जेईई मेन्स परीक्षा परिणाम जल्द होगा घोषित
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के इच्छुक लाखों छात्रों के लिए बड़ी खबर दी है। एजेंसी ने घोषणा की है कि जेईई मेन्स 2026 जनवरी सत्र का परीक्षा परिणाम 12 फरवरी को जारी किया जाएगा। यह परिणाम एजेंसी की आधिकारिक वेबसाइट nta.ac.in और jeemain.nta.nic.in पर उपलब्ध होगा। इस परीक्षा में शामिल हुए सभी उम्मीदवार अपना स्कोरकार्ड, रैंक और कट-ऑफ की जानकारी इन वेबसाइटों पर देख सकेंगे।
जेईई मेन्स परीक्षा देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। इस परीक्षा के माध्यम से छात्रों को देश भर के सरकारी और निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला मिलता है। जनवरी सत्र की परीक्षा 21 जनवरी से 29 जनवरी के बीच कंप्यूटर आधारित मोड में आयोजित की गई थी। परीक्षा हर दिन दो पारियों में हुई थी – सुबह की पारी सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दोपहर की पारी दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक।
परिणाम कैसे देखें और डाउनलोड करें
छात्रों को अपना परिणाम देखने के लिए सबसे पहले एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वेबसाइट पर जेईई मेन्स परिणाम 2026 का लिंक दिखाई देगा। इस लिंक पर क्लिक करने के बाद छात्रों को अपना एप्लीकेशन नंबर और जन्मतिथि डालनी होगी। सही जानकारी डालने के बाद स्क्रीन पर स्कोरकार्ड दिखाई देगा। छात्र इसे डाउनलोड करके प्रिंट भी निकाल सकते हैं। यह स्कोरकार्ड काउंसलिंग के समय जरूरी होगा, इसलिए इसे सुरक्षित रखना चाहिए।
एजेंसी ने 6 फरवरी को अस्थायी उत्तर कुंजी पर आपत्ति का विकल्प बंद कर दिया था। अब अंतिम उत्तर कुंजी परिणाम के साथ या उससे पहले जारी की जाएगी। इस उत्तर कुंजी के आधार पर ही सभी छात्रों के अंक तय किए जाएंगे। छात्रों को अपने सही अंक जानने के लिए अंतिम उत्तर कुंजी का इंतजार करना चाहिए।
अप्रैल सत्र के लिए आवेदन शुरू
जनवरी सत्र के परिणाम की घोषणा से पहले ही एजेंसी ने अप्रैल सत्र के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। जो छात्र जनवरी सत्र में शामिल नहीं हो सके या अपने अंक सुधारना चाहते हैं, वे अप्रैल सत्र के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह मौका उन छात्रों के लिए भी फायदेमंद है जो बेहतर अंक लाकर अच्छे कॉलेज में दाखिला चाहते हैं। दोनों सत्रों में से सबसे अच्छे अंक को काउंसलिंग के लिए माना जाएगा।
परीक्षा का उपयोग और महत्व
जेईई मेन्स परीक्षा के अंकों का उपयोग देश भर के विभिन्न इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर और प्लानिंग कोर्सों में दाखिले के लिए किया जाता है। इसमें बीई, बीटेक, बीआर्क और बीप्लानिंग जैसे कोर्स शामिल हैं। सरकारी और निजी दोनों तरह के संस्थान इस परीक्षा के अंकों को मान्यता देते हैं। इसके अलावा, जेईई मेन्स में अच्छे अंक लाने वाले छात्र जेईई एडवांस परीक्षा के लिए योग्य हो जाते हैं, जो आईआईटी में दाखिले का रास्ता खोलती है।
आईआईटी में महिला छात्रों की संख्या बढ़ी
हाल के आंकड़ों के अनुसार, पिछले सात सालों में आईआईटी में महिला छात्रों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। 2018 में जहां 1,621 महिला छात्राएं थीं, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 3,247 हो गई है। यह बदलाव शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। हालांकि, इसके बावजूद पुरुष और महिला छात्रों के बीच का अंतर भी बढ़ा है। 2018 में यह अंतर 7,007 था जो 2025 में बढ़कर 9,153 हो गया है।
यह आंकड़े पांच प्रमुख आईआईटी – बॉम्बे, मद्रास, दिल्ली, कानपुर और खड़गपुर – के हैं। ये संस्थान देश में इंजीनियरिंग शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी माने जाते हैं। इनकी एनआईआरएफ रैंकिंग, विरासत और प्रतिष्ठा के कारण इन्हें शिक्षा जगत में खास स्थान मिला है। विशेषज्ञों का कहना है कि विज्ञान और तकनीकी शिक्षा में लैंगिक समानता के लिए अभी और प्रयास करने की जरूरत है।
आईआईटी बॉम्बे में नया सुपरकंप्यूटिंग केंद्र
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रोफेसर अभय करंदीकर ने आईआईटी बॉम्बे में नए सुपरकंप्यूटिंग केंद्र का उद्घाटन किया है। इस केंद्र का नाम परम रुद्र है। इसे सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग ने तैयार किया है। यह केंद्र उन्नत अनुसंधान और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया है।
यह तीन पेटा फ्लॉप्स की क्षमता वाला सिस्टम है जो राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत विकसित किया गया है। परम रुद्र भारत में बने रुद्र सर्वर पर आधारित है और देश में ही निर्मित किया गया है। इसमें आधुनिक डायरेक्ट कॉन्टैक्ट लिक्विड कूलिंग तकनीक का उपयोग किया गया है। प्रोफेसर करंदीकर ने कहा कि यह सुविधा आईआईटी बॉम्बे के 200 से अधिक शिक्षकों और 1,200 छात्रों के साथ-साथ देश भर के शोधकर्ताओं को लाभ पहुंचाएगी।
प्रधानमंत्री रिसर्च चेयर योजना की तैयारी
शिक्षा मंत्रालय ने एक नई योजना की घोषणा की है जिसका नाम प्रधानमंत्री रिसर्च चेयर है। इस योजना का उद्देश्य विदेशों में रह रहे भारतीय मूल के प्रमुख वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को भारत वापस लाना है। योजना के तहत पांच साल में 120 शोध फेलो और रिसर्च चेयर नियुक्त किए जाएंगे। इस प्रस्ताव को आईआईटी काउंसिल की बैठक में पेश किया गया था।
योजना तीन श्रेणियों में काम करेगी – युवा शोध फेलो, वरिष्ठ शोध फेलो और रिसर्च चेयर। यह योजना 14 राष्ट्रीय महत्व के क्षेत्रों पर ध्यान देगी, जिनमें सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत सामग्री शामिल हैं। इस योजना का लक्ष्य देश की उच्च शिक्षा और अनुसंधान व्यवस्था को मजबूत बनाना और भारत को विज्ञान, तकनीक और शैक्षणिक उत्कृष्टता में वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाना है।
आईआईएससी बेंगलुरु में भी जेईई एडवांस से होगा दाखिला
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस बेंगलुरु ने घोषणा की है कि अब बीटेक कार्यक्रम में दाखिला जेईई एडवांस के अंकों और जोसा काउंसलिंग के माध्यम से होगा। पहले यह संस्थान अपने खुद के पोर्टल से दाखिला देता था। आईआईएससी दो स्नातक कार्यक्रम चलाता है – बैचलर ऑफ साइंस रिसर्च और बीटेक गणित और कंप्यूटिंग। बीटेक कार्यक्रम चार सेमेस्टर का होता है जिसमें गणित और कंप्यूटिंग के छह-छह कोर्स के साथ विज्ञान, मानविकी और अन्य इंजीनियरिंग विषय शामिल हैं।
आईआईटी तिरुपति में प्लेसमेंट में सुधार
आईआईटी तिरुपति ने 2024 के प्लेसमेंट सीजन में अच्छा प्रदर्शन किया है। आंकड़ों के अनुसार, बीटेक में कुल प्लेसमेंट दर बढ़कर 83.82 प्रतिशत हो गई है। कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में प्लेसमेंट दर 91 प्रतिशत से अधिक रही, जबकि इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में लगभग 89 प्रतिशत रही। मैकेनिकल और सिविल इंजीनियरिंग में भी पिछले साल की तुलना में बेहतर परिणाम आए हैं।
2024 में औसत पैकेज लगभग सभी शाखाओं में समान रहा और कुल मिलाकर 11 लाख रुपये सालाना रहा। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में सबसे अधिक औसत पैकेज 12 लाख रुपये सालाना रहा। सबसे अधिक पैकेज 41.64 लाख रुपये सालाना रहा जो कंप्यूटर साइंस और मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्रों को मिला।