भारतीय क्रिकेट टीम के बल्लेबाज श्रेयस अय्यर ने हाल ही में अपनी उस खतरनाक चोट के बारे में खुलकर बात की है जो उन्हें पिछले साल ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान लगी थी। यह चोट इतनी गंभीर थी कि उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था। श्रेयस ने बताया कि शुरुआत में उन्हें खुद भी नहीं पता था कि उनकी चोट कितनी खतरनाक है। उन्हें तिल्ली यानी स्प्लीन के बारे में भी ज्यादा जानकारी नहीं थी।
न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के उपकप्तान के रूप में खेल रहे श्रेयस अय्यर ने एक साक्षात्कार में अपनी पूरी कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि किस तरह वह इस जानलेवा चोट से उबरे और फिर से मैदान पर वापसी की। यह कहानी हर खिलाड़ी के संघर्ष और हिम्मत की मिसाल है।
चोट कैसे लगी थी
ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान श्रेयस अय्यर फील्डिंग कर रहे थे। मैदान पर खेलते समय उन्हें अचानक जोरदार चोट लगी। शुरुआत में तो उन्हें लगा कि यह सामान्य चोट है लेकिन दर्द बढ़ता गया। जब उनकी जांच की गई तो पता चला कि उनकी तिल्ली में गंभीर चोट लगी है। तिल्ली हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग होता है जो खून को साफ करने और संक्रमण से लड़ने में मदद करता है।
डॉक्टरों ने तुरंत श्रेयस को अस्पताल में भर्ती करा दिया। करीब एक हफ्ते तक उनका इलाज चला। इस दौरान उन्हें पूरा आराम करने की सलाह दी गई। क्रिकेट से दूर रहना और बिल्कुल शांत रहना उनके लिए बहुत मुश्किल था क्योंकि वह बहुत ही सक्रिय खिलाड़ी हैं।

श्रेयस ने क्या कहा अपनी चोट के बारे में
जियोहॉटस्टार को दिए गए साक्षात्कार में श्रेयस अय्यर ने अपनी चोट के बारे में विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि यह बहुत दर्दनाक और पीड़ादायक अनुभव था। उन्होंने बताया कि उन्हें तब तक नहीं पता था कि स्प्लीन क्या होता है। उन्होंने कहा कि वह इस शब्द के बारे में भी ज्यादा नहीं जानते थे।
श्रेयस ने बताया कि जब वह अस्पताल में भर्ती हुए तब उन्हें अहसास हुआ कि यह कितनी गंभीर चोट थी। उन्होंने कहा कि अगले दिन जब उन्हें पूरी जानकारी मिली तो वह समझ गए कि यह एक बड़ी समस्या है। उन्हें अपने शरीर को ठीक होने के लिए पूरा समय देना पड़ा।
आराम करना था सबसे बड़ी चुनौती
श्रेयस अय्यर ने बताया कि उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती एक जगह बैठकर आराम करना था। वह कहते हैं कि वह ऐसे इंसान हैं जो एक जगह बैठ नहीं सकते। वह हमेशा कुछ न कुछ करते रहना पसंद करते हैं। लेकिन इस चोट ने उन्हें मजबूर कर दिया कि वह रुकें और अपने शरीर को आराम दें।
उन्होंने बताया कि यह एक ऐसी स्थिति नहीं थी जहां आप सुबह उठें और सीधे काम शुरू कर दें। उन्हें खुद के बारे में सोचना पड़ा और जितना संभव हो सके आराम करना पड़ा। यह समय उनके लिए बहुत कठिन था लेकिन जरूरी भी था। इसी आराम और सही इलाज की वजह से वह फिर से स्वस्थ हो पाए।
अमिताभ बच्चन से जुड़ी है कड़ी
दिलचस्प बात यह है कि श्रेयस अय्यर को वैसी ही चोट लगी थी जैसी चोट महानायक अमिताभ बच्चन को कूली फिल्म की शूटिंग के दौरान लगी थी। 1982 में फिल्म कूली की शूटिंग के दौरान एक एक्शन सीन में पुनीत इस्सर के पंच से अमिताभ बच्चन को तिल्ली में गंभीर चोट लगी थी।
उस समय अमिताभ बच्चन की हालत बहुत गंभीर हो गई थी। पूरे देश में उनके प्रशंसकों ने उनके लिए दुआएं की थीं। मंदिरों में पूजा की गई और लोगों ने हर संभव तरीके से उनके स्वस्थ होने की कामना की। आखिरकार लंबे इलाज के बाद वह मौत के मुंह से बाहर आए थे। उसी तरह श्रेयस अय्यर भी इस जानलेवा चोट से उबरकर वापस आए हैं।
क्रिकेट में शानदार वापसी
चोट से ठीक होने के बाद श्रेयस अय्यर ने न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में शानदार वापसी की है। पहले मैच में उन्होंने नाबाद 49 रन बनाए थे जिससे टीम को जीत मिली। हालांकि दूसरे मैच में वह सिर्फ 8 रन बनाकर आउट हो गए लेकिन उनकी वापसी ही एक बड़ी उपलब्धि है।
न्यूजीलैंड के खिलाफ इस सीरीज में श्रेयस को उपकप्तान की जिम्मेदारी भी दी गई है। यह उनकी मेहनत और प्रतिभा का सम्मान है। चोट से उबरने के बाद इतनी जल्दी वापसी करना और टीम की कप्तानी करना दिखाता है कि वह कितने मजबूत और दृढ़ निश्चयी खिलाड़ी हैं।
मानसिक मजबूती का सबक
श्रेयस अय्यर की यह कहानी सिर्फ शारीरिक चोट से उबरने की नहीं है बल्कि मानसिक मजबूती की भी कहानी है। जब कोई खिलाड़ी गंभीर चोट का सामना करता है तो उसके मन में कई तरह के डर पैदा हो जाते हैं। क्या वह फिर से पहले जैसा खेल पाएगा? क्या उसका करियर खत्म हो गया? क्या वह टीम में वापस आ पाएगा?
श्रेयस ने इन सभी डरों को पीछे छोड़ा और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने अपने इलाज पर पूरा ध्यान दिया और डॉक्टरों की सलाह मानी। उन्होंने जल्दबाजी नहीं की और अपने शरीर को पूरी तरह ठीक होने का समय दिया। यह धैर्य और अनुशासन उनकी सफल वापसी का मुख्य कारण है।
परिवार और टीम का साथ
किसी भी खिलाड़ी के लिए मुश्किल समय में परिवार और टीम का साथ बहुत जरूरी होता है। श्रेयस अय्यर को भी अपने परिवार, दोस्तों और टीम के साथियों का भरपूर साथ मिला। भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने उनके इलाज के लिए हर संभव मदद की। टीम के डॉक्टरों और फिजियोथेरेपिस्ट ने उनकी देखभाल में कोई कमी नहीं छोड़ी।
टीम के साथी खिलाड़ियों ने भी उन्हें हौसला दिया और उनके जल्द ठीक होने की कामना की। इस सकारात्मक माहौल ने श्रेयस को मानसिक रूप से मजबूत बनाया। उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी वापसी के लिए कड़ी मेहनत की।
युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा
श्रेयस अय्यर की यह कहानी देश भर के युवा खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणा है। यह बताती है कि चुनौतियां कितनी भी बड़ी क्यों न हों, मेहनत और धैर्य से उन्हें पार किया जा सकता है। खेल में चोटें आम बात हैं लेकिन उनसे घबराना नहीं चाहिए।
सही इलाज, आराम और सकारात्मक सोच से कोई भी खिलाड़ी फिर से मैदान में वापस आ सकता है। श्रेयस ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादा मजबूत हो तो कोई भी मुश्किल आपको रोक नहीं सकती। उनकी वापसी भारतीय क्रिकेट के लिए एक खुशी की बात है और उनसे आगे भी बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद है।