जरूर पढ़ें

Magic of Braj Holi: ब्रज में होली सिर्फ खेली नहीं जाती, जी जाती है। जानिए तिथियां और उत्सव

Magic of Braj Holi : ब्रज में होली सिर्फ खेली नहीं जाती, जी जाती है
Magic of Braj Holi : ब्रज में होली सिर्फ खेली नहीं जाती, जी जाती है

Magic of Braj Holi: ब्रज की होली केवल एक त्योहार नहीं, एक भाव है—एक ऐसा भाव जो फागुन के आते ही हवा में घुल जाता है। यहां रंग सिर्फ चेहरे पर नहीं लगते, वे मन की परतों तक उतर जाते हैं। यही कारण है कि मथुरा, वृन्दावन, बरसाना, नंदगांव और बल्देव की होली देखने के लिए हर साल देश-विदेश से लाखों लोग उमड़ पड़ते हैं। यहां होली खेली नहीं जाती-जी जाती है।

Updated:

फागुन की पहली दस्तक और रंगों की आहट

Magic of Braj Holi : फागुन जैसे ही दस्तक देता है, ब्रज की फिज़ा बदलने लगती है। सुबह की हल्की ठंडक में भी एक अनोखी गरमाहट महसूस होती है। ऐसा लगता है जैसे गलियां, चौक और मंदिर सब किसी बड़े उत्सव की तैयारी में सजग हो गए हों। मथुरा की गलियों में चलते हुए अचानक ढोलक की थाप कानों में पड़ती है। कहीं से “फाग” गूंज रहा होता है, तो कहीं बच्चे रंगों से भरी पिचकारी लिए दौड़ते दिखाई देते हैं। दुकानों पर गुलाल के ढेर सजे होते हैं—लाल, गुलाबी, पीला, हरा—हर रंग जैसे अपनी कहानी कह रहा हो। चेहरों पर लगा रंग यहां पहचान मिटा देता है। कोई अमीर-गरीब नहीं, कोई बड़ा-छोटा नहीं—सब बस “हुरियारे” हैं। विदेशी पर्यटक भी उसी उत्साह से रंगों में भीगते हैं, जैसे बरसों से ब्रज की मिट्टी से जुड़े हों। साधु-संतों के केसरिया वस्त्र भी आज रंगों से सराबोर हो जाते हैं।

Magic of Braj Holi : ब्रज में होली सिर्फ खेली नहीं जाती, जी जाती है
Magic of Braj Holi : ब्रज में होली सिर्फ खेली नहीं जाती, जी जाती है (File Photo)

बरसाना की लट्ठमार होली: हंसी, ठिठोली और परंपरा

Magic of Braj Holi: बरसाना की लट्ठमार होली का दृश्य अद्भुत होता है। लोककथाओं के अनुसार, नंदगांव से श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ बरसाना आए थे और राधा व सखियों ने उनका हंसी-मजाक में स्वागत लाठियों से किया था। उसी स्मृति को जीवित रखती है यह परंपरा। जब नंदगांव के पुरुष ढाल लेकर बरसाना पहुंचते हैं, तो पूरा वातावरण उत्सुकता से भर उठता है। महिलाएं पारंपरिक लहंगा-ओढ़नी में सजी, हाथों में लाठियां थामे चौक में उतरती हैं। ढोल की लय तेज होती है, भीड़ जयकारे लगाती है और फिर शुरू होता है वह अनोखा खेल—जहां चोट से ज्यादा हंसी गूंजती है। यह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि प्रेम और चुटीले संवाद की परंपरा है। यहां लाठियां भी मुस्कान के साथ चलती हैं।

वृन्दावन की फूलों वाली होली: जहां रंगों में घुली है भक्ति

Magic of Braj Holi: वृन्दावन में होली का रंग कुछ अलग ही होता है। खासकर बांके बिहारी मंदिर की फूलों वाली होली का अनुभव अविस्मरणीय है। यहां गुलाल की जगह फूलों की वर्षा होती है। जैसे ही मंदिर के पट खुलते हैं, रंग-बिरंगे फूल हवा में उड़ने लगते हैं। मंदिर में खड़े श्रद्धालु उस क्षण को अपने भीतर उतार लेने की कोशिश करते हैं। कोई आंखें बंद कर लेता है, कोई हाथ जोड़कर प्रार्थना करता है, तो कोई उस पल को कैमरे में कैद करता है। कुछ क्षणों के लिए ऐसा लगता है जैसे समय ठहर गया हो। फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन के समय अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करते लोग जीवन की नकारात्मकता को अग्नि में समर्पित करने की कामना करते हैं। अगले दिन रंगोत्सव में वही लोग गले मिलकर रंग लगाते हैं—मानो मन के सारे गिले-शिकवे भी धुल गए हों। वृन्दावन के रंगजी मंदिर में भी विशेष उत्सव होता है, जहां दक्षिण भारतीय शैली की झलक के साथ होली का आनंद लिया जाता है।

बल्देव का हुरंगा: उमंग की पराकाष्ठा

बल्देव में स्थित दाऊजी मंदिर का हुरंगा उत्सव होली का सबसे जोशीला रूप माना जाता है। यहां महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में पुरुषों पर कोड़े बरसाती हैं और पुरुष हंसी-खुशी इस परंपरा का हिस्सा बनते हैं। मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठता है। रंग, पानी और उत्साह का ऐसा संगम दिखाई देता है कि देखने वाला खुद को रोक नहीं पाता। यहां होली केवल रंगों का खेल नहीं, सामूहिक ऊर्जा का विस्फोट है।

Magic of Braj Holi : ब्रज में होली सिर्फ खेली नहीं जाती, जी जाती है
Magic of Braj Holi : ब्रज में होली सिर्फ खेली नहीं जाती, जी जाती है (File Photo)

2026 में ब्रज की होली: तिथियां और उत्सव

ब्रज में होली एक दिन का नहीं, बल्कि कई दिनों तक चलने वाला उत्सव है

24 फरवरी 2026 – बरसाना में लड्डू होली खेली गई ।
25 फरवरी 2026 – बरसाना की प्रसिद्ध लट्ठमार होली खेली गई।
1 मार्च 2026 – गोकुल में छड़ीमार होली और वृन्दावन में फूलों की होली।
2 मार्च 2026 – होलिका दहन।
3 मार्च 2026 – रंगोत्सव (धुलेंडी)।
5 मार्च 2026 – बल्देव में हुरंगा।
14 मार्च 2026 – रंगजी मंदिर में विशेष होली उत्सव।

हर दिन का अपना रंग है, अपना रस है और अपनी अलग कहानी है।

एक ऐसा अनुभव, जो मन में बस जाता है

शाम ढलने लगती है तो गलियां थकी हुई जरूर दिखती हैं, लेकिन मुस्कानें वैसी ही चमकती रहती हैं। रंगों से भीगे चेहरे, हंसी से भरी आंखें और यादों से भरे कैमरे—सब इस बात की गवाही देते हैं कि ब्रज की होली सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मा को छू लेने वाला अनुभव है। यहां शोर के बीच भी शांति है, भीड़ के बीच भी अपनापन है और रंगों के बीच भी भक्ति है। शायद यही कारण है कि जो एक बार ब्रज की होली देख लेता है, उसके मन में यह उत्सव लंबे समय तक अपना रंग छोड़ जाता है—एक ऐसा रंग, जो कभी फीका नहीं पड़ता।


[RS_TAG]

Priyanka C. Mishra

प्रियंका सी. मिश्रा वरिष्ठ हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें समाचार लेखन, स्क्रिप्टिंग, रिपोर्टिंग और विश्लेषण में व्यापक अनुभव है। वे सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक विषयों के साथ-साथ बॉलीवुड, ज्योतिष, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल जैसे विविध क्षेत्रों पर लेखन करती हैं। जटिल मुद्दों को सरल और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना उनकी विशेषता है। तथ्यों की सटीकता, निष्पक्ष दृष्टिकोण और संवेदनशील शैली के कारण उन्होंने पाठकों का विश्वास अर्जित किया है। पत्रकारिता, हिंदी कंटेंट निर्माण और यूट्यूब स्क्रिप्ट लेखन के प्रति वे समर्पित हैं।