छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित युवा उद्यमी संवाद कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने आज के समय में प्रौद्योगिकी के सही उपयोग पर महत्वपूर्ण बातें कही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रौद्योगिकी आज की जरूरत है लेकिन हमें इसका दास नहीं बनना चाहिए। संघ शताब्दी वर्ष के विशेष अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के विचारवान और प्रभावशाली लोगों से सीधा संवाद किया गया।
प्रौद्योगिकी और स्वदेशी में कोई विरोध नहीं
डॉ. भागवत जी ने युवा उद्यमियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में प्रौद्योगिकी एक अपरिहार्य आवश्यकता बन गई है। जब हम स्वदेशी की बात करते हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि हम प्रौद्योगिकी का त्याग कर दें। स्वदेशी और प्रौद्योगिकी दोनों साथ साथ चल सकते हैं। असली सवाल यह है कि हम प्रौद्योगिकी का उपयोग किस तरह से करते हैं।
उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को यह समझना होगा कि प्रौद्योगिकी एक साधन है, साध्य नहीं। हमें प्रौद्योगिकी के माध्यम से समाज की सेवा करनी है, न कि खुद को प्रौद्योगिकी का दास बना लेना है। जब हम प्रौद्योगिकी को अपना मालिक बना लेते हैं तो हम अपनी मानवीयता खो देते हैं।
समाज कल्याण ही व्यवसाय का उद्देश्य
सरसंघचालक जी ने उद्योग और व्यवसाय के उद्देश्य पर भी महत्वपूर्ण बातें कही। उन्होंने कहा कि हम उद्योग केवल अपने निजी लाभ के लिए नहीं करते बल्कि समाज के कल्याण के लिए करते हैं। जब कोई व्यवसायी या उद्यमी अपने काम को केवल पैसा कमाने का जरिया समझता है तो वह अपने असली उद्देश्य से भटक जाता है।
डॉ. भागवत ने युवा उद्यमियों को समझाया कि व्यवसाय का मूल उद्देश्य समाज की सेवा करना होना चाहिए। जब हम समाज की जरूरतों को पूरा करने के लिए काम करते हैं तो लाभ अपने आप आता है। लेकिन अगर हम केवल लाभ के पीछे भागते हैं तो हम न तो समाज की सेवा कर पाते हैं और न ही स्थायी सफलता प्राप्त कर पाते हैं।
संघ शताब्दी वर्ष का विशेष आयोजन
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित किया गया था। संघ ने अपनी स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों से सीधा संवाद स्थापित करना है।
छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित युवा उद्यमी संवाद कार्यक्रम में समाज के विचारवान और प्रभावशाली लोगों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम की खास बात यह थी कि लोगों ने अपने प्रश्न लिखित रूप में भेजे थे और सरसंघचालक जी ने उन सभी प्रश्नों के विस्तार से उत्तर दिए।
युवाओं के प्रश्नों के दिए विस्तृत उत्तर
कार्यक्रम में उपस्थित युवा उद्यमियों ने विभिन्न विषयों पर अपनी शंकाएं और प्रश्न रखे। डॉ. भागवत ने हर प्रश्न को ध्यान से सुना और उसका विस्तार से उत्तर दिया। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि आज का युवा भारत का भविष्य है। युवा पीढ़ी को अपने काम में ईमानदारी और समर्पण के साथ लगे रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने व्यवसाय में नैतिक मूल्यों को भी ध्यान में रखना चाहिए। केवल पैसा कमाना ही सफलता नहीं है बल्कि समाज में अपनी एक अच्छी छवि बनाना और लोगों की मदद करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
प्रौद्योगिकी का संतुलित उपयोग जरूरी
सरसंघचालक जी ने प्रौद्योगिकी के संतुलित उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में मोबाइल फोन, कंप्यूटर और इंटरनेट हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन गए हैं। लेकिन हमें यह ध्यान रखना होगा कि हम इनका उपयोग कितना और किस तरह से कर रहे हैं।
अगर हम दिन भर मोबाइल में लगे रहते हैं और अपने परिवार और समाज से कट जाते हैं तो यह चिंता की बात है। प्रौद्योगिकी हमें आपस में जोड़ने के लिए है, न कि अलग करने के लिए। हमें प्रौद्योगिकी का उपयोग अपने काम को बेहतर बनाने और समाज की सेवा करने के लिए करना चाहिए।
स्वदेशी अपनाना देश की जरूरत
डॉ. भागवत ने स्वदेशी अपनाने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि स्वदेशी का अर्थ केवल भारतीय वस्तुओं का उपयोग करना ही नहीं है बल्कि भारतीय मूल्यों और संस्कृति को अपने जीवन में उतारना भी है। जब हम स्वदेशी अपनाते हैं तो हम अपने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाते हैं।
उन्होंने युवा उद्यमियों से कहा कि वे अपने उत्पादों और सेवाओं में भारतीय मूल्यों को शामिल करें। भारतीय परंपरा में हमेशा से ग्राहक को देवता माना गया है। अगर हम अपने ग्राहकों की सच्चे दिल से सेवा करेंगे तो सफलता अपने आप मिलेगी।
समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव जरूरी
सरसंघचालक जी ने कहा कि हर व्यक्ति को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। समाज ने हमें बहुत कुछ दिया है और हमारा फर्ज बनता है कि हम भी समाज को कुछ वापस दें। चाहे हम छोटा व्यवसाय करें या बड़ा, हमें यह सोचना चाहिए कि हमारे काम से समाज को क्या लाभ हो रहा है।
उन्होंने कहा कि जब हम समाज हित में काम करते हैं तो हमें एक अलग तरह की संतुष्टि मिलती है। पैसा तो आता जाता रहता है लेकिन समाज में अच्छा नाम और सम्मान हमेशा रहता है। युवा उद्यमियों को अपने व्यवसाय में ईमानदारी और पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए।
संवाद का महत्व
इस कार्यक्रम में सीधा संवाद का आयोजन किया गया था जिसमें लोगों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिला। डॉ. भागवत ने कहा कि संवाद बहुत जरूरी है। जब हम एक दूसरे से बात करते हैं तो हमें एक दूसरे को समझने का मौका मिलता है। संवाद से ही समस्याओं का समाधान निकलता है।
उन्होंने कहा कि संघ हमेशा से खुले संवाद में विश्वास रखता है। हम किसी से कुछ छुपाते नहीं हैं। हमारा काम पूरी तरह से पारदर्शी है। हम समाज की सेवा के लिए काम करते हैं और हमारा कोई निजी एजेंडा नहीं है।
भारतीय मूल्यों को अपनाने की जरूरत
डॉ. मोहन भागवत जी ने युवाओं से कहा कि वे भारतीय मूल्यों और परंपराओं को न भूलें। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं। लेकिन हमें यह याद रखना होगा कि हमारी असली ताकत हमारी संस्कृति और मूल्यों में है।
उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में हमेशा से परिवार और समाज को महत्व दिया गया है। हमें अपने बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए और उनके अनुभव से सीखना चाहिए। युवा पीढ़ी को पुरानी पीढ़ी के साथ मिलकर काम करना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में सरसंघचालक जी ने सभी युवा उद्यमियों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि वे अपने काम में ईमानदारी से लगे रहें। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य उज्ज्वल है और युवा पीढ़ी इसे और भी बेहतर बना सकती है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे अपने व्यवसाय के साथ साथ समाज सेवा को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।