की कीमतें हर किसी के खर्च और आमदनी को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं। 10 जनवरी 2026 को भी देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के भाव लगभग स्थिर नजर आए, जिसने लोगों को थोड़ी राहत जरूर दी, लेकिन सवाल अब भी कायम है कि यह स्थिरता कब तक बनी रहेगी।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें और राष्ट्रीय परिदृश्य
आज देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव और डॉलर-रुपया विनिमय दर से तय होती हैं। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए कर भी कीमतों में अहम भूमिका निभाते हैं। बीते दो वर्षों से कीमतों में बहुत बड़ा उतार-चढ़ाव न होना एक असामान्य स्थिति मानी जा सकती है, खासकर तब, जब वैश्विक बाजार लगातार अस्थिर रहे हैं।
प्रमुख शहरों में आज के ताजा रेट
10 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में पेट्रोल ₹94.72 और डीजल ₹87.62 प्रति लीटर रहा। मुंबई में पेट्रोल ₹104.21 और डीजल ₹92.15 दर्ज किया गया। कोलकाता में पेट्रोल ₹103.94 और डीजल ₹90.76 रहा, जबकि चेन्नई में पेट्रोल ₹100.75 और डीजल ₹92.34 प्रति लीटर रहा।
अहमदाबाद, बेंगलुरु, हैदराबाद, जयपुर, लखनऊ, पुणे, चंडीगढ़, इंदौर, पटना, सूरत और नासिक जैसे शहरों में भी कीमतें अलग-अलग रहीं, लेकिन कुल मिलाकर किसी बड़े बदलाव के संकेत नहीं मिले।
कीमतें तय होने की प्रक्रिया
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें रोजाना तय होती हैं। तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, परिवहन लागत, रिफाइनिंग खर्च और टैक्स को ध्यान में रखकर दरें तय करती हैं। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों में कीमतों में अंतर दिखाई देता है, क्योंकि टैक्स की दरें समान नहीं होतीं।
पिछले दो वर्षों से स्थिरता का कारण
मई 2022 के बाद केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों ने पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले करों में कटौती की थी। इसके बाद से कीमतों में अपेक्षाकृत स्थिरता देखने को मिली। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊपर-नीचे होती रहीं, लेकिन सरकारों ने उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े, इसका ध्यान रखा।
आम आदमी पर इसका सीधा असर
ईंधन की कीमतें बढ़ती हैं तो उसका असर केवल वाहन चलाने तक सीमित नहीं रहता। सब्जियों से लेकर दूध, किराना और ऑनलाइन डिलीवरी तक हर चीज महंगी हो जाती है। कीमतों की मौजूदा स्थिरता ने महंगाई पर कुछ हद तक लगाम जरूर लगाई है, जिससे आम लोगों को राहत महसूस हो रही है।
व्यापार और परिवहन क्षेत्र की स्थिति
परिवहन क्षेत्र ईंधन की कीमतों पर सबसे अधिक निर्भर करता है। ट्रक चालक, बस ऑपरेटर और टैक्सी सेवाएं पेट्रोल-डीजल के दाम देखकर ही अपने किराए तय करती हैं। लंबे समय से कीमतें स्थिर रहने से इस क्षेत्र को भी योजना बनाने में आसानी मिली है।