सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नई तैयारी
Tariff Policy Change : पिछले सप्ताह, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ प्रयास को सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के बाद अमेरिका अब नेशनल सिक्योरिटी की जांच के एक नए दौर की तैयारी कर रहा है। इसका उद्देश्य नई ड्यूटीज लागू करने के लिए रास्ता तैयार करना है। ट्रंप प्रशासन इस जांच के तहत यह पता लगाएगा कि आयात विभिन्न सेक्टर्स को कैसे प्रभावित करता है, जिनमें बैटरी, कास्ट आयरन और आयरन फिटिंग्स, इलेक्ट्रिकल ग्रिड इक्विपमेंट, टेलीकॉम इक्विपमेंट, प्लास्टिक और प्लास्टिक पाइपिंग, और इंडस्ट्रियल केमिकल्स शामिल हैं। यह प्रस्तावित जांच 1962 के ट्रेड एक्सटेंशन एक्ट के सेक्शन 232 के तहत की जाएगी, जो नेशनल सिक्योरिटी के आधार पर टैरिफ लगाने की अनुमति देता है। यह कदम उस समय उठाया जा रहा है जब ट्रंप ने कोर्ट द्वारा पहले के टैरिफ को रद्द किए जाने के फैसले के तुरंत बाद नया ग्लोबल टैरिफ घोषित कर दिया था। 15% की यह लेवी लागू हो गई है, लेकिन इसे केवल पांच महीने तक ही बनाए रखा जाएगा। ट्रंप ने संकेत दिया है कि इस समय का इस्तेमाल नए इंपोर्ट टैक्स तैयार करने में किया जाएगा, ताकि कोर्ट द्वारा अमान्य किए गए पुराने ड्यूटीज़ की भरपाई की जा सके।

सेक्शन 301 के तहत भी जांच पर विचार
Tariff Policy Change : सेक्शन 232 के तहत उठाए गए कदम कानूनी तौर पर अधिक स्थायी माने जाते हैं, और ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में मेटल और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर टैरिफ लगाने के लिए पहले ही इस अधिकार का इस्तेमाल किया है। यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर ने पिछले सप्ताह कहा कि प्रशासन 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 301 के तहत भी जांच पर विचार कर रहा है। यह प्रावधान उन तरीकों को लक्षित करता है, जिनसे ट्रेडिंग पार्टनर टैरिफ फ्रेमवर्क में भेदभाव कर सकते हैं। इस जांच में ज्यादातर बड़े ट्रेडिंग पार्टनर शामिल होंगे और यह उन क्षेत्रों पर केंद्रित होगी जहां चिंता ज्यादा है, जैसे इंडस्ट्रियल अतिरिक्त क्षमता, जबरन मजदूरी, फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग प्रैक्टिस, यूएस टेक्नोलॉजी कंपनियों और डिजिटल सामान तथा सेवाओं के खिलाफ भेदभाव, डिजिटल सर्विस टैक्स, समुद्र प्रदूषण, और सीफूड, चावल और अन्य प्रोडक्ट्स के व्यापार से जुड़े व्यवहार।
फायदा उठानेवाले देशों को ट्रंप की चेतावनी
Tariff Policy Change : ट्रंप ने चेतावनी दी है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का फायदा उठाने की कोशिश करने वाले देशों को उच्च टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा, “कोई भी देश जो सुप्रीम कोर्ट के इस अजीब फैसले के साथ ‘गेम खेलना’ चाहता है, खासकर वे देश जिन्होंने वर्षों और दशकों तक यूएस को धोखा दिया है, उन्हें बहुत ज्यादा टैरिफ देना होगा। और उससे भी बुरा, जिनके साथ हाल ही में समझौता हुआ है…खरीदार सावधान!” हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया, यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए वॉशिंगटन की अपनी यात्रा टाल दी। दरअसल, ट्रंप दुनियाभर के देशों के साथ व्यापार समझौता करने के लिए टैरिफ को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे। अब, जब उनकी ताकत थोड़ी कमजोर हो गई है, उन्हें यह चिंता है कि टैरिफ के दबाव में हुए समझौते देशों द्वारा पुनर्विचार के अधीन हो सकते हैं।

रिफंड की मांग पूरी ताकत से करेंगे नील कत्याल
Tariff Policy Change : अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ रद्द किए जाने के बाद यह सवाल भी उठने लगा कि उन व्यवसायों और आयातकों को रिफंड मिलेगा या नहीं, जिन्हें ट्रंप के टैरिफ के कारण आर्थिक नुकसान हुआ था। यूनाइटेड स्टेट्स के पूर्व एक्टिंग सॉलिसिटर जनरल नील कत्याल ने एक टीवी कार्यक्रम में कहा, “हमने सीधे तौर पर रिफंड की मांग नहीं की थी, क्योंकि हमारी कानूनी टीम को उम्मीद थी कि केस जीतने पर रिफंड अपने आप मिल जाएगा।” उन्होंने कहा, “आज हम उन रिफंड के लिए लड़ने के लिए एक टास्क फोर्स लॉन्च कर रहे हैं। अगर संघीय सरकार उस पैसे को वापस करने से मना करती है, तो हम इसके लिए पूरी ताकत से लड़ेंगे।” यदि रिफंड को लेकर ट्रंप प्रशासन पर दबाव बनता है, तो यह सरकारी खजाने पर बड़ा असर डाल सकता है और ट्रंप के लिए यह एक बड़ा झटका होगा। कोर्ट के फैसले के बाद तीन लाख से अधिक व्यवसायों ने 170 अरब डॉलर यानी लगभग 15.42 लाख करोड़ रुपये के टैरिफ की वापसी की मांग की है।