आठवें वेतन आयोग का इंतजार
केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए यह समय बेहद अहम है। सातवें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुका है और अब सभी की नजरें आठवें वेतन आयोग पर टिकी हुई हैं। हालांकि वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने में अभी 18 से 20 महीने का समय लग सकता है, लेकिन कर्मचारी अपनी नई सैलरी और महंगाई भत्ते का हिसाब लगाने में जुट गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि नया फिटमेंट फैक्टर कैसे तय किया जाएगा और इससे वेतन में कितनी बढ़ोतरी होगी।
केंद्र सरकार ने पिछले साल जनवरी महीने में आठवें वेतन आयोग के गठन की घोषणा की थी। नवंबर महीने में इसकी टीम का गठन भी कर दिया गया। अब यह आयोग अपना काम शुरू कर चुका है और विभिन्न हितधारकों से सुझाव भी मांगे जा रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण पहलू है फिटमेंट फैक्टर का निर्धारण, जो सीधे तौर पर कर्मचारियों की सैलरी को प्रभावित करेगा।
फिटमेंट फैक्टर क्या है और कैसे काम करता है
फिटमेंट फैक्टर एक गुणांक होता है जिसके आधार पर पुराने वेतन को नए वेतन में बदला जाता है। सातवें वेतन आयोग में यह फैक्टर 2.57 था। इसका मतलब था कि छठे वेतन आयोग के मुताबिक जो न्यूनतम वेतन 7,000 रुपये था, उसे 2.57 से गुणा करके 18,000 रुपये कर दिया गया। यह पूरा कैलकुलेशन महंगाई भत्ते और वास्तविक वेतन वृद्धि को ध्यान में रखकर किया जाता है।
सातवें वेतन आयोग में 2.57 के फिटमेंट फैक्टर में से लगभग 2.25 का हिस्सा केवल महंगाई भत्ते के समायोजन के लिए था। बाकी बचा हुआ हिस्सा वास्तविक वेतन वृद्धि और संरचनात्मक बदलावों के लिए रखा गया था। यही पैटर्न अगर आठवें वेतन आयोग में भी अपनाया जाता है, तो महंगाई भत्ता ही फिटमेंट फैक्टर तय करने का मुख्य आधार बनेगा।
महंगाई भत्ता हो सकता है 60 फीसदी
विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक जनवरी 2026 से जून 2026 की छमाही के लिए केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 60 फीसदी तक पहुंच सकता है। यह अनुमान AICPI-IW यानी अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के 2025 के आंकड़ों पर आधारित है। हालांकि सरकार ने अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन मौजूदा रुझान यही संकेत दे रहे हैं।
अगर 60 फीसदी DA को आधार मानकर फिटमेंट फैक्टर तय किया जाता है, तो यह आठवें वेतन आयोग के वेतन निर्धारण में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। पुराने पैटर्न के हिसाब से देखें तो DA की दर जितनी ज्यादा होगी, फिटमेंट फैक्टर उतना ही ऊंचा होगा और इससे कर्मचारियों की सैलरी में भी अच्छी खासी बढ़ोतरी होगी।
पिछले वेतन आयोगों का रिकॉर्ड
अगर हम इतिहास पर नजर डालें तो हर वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन में काफी इजाफा किया गया है। छठे वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन 7,000 रुपये था जो सातवें वेतन आयोग में बढ़कर 18,000 रुपये हो गया। यह वृद्धि लगभग 2.57 गुना थी। इसी तर्ज पर अगर आठवां वेतन आयोग भी काम करता है, तो न्यूनतम वेतन में एक बार फिर बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर 60 फीसदी DA को आधार बनाया जाता है, तो फिटमेंट फैक्टर 2.5 से 2.8 के बीच हो सकता है। इस हिसाब से मौजूदा न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये को अगर 2.6 से गुणा किया जाए तो नया न्यूनतम वेतन लगभग 46,800 रुपये हो सकता है। हालांकि यह महज एक अनुमान है और वास्तविक आंकड़े वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद ही स्पष्ट होंगे।
वेतन आयोग ने मांगे हैं सुझाव
आठवें वेतन आयोग ने अपना काम शुरू कर दिया है और इसके लिए एक विशेष वेबसाइट भी लॉन्च की गई है। इस वेबसाइट पर केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और अन्य हितधारकों से सुझाव मांगे जा रहे हैं। यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक तरीके से वेतन संशोधन करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। कर्मचारी संगठन और यूनियनें अपनी मांगें और सुझाव इस पोर्टल के जरिए सीधे वेतन आयोग तक पहुंचा सकते हैं।
वेतन आयोग विभिन्न विभागों, मंत्रालयों और कर्मचारी संगठनों से विस्तृत चर्चा भी करेगा। इन चर्चाओं में वेतन संरचना, भत्तों, पेंशन और अन्य सुविधाओं पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और समावेशी तरीके से चलाई जा रही है ताकि सभी पक्षों की बात सुनी जा सके।
सिफारिशें आने में लगेगा समय
हालांकि वेतन आयोग का गठन हो चुका है और काम भी शुरू हो गया है, लेकिन इसकी सिफारिशें आने में अभी काफी समय लगेगा। आमतौर पर वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने में 18 से 20 महीने लग जाते हैं। इसके बाद सरकार उन सिफारिशों पर विचार करती है और फिर उन्हें लागू करने की प्रक्रिया शुरू होती है। इसलिए कर्मचारियों को थोड़ा धैर्य रखना होगा।
इस बीच कर्मचारी यूनियनें और संगठन लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि वेतन वृद्धि के साथ-साथ महंगाई भत्ते में भी नियमित बढ़ोतरी की जाए। उनका तर्क है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है और कर्मचारियों की क्रय शक्ति कम हो रही है। इसलिए वेतन और भत्तों में उचित वृद्धि बेहद जरूरी है।
आर्थिक प्रभाव और चुनौतियां
वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने से सरकारी खजाने पर काफी बोझ पड़ेगा। केंद्र सरकार के लगभग 50 लाख कर्मचारी और करीब 65 लाख पेंशनभोगी हैं। इन सभी के वेतन और पेंशन में वृद्धि से सरकारी खर्च में अरबों रुपये का इजाफा होगा। हालांकि सरकार को यह भी ध्यान रखना होगा कि कर्मचारियों का मनोबल बना रहे और वे बेहतर तरीके से काम कर सकें।
दूसरी तरफ यह वृद्धि अर्थव्यवस्था के लिए भी फायदेमंद हो सकती है। जब सरकारी कर्मचारियों की सैलरी बढ़ेगी तो उनकी खरीदारी क्षमता भी बढ़ेगी, जिससे बाजार में मांग बढ़ेगी और व्यापार को गति मिलेगी। यह एक तरह से आर्थिक चक्र को मजबूत बनाने का काम करेगा।
कर्मचारियों की उम्मीदें
केंद्रीय कर्मचारी आठवें वेतन आयोग से काफी उम्मीदें लगाए बैठे हैं। वे चाहते हैं कि न्यूनतम वेतन में अच्छी खासी बढ़ोतरी हो और महंगाई भत्ता भी नियमित रूप से बढ़ता रहे। इसके अलावा वे विभिन्न भत्तों में भी संशोधन की मांग कर रहे हैं। मकान किराया भत्ता, यात्रा भत्ता और अन्य सुविधाओं में भी सुधार की जरूरत है।
कर्मचारी संगठनों ने वेतन आयोग के सामने यह मांग भी रखी है कि पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया जाए। हालांकि सरकार ने हाल ही में एक नई एकीकृत पेंशन योजना शुरू की है, लेकिन कई कर्मचारी अभी भी पुरानी योजना को बेहतर मानते हैं। यह मुद्दा भी वेतन आयोग की चर्चाओं में शामिल होगा।
आने वाले महीनों में वेतन आयोग की कार्यवाही पर सभी की नजर रहेगी। कर्मचारी और पेंशनभोगी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि कब उन्हें अपनी बढ़ी हुई सैलरी और पेंशन मिलेगी। फिलहाल यह तो तय है कि बदलाव होने जा रहा है और वह सकारात्मक दिशा में होगा।