Petrol-Diesel Price: हर सुबह दिन की शुरुआत सिर्फ अलार्म की आवाज या सूरज की रोशनी से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों पर एक नजर डालने से भी होती है। ऑफिस जाने वाले कर्मचारी से लेकर सब्जी मंडी में माल ढोने वाले व्यापारी तक, हर किसी की जेब इन कीमतों से जुड़ी हुई है।
देश में रोज सुबह 6 बजे तेल विपणन कंपनियां पेट्रोल और डीजल की ताजा कीमतें जारी करती हैं। ये दरें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव और डॉलर-रुपया विनिमय दर में हुए बदलावों पर आधारित होती हैं। यही वजह है कि वैश्विक घटनाओं का असर सीधे घरेलू ईंधन कीमतों पर देखने को मिलता है।
14 जनवरी 2026 के प्रमुख शहरों के ताजा रेट
14 जनवरी 2026 को जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, देश के प्रमुख महानगरों में पेट्रोल-डीजल के दाम इस प्रकार बने हुए हैं। राजधानी नई दिल्ली में पेट्रोल ₹94.72 प्रति लीटर और डीजल ₹87.62 प्रति लीटर पर स्थिर है। मुंबई में पेट्रोल ₹104.21 और डीजल ₹92.15 प्रति लीटर दर्ज किया गया है। कोलकाता में पेट्रोल ₹103.94 और डीजल ₹90.76 पर बिक रहा है, जबकि चेन्नई में पेट्रोल ₹100.75 और डीजल ₹92.34 प्रति लीटर है।
अन्य बड़े शहरों में क्या है स्थिति
देश के अन्य शहरों की बात करें तो अहमदाबाद में पेट्रोल ₹94.49 और डीजल ₹90.17 पर है। बेंगलुरु में पेट्रोल ₹102.92 और डीजल ₹89.02 प्रति लीटर मिल रहा है। हैदराबाद में पेट्रोल ₹107.46 और डीजल ₹95.70 ने लोगों का बजट थोड़ा कस दिया है। जयपुर में पेट्रोल ₹104.72 और डीजल ₹90.21 पर बना हुआ है।
उत्तर भारत की ओर नजर डालें तो लखनऊ में पेट्रोल ₹94.69 और डीजल ₹87.80 है। चंडीगढ़ में पेट्रोल ₹94.30 और डीजल ₹82.45 पर है, जो कई शहरों के मुकाबले कुछ राहत देता है। पटना में पेट्रोल ₹105.58 और डीजल ₹93.80 दर्ज किया गया है। इंदौर, सूरत और नासिक जैसे शहरों में भी कीमतें लगभग इसी दायरे में बनी हुई हैं।
रोजाना कीमतें तय करने की प्रणाली
बहुत से लोग यह सवाल करते हैं कि जब रोज कीमतें तय होती हैं, तो फिर बदलाव क्यों नहीं दिखता। असल में यह प्रणाली पारदर्शिता के लिए बनाई गई है। तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार के आंकड़ों के आधार पर कीमतें तय करती हैं और उपभोक्ताओं को रोजाना अपडेट देती हैं, ताकि भ्रम की स्थिति न बने।
पिछले दो साल से क्यों बनी हुई है स्थिरता
मई 2022 के बाद से केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों ने पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले करों में कटौती की थी। इसका असर यह हुआ कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू ईंधन कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर बनी रहीं। व्यक्तिगत तौर पर मुझे लगता है कि यह स्थिरता आम लोगों के लिए राहत का बड़ा कारण रही है।
ईंधन के दाम स्थिर रहने से परिवहन लागत पर नियंत्रण बना रहता है। इसका सीधा असर किराया, सब्जियों के दाम और रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ता है। अगर पेट्रोल-डीजल में रोज उतार-चढ़ाव होता, तो महंगाई का दबाव कहीं ज्यादा होता।
आगे क्या रह सकती है तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक स्तर पर कोई बड़ा आर्थिक या राजनीतिक संकट नहीं आता, तो आने वाले समय में भी ईंधन कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम है। हालांकि लंबी अवधि में सब कुछ अंतरराष्ट्रीय बाजार और सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगा।