चांदी के दाम में तेज गिरावट और निवेशकों की चिंता
आज बाजार में चांदी के दाम में अचानक बड़ी गिरावट देखने को मिली। सर्राफा बाजार में चांदी का भाव एक झटके में 17,188 रुपये गिरकर 2,41,945 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। जीएसटी जोड़ने के बाद इसकी कीमत लगभग 2,49,203 रुपये प्रति किलो रही। हालांकि यह गिरावट बड़ी है, फिर भी चांदी का भाव 29 जनवरी के अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से अभी भी काफी नीचे बना हुआ है। उस समय चांदी का भाव 3,85,933 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था।
बाजार के जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल, मांग में कमी और निवेशकों द्वारा लाभ निकालने जैसे कारणों से चांदी की कीमतों में यह गिरावट आई है। वहीं वायदा बाजार में, विशेषकर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कुछ समय तेजी भी देखी गई, लेकिन वास्तविक बाजार में दबाव बना रहा।
फरवरी महीने में चांदी के भाव की चाल
फरवरी महीने में चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा गया। महीने की शुरुआत में कीमतों में तेज गिरावट आई, फिर कुछ दिनों तक तेजी रही और बाद में फिर कमजोरी दिखाई दी।
1 फरवरी को चांदी का भाव 2,65,751 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव से काफी कम था।
2 फरवरी को इसमें और गिरावट आई और कीमत 2,36,496 रुपये प्रति किलो पर आ गई।
3 और 4 फरवरी को चांदी ने मजबूत वापसी की और कीमतें 2,82,462 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गईं।
इसके बाद 5 और 6 फरवरी को फिर गिरावट देखी गई और भाव लगभग 2,44,929 रुपये प्रति किलो पर आ गया।
9, 10 और 11 फरवरी को फिर तेजी देखी गई, लेकिन 12 और 13 फरवरी को बाजार में दोबारा कमजोरी दर्ज की गई।
इस तरह पूरे महीने बाजार में लगातार अस्थिरता बनी रही, जिससे निवेशकों में असमंजस की स्थिति देखी जा रही है।
निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कीमतों के उतार-चढ़ाव को देखकर जल्दबाजी में फैसला लेना सही नहीं है। निवेश सलाहकार संस्था एमके वेल्थ मैनेजमेंट के अनुसार, निवेशकों को अपने निवेश संग्रह में सोना और चांदी दोनों को संतुलित रूप में रखना चाहिए।
संस्था का कहना है कि यदि किसी निवेशक के कुल निवेश का 25 से 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सोना और चांदी में है, तो उसे अपने निवेश की समीक्षा जरूर करनी चाहिए। ऐसे मामलों में आंशिक लाभ निकालना समझदारी हो सकती है, लेकिन पूरी तरह निवेश हटाना सही नहीं माना जाता।
लंबी अवधि में चांदी का महत्व
विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी केवल आभूषण या सिक्कों के लिए ही नहीं बल्कि उद्योगों में भी बड़े पैमाने पर उपयोग होती है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा और चिकित्सा उपकरणों में चांदी की मांग लगातार बनी रहती है। इसलिए लंबे समय में इसकी कीमतों में मजबूती देखने को मिलती है।
भारत में चांदी के भाव तय करने में भारतीय बुलियन और ज्वेलर्स संघ की दरों को अहम माना जाता है और इन्हीं दरों के आधार पर बाजार में कीमतों का अनुमान लगाया जाता है।
आगे क्या हो सकता है बाजार का रुख
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में चांदी के भाव अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की स्थिति और औद्योगिक मांग पर निर्भर करेंगे। यदि वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ सकते हैं, जिससे चांदी और सोने की कीमतों में फिर तेजी आ सकती है।
दूसरी ओर यदि मांग कमजोर रहती है और निवेशक मुनाफा निकालते हैं, तो कीमतों में कुछ समय तक दबाव बना रह सकता है। इसलिए निवेशकों को लंबी अवधि की सोच के साथ निवेश करना चाहिए और छोटे उतार-चढ़ाव से घबराने से बचना चाहिए।