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हाईकोर्ट की मुहर के बाद ‘जन नायकन’ को हरी झंडी, विजय की आखिरी फिल्म पर टूटा सेंसर विवाद

हाईकोर्ट की मुहर के बाद ‘जन नायकन’ को हरी झंडी
हाईकोर्ट की मुहर के बाद ‘जन नायकन’ को हरी झंडी
मद्रास हाईकोर्ट ने थलपति विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ को U/A सर्टिफिकेट देने का आदेश देकर रिलीज का रास्ता साफ कर दिया है। अदालत ने सेंसर बोर्ड की देरी पर सवाल उठाए। यह विजय की आखिरी फिल्म है, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है।
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Jana Nayagan: तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलपति विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जन नायकन’ को लेकर चला आ रहा सस्पेंस आखिरकार शुक्रवार को खत्म होता दिखा। मद्रास हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद फिल्म की रिलीज का रास्ता साफ हो गया है। अदालत ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC को निर्देश दिया है कि वह फिल्म को U/A सर्टिफिकेट जारी करे, जिससे इसे सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया जा सके।

हाईकोर्ट का फैसला और उसका निहितार्थ

मद्रास हाईकोर्ट की जस्टिस पी.टी. आशा ने अपने फैसले में साफ शब्दों में कहा कि यदि जांच समिति द्वारा सुझाए गए बदलाव फिल्म में कर दिए गए हैं, तो सेंसर सर्टिफिकेट रोके जाने का कोई औचित्य नहीं बचता। अदालत ने CBFC को यह भी याद दिलाया कि बोर्ड का काम कानून के दायरे में रहकर प्रमाणन देना है, न कि मनमाने तरीके से प्रक्रिया को लंबा करना।

सेंसर प्रक्रिया में देरी और विवाद की जड़

फिल्म निर्माताओं के अनुसार, ‘जन नायकन’ को 18 दिसंबर को सेंसर बोर्ड के पास भेजा गया था। अगले ही दिन, यानी 19 दिसंबर को, जांच समिति ने कुछ सीन हटाने और कुछ संवाद म्यूट करने की सिफारिश की। निर्माताओं ने इन सभी सुझावों को स्वीकार करते हुए फिल्म में आवश्यक बदलाव कर दिए।

इसके बावजूद, सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया। बाद में यह तर्क सामने आया कि एक शिकायत के आधार पर फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेजा गया। शिकायत में कुछ दृश्यों को लेकर धार्मिक भावनाओं और सुरक्षा बलों के चित्रण पर आपत्ति जताई गई थी।

अदालत की सख्त टिप्पणी

जस्टिस पी.टी. आशा ने सेंसर बोर्ड के रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि बोर्ड अध्यक्ष द्वारा जारी पत्र उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर था। अदालत ने स्पष्ट किया कि सेंसर बोर्ड की भूमिका निष्पक्ष और समयबद्ध होनी चाहिए, न कि अनावश्यक अड़चनें पैदा करने वाली।

‘जन नायकन’ और विजय की राजनीतिक यात्रा

‘जन नायकन’ केवल एक फिल्म नहीं है, बल्कि थलपति विजय के करियर का निर्णायक पड़ाव भी है। एच. विनोद के निर्देशन में बनी यह फिल्म उनके अभिनय करियर की अंतिम कड़ी है। इसके बाद विजय अपनी पूरी ऊर्जा राजनीति को समर्पित करने जा रहे हैं।

फिल्म में उनके साथ प्रकाश राज, पूजा हेगड़े और मामिता बैजू जैसे कलाकार हैं। कहानी और किरदारों को लेकर पहले से ही दर्शकों में खास उत्सुकता रही है। ऐसे में सेंसर विवाद ने इस फिल्म को और भी ज्यादा चर्चा में ला दिया।

रिलीज टलने से बढ़ा दबाव

फिल्म को पहले 9 जनवरी को रिलीज किया जाना था, लेकिन सर्टिफिकेट न मिलने के कारण इसे टालना पड़ा। इससे निर्माताओं को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ दर्शकों की नाराजगी का भी सामना करना पड़ा।

अब, हाईकोर्ट के आदेश के बाद उम्मीद की जा रही है कि फिल्म जल्द ही सिनेमाघरों तक पहुंचेगी और दर्शक विजय को आखिरी बार बड़े पर्दे पर देख पाएंगे।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।