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ToggleSilver Rate Today: चांदी का बाजार इन दिनों उतार-चढ़ाव से गुजर रहा है। जनवरी में जिस धातु ने चार लाख रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर पार कर सबको चौंका दिया था, वही अब गिरावट के दौर में है। 14 फरवरी की सुबह चांदी की कीमत 2,79,900 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। यह आंकड़ा निवेशकों और ज्वेलरी व्यापारियों दोनों के लिए संकेत दे रहा है कि बाजार अभी स्थिर नहीं हुआ है।
दिल्ली सराफा बाजार में बड़ी गिरावट
राष्ट्रीय राजधानी के सराफा बाजार में एक दिन पहले चांदी की कीमत में भारी गिरावट दर्ज की गई। कीमत 13,500 रुपये या लगभग 5 प्रतिशत से अधिक टूटकर 2,55,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। यह गिरावट अचानक नहीं थी, बल्कि बाजार में कमजोर मांग और वैश्विक संकेतों का असर भी इसमें शामिल रहा।
बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि जब मांग कम होती है और निवेशक सतर्क हो जाते हैं, तब कीमतों पर दबाव बनता है। यही कारण है कि सराफा बाजार में कारोबारियों ने भी खरीदारी में संयम बरता।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी का हाजिर भाव 77.30 डॉलर प्रति औंस के आसपास दर्ज किया गया। वैश्विक स्तर पर कीमतों में स्थिरता और डॉलर की चाल का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ता है। जब अंतरराष्ट्रीय कीमतों में नरमी आती है, तो घरेलू बाजार भी उससे अछूता नहीं रहता।
अक्सर देखा गया है कि विदेशी निवेशकों की रणनीति और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां कीमती धातुओं की दिशा तय करती हैं। यदि वैश्विक स्तर पर मांग घटती है या ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाया जाता है, तो चांदी और सोने दोनों पर दबाव बढ़ता है।
जनवरी की रिकॉर्ड तेजी
जनवरी महीने में चांदी ने 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर पार कर इतिहास रच दिया था। उस समय निवेशकों में सुरक्षित निवेश की प्रवृत्ति बढ़ी हुई थी। वैश्विक अनिश्चितता और बाजार में अस्थिरता के कारण लोगों ने कीमती धातुओं की ओर रुख किया।
लेकिन रिकॉर्ड स्तर के बाद अक्सर कीमतों में सुधार या गिरावट देखी जाती है। यही पैटर्न इस बार भी सामने आया है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत
चांदी को केवल भावनाओं के आधार पर नहीं खरीदना चाहिए। यदि आप दीर्घकालिक निवेश की सोच रहे हैं, तो गिरावट के समय धीरे-धीरे खरीदारी करना समझदारी हो सकती है। लेकिन यदि उद्देश्य अल्पकालिक मुनाफा है, तो बाजार की दिशा को समझना बेहद जरूरी है।
ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए भी यह समय सोच-समझकर कदम उठाने का है। कीमतों में उतार-चढ़ाव अभी जारी रह सकता है।
आगे क्या हो सकता है
विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेत, औद्योगिक मांग और निवेशकों की धारणा चांदी की दिशा तय करेंगे। यदि औद्योगिक क्षेत्र में मांग बढ़ती है, तो कीमतों को सहारा मिल सकता है। वहीं, यदि वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बनी रहती है, तो और गिरावट भी संभव है।
फिलहाल स्थिति यही दर्शाती है कि बाजार में स्थिरता आने में समय लग सकता है। इसलिए निवेशक और खरीदार दोनों को संयम और जानकारी के साथ निर्णय लेना चाहिए।
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