Silver Price Today: सोने के बाद अब चांदी की चाल ने भी निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। जिस चांदी को कुछ हफ्ते पहले तक तेजी का मजबूत विकल्प माना जा रहा था, वही अब दबाव में नजर आ रही है। 7 फरवरी की सुबह चांदी की कीमत गिरकर 274900 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। यह गिरावट इसलिए भी ज्यादा चौंकाने वाली है, क्योंकि 30 जनवरी को चांदी का भाव 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर था।
कम समय में इतनी बड़ी गिरावट ने यह साफ कर दिया है कि चांदी का बाजार फिलहाल स्थिर नहीं है और इसमें जोखिम काफी बढ़ चुका है।
कुछ ही दिनों में क्यों टूटी चांदी की रफ्तार
चांदी में हालिया गिरावट अचानक नहीं है। बीते कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोर संकेत मिल रहे थे। डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख और इंडस्ट्रियल डिमांड में अनिश्चितता ने चांदी पर दबाव बनाया।
जहां सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है, वहीं चांदी इंडस्ट्रियल और निवेश दोनों मांग पर निर्भर रहती है। यही दोहरी प्रकृति इसे ज्यादा अस्थिर भी बनाती है।
जनवरी के ऊंचे स्तर से अब काफी नीचे
30 जनवरी को जब चांदी का भाव 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार पहुंचा था, तब कई निवेशकों को लगा था कि इसमें और तेजी आएगी। लेकिन बाजार ने उलटी चाल चल दी। महज कुछ ही दिनों में कीमतों का इस तरह टूटना यह दिखाता है कि ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली कितनी तेज रही।
यह गिरावट उन निवेशकों के लिए चेतावनी बनकर आई है, जिन्होंने ऊंचे दामों पर खरीदारी की थी।
विदेशी बाजारों का क्या है संकेत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी का हाजिर भाव करीब 74 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। वैश्विक स्तर पर भी चांदी में स्थिरता की कमी साफ दिख रही है। जब विदेशी बाजार कमजोर होते हैं, तो उसका असर भारतीय बाजार पर सीधे पड़ता है।
कमोडिटी विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल विदेशी संकेत चांदी के पक्ष में नहीं हैं।
निवेशकों के लिए बढ़ा जोखिम
चांदी में जिस तरह की अस्थिरता देखने को मिल रही है, उसने छोटे निवेशकों को खास तौर पर परेशान किया है। तेजी से ऊपर और फिर अचानक नीचे आना, यह दर्शाता है कि बाजार पूरी तरह सट्टेबाजों के नियंत्रण में है।
ऐसे माहौल में बिना ठोस रणनीति के निवेश करना नुकसानदायक हो सकता है।
क्या अभी चांदी से दूरी बनाना सही रहेगा
जो निवेशक अल्पकालिक मुनाफे की सोच रहे हैं, उनके लिए चांदी फिलहाल जोखिम भरा सौदा साबित हो सकती है। विशेषज्ञों की सलाह यही है कि जब तक बाजार में स्थिरता नहीं आती, तब तक नई खरीदारी से बचा जाए।
हालांकि जिन निवेशकों का नजरिया लंबी अवधि का है, वे कीमतों के स्थिर होने का इंतजार कर सकते हैं।
चांदी बनाम सोना: निवेशकों की सोच में बदलाव
सोने की तुलना में चांदी हमेशा ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली धातु रही है। मौजूदा हालात में निवेशक फिर से सोने को ज्यादा सुरक्षित विकल्प मानने लगे हैं। चांदी में आई गिरावट ने यह अंतर और साफ कर दिया है।
अब निवेशक भावनाओं से नहीं, बल्कि जोखिम को समझते हुए फैसले ले रहे हैं।
आने वाले दिनों में चांदी की चाल काफी हद तक वैश्विक संकेतों, डॉलर की स्थिति और औद्योगिक मांग पर निर्भर करेगी। फिलहाल बाजार का रुख सतर्कता का है और यही निवेशकों के लिए सबसे बड़ा संकेत भी है।
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