Tina Ambani ED Case: देश के कॉर्पोरेट और राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर अंबानी परिवार का नाम चर्चा में है। इस बार वजह किसी नए निवेश या कारोबारी विस्तार की नहीं, बल्कि प्रवर्तन निदेशालय की बड़ी जांच है। अनिल अंबानी की पत्नी और पूर्व सांसद टीना अंबानी ने आज ईडी के सामने पेश होने से इनकार कर दिया, जिसके बाद 40 हजार करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय अब टीना अंबानी को नया समन जारी करने की तैयारी में है। यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की पूछताछ तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे अनिल धीरूभाई अंबानी समूह और उससे जुड़ी कई कंपनियों के कथित बैंकिंग और कॉर्पोरेट लेन-देन से जुड़ा हुआ है। ऐसे में यह जांच अब सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि साख और भरोसे की भी बनती जा रही है।
40 हजार करोड़ के कथित घोटाले की परतें
ईडी की जांच का दायरा बेहद बड़ा है। आरोप है कि अनिल अंबानी समूह से जुड़ी कंपनियों ने बैंकों से लिए गए हजारों करोड़ रुपये के कर्ज का दुरुपयोग किया और उसे अलग-अलग तरीकों से इधर-उधर घुमाया गया। यही वजह है कि इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका जताई जा रही है।
प्रवर्तन निदेशालय पिछले साल से इस पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रहा है। अब तक धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत तीन प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट दर्ज की जा चुकी हैं। इसके साथ ही करीब 12 हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क किया जा चुका है, जो जांच की गंभीरता को साफ दिखाता है।
एसआईटी गठन से जांच को मिली रफ्तार
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद ईडी ने इस मामले के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया है। इस एसआईटी की कमान मुख्यालय जांच इकाई के अतिरिक्त निदेशक स्तर के अधिकारी के हाथ में है और इसमें आधा दर्जन से अधिक अनुभवी जांचकर्ता शामिल हैं।
इस कदम का सीधा संदेश है कि एजेंसी अब इस मामले को किसी भी तरह हल्के में नहीं लेने वाली। अदालत ने भी साफ शब्दों में कहा है कि जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध होनी चाहिए, ताकि सच सामने आ सके।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती का असर
पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी समूह से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए ईडी और सीबीआई दोनों को साफ दिशा-निर्देश दिए थे। अदालत ने सीबीआई को कथित मिलीभगत, साजिश और सांठगांठ की जांच करने को कहा है और यह सुनिश्चित करने को कहा कि जांच तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचे।
अदालत की इस सख्ती के बाद ही जांच एजेंसियों की सक्रियता बढ़ी है। माना जा रहा है कि यही वजह है कि अब टीना अंबानी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
टीना अंबानी की पेशी से इनकार का मतलब
टीना अंबानी का ईडी के सामने पेश न होना कई सवाल खड़े करता है। कानूनी तौर पर समन मिलने के बाद पेश होना जरूरी होता है, हालांकि कुछ परिस्थितियों में तारीख बढ़ाने की अनुमति भी मिल सकती है। लेकिन इस इनकार ने जांच को और संवेदनशील बना दिया है।
सूत्रों का कहना है कि एजेंसी यह जानना चाहती है कि समूह की कंपनियों के कुछ वित्तीय फैसलों में टीना अंबानी की कोई भूमिका थी या नहीं। यही वजह है कि उन्हें दोबारा समन भेजने की तैयारी है।
अनिल अंबानी पर पहले से शिकंजा
यह पहला मौका नहीं है जब अनिल अंबानी जांच के घेरे में आए हों। पिछले साल ईडी ने उनसे बैंक ऋण अनियमितताओं को लेकर लंबी पूछताछ की थी। इसके अलावा, उनकी कंपनी आरकॉम से जुड़े एक पूर्व शीर्ष अधिकारी और पूर्व चेयरमैन पुनीत गर्ग को हाल ही में गिरफ्तार किया जा चुका है।
इन घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि जांच एजेंसियां अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जिम्मेदार लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
समूह की सफाई और भविष्य की राह
अनिल अंबानी समूह की कंपनियां पहले भी किसी भी तरह के गलत काम से इनकार करती रही हैं। उनका कहना रहा है कि सभी लेन-देन नियमों के तहत हुए हैं और उन्हें जांच एजेंसियों पर पूरा भरोसा है।
हालांकि, मौजूदा हालात में यह साफ है कि यह मामला जल्द खत्म होने वाला नहीं है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, और नाम सामने आ सकते हैं।