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12 फरवरी को देशभर में बैंक हड़ताल, ग्राहकों को हो सकती है परेशानी

Bharat Band Bank Strike 12 Feb: देशभर में बैंक हड़ताल से होगा काम प्रभावित
Bharat Band Bank Strike 12 Feb: देशभर में बैंक हड़ताल से होगा काम प्रभावित (File Photo)

Bharat Band Bank Strike 12 Feb: 12 फरवरी को देशभर में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल होगी जिसमें एआईबीईए, एआईबीओए और बीईएफआई सहित 10 यूनियन शामिल हैं। नए लेबर कोड्स के विरोध में हो रही इस हड़ताल से बैंक शाखाओं में काम प्रभावित होगा। ग्राहकों को सलाह दी जा रही है कि जरूरी काम पहले निपटा लें और डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल करें।

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Bharat Band Bank Strike 12 Feb: देश की बैंकिंग व्यवस्था 12 फरवरी 2025 को एक बड़ी चुनौती का सामना करने जा रही है। इस दिन देशभर में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल होने वाली है जो करोड़ों ग्राहकों को प्रभावित कर सकती है। यह हड़ताल सरकार द्वारा लाए गए नए श्रम कानूनों के खिलाफ है और इसमें बैंकिंग क्षेत्र की सभी बड़ी यूनियनें शामिल हो रही हैं। ग्राहकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने जरूरी बैंकिंग काम पहले ही निपटा लें और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करें।

हड़ताल में कौन-कौन सी यूनियनें शामिल हैं

इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में बैंकिंग क्षेत्र की तीन सबसे बड़ी यूनियनें ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉयी एसोसिएशन, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन और बैंक एम्प्लॉयी फेडरेशन ऑफ इंडिया के साथ-साथ 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियन शामिल हैं। इन संगठनों ने मिलकर यह फैसला लिया है कि वे नए लेबर कोड्स का विरोध करेंगे। इन यूनियनों में लाखों बैंक कर्मचारी और अधिकारी सदस्य हैं जो पूरे देश में फैले हुए हैं। हड़ताल की सूचना सभी बड़े बैंकों को दे दी गई है और यूनियनों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह विरोध शांतिपूर्ण लेकिन मजबूत होगा।

नए लेबर कोड्स क्यों हैं विवाद में

सरकार ने नवंबर 2024 में चार नए लेबर कोड्स को अधिसूचित किया था। ये नए कानून 29 पुराने श्रम कानूनों की जगह लेने के लिए बनाए गए हैं। सरकार का कहना है कि ये कानून आधुनिक समय की जरूरतों के मुताबिक हैं और कामकाज को आसान बनाएंगे। लेकिन यूनियनों का मानना है कि इन नए कानूनों से कर्मचारियों के अधिकार कमजोर होंगे। खासकर ट्रेड यूनियन बनाने और उन्हें रजिस्टर करने के लिए जो नई शर्तें लगाई गई हैं, वे बहुत सख्त हैं। पहले जहां कम संख्या में लोग मिलकर यूनियन बना सकते थे, अब उसके लिए ज्यादा सदस्यों की जरूरत होगी। यूनियनों का कहना है कि यह कदम संगठित होने के उनके अधिकार पर हमला है।

कर्मचारियों की अन्य मांगें क्या हैं

नए लेबर कोड्स के अलावा बैंक कर्मचारियों की कुछ और मांगें भी हैं। वे पांच दिन की कार्य सप्ताह की व्यवस्था चाहते हैं ताकि उन्हें बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस मिल सके। अभी बैंक छह दिन खुलते हैं और कर्मचारियों को सिर्फ रविवार की छुट्टी मिलती है। इसके अलावा वे बेहतर वेतन और सुविधाओं की भी मांग कर रहे हैं। कई कर्मचारियों का कहना है कि डिजिटल बैंकिंग के बढ़ने से उनका काम का बोझ बढ़ गया है लेकिन उसके मुताबिक सुविधाएं नहीं बढ़ी हैं। वे चाहते हैं कि सरकार और बैंक प्रबंधन उनकी समस्याओं को समझे और उचित कदम उठाए।

किन बैंकों में होगी हड़ताल का असर

बैंक ऑफ बड़ौदा ने शेयर बाजार को सूचित किया है कि हड़ताल की वजह से उसकी शाखाओं और कार्यालयों में काम प्रभावित हो सकता है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने भी अपने ग्राहकों को चेतावनी जारी की है कि सेवाएं सीमित हो सकती हैं। आईडीबीआई बैंक को भी हड़ताल का नोटिस मिल चुका है। सबसे ज्यादा असर सरकारी बैंकों पर होगा क्योंकि इन बैंकों में यूनियनों के ज्यादातर सदस्य काम करते हैं। प्राइवेट बैंकों में असर कम हो सकता है लेकिन फिर भी कुछ शाखाओं में दिक्कत आ सकती है। पूरे देश में हजारों शाखाएं इस हड़ताल से प्रभावित हो सकती हैं।

आरबीआई और बैंक अवकाश की स्थिति

अभी तक भारतीय रिजर्व बैंक ने 12 फरवरी को बैंक अवकाश घोषित नहीं किया है। इसका मतलब है कि बैंक आधिकारिक तौर पर खुले रहेंगे। लेकिन अगर कर्मचारी हड़ताल पर चले गए तो शाखाओं में काम नहीं हो पाएगा। ज्यादातर सरकारी बैंकों में काउंटर सेवाएं बंद रह सकती हैं। कुछ जरूरी सेवाएं चालू रखने की कोशिश की जाएगी लेकिन पूरी तरह सामान्य कामकाज की उम्मीद नहीं है। बैंक प्रबंधन कोशिश कर रहा है कि ग्राहकों को ज्यादा दिक्कत न हो लेकिन हड़ताल व्यापक होने पर यह मुश्किल होगा।

ग्राहकों को क्या करना चाहिए

बैंक ग्राहकों को सलाह दी जा रही है कि वे 12 फरवरी से पहले अपने सभी जरूरी काम निपटा लें। अगर आपको नकद निकालना है तो 11 फरवरी तक निकाल लें। चेक जमा करना है या कोई बड़ा भुगतान करना है तो उसे भी पहले कर लें। बड़े लेन-देन या लोन से जुड़े काम भी पहले निपटा लेना बेहतर होगा। एटीएम, नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई जैसी डिजिटल सेवाएं शायद प्रभावित न हों क्योंकि ये स्वचालित हैं। लेकिन अगर कोई तकनीकी समस्या आती है तो उसे तुरंत ठीक करना मुश्किल हो सकता है क्योंकि कर्मचारी हड़ताल पर होंगे।

भारत बंद से क्या है संबंध

यह हड़ताल सिर्फ बैंकिंग क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह एक बड़े भारत बंद का हिस्सा है जिसमें किसान संगठन और अन्य क्षेत्रों के कामगार भी शामिल हो सकते हैं। कई किसान संगठनों ने भी नए कानूनों के खिलाफ विरोध की घोषणा की है। ट्रांसपोर्ट और दूसरे सेक्टर के कामगार भी इस विरोध में शामिल हो सकते हैं। इससे 12 फरवरी को देशभर में कई जगह काम प्रभावित हो सकता है। यह एक समन्वित प्रयास है जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों के लोग मिलकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

सरकार और बैंकों की तैयारी

सरकार और बैंक प्रबंधन की तरफ से अभी तक कोई बड़ा जवाब नहीं आया है। बैंक अपने ग्राहकों को सूचित कर रहे हैं और वैकल्पिक व्यवस्था करने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ बैंकों ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को तैयार रहने को कहा है ताकि जरूरत पड़ने पर वे काउंटर पर सेवा दे सकें। लेकिन लाखों कर्मचारियों की हड़ताल को संभालना आसान नहीं होगा। सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह यूनियनों से बातचीत करे लेकिन अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है। अगर आखिरी समय में कोई समझौता नहीं होता है तो यह हड़ताल निश्चित रूप से होगी।

पिछली हड़तालों का इतिहास

बैंकिंग क्षेत्र में हड़तालें नई बात नहीं हैं। पहले भी कई बार कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल की है। लेकिन इस बार का मामला अलग है क्योंकि यह सीधे तौर पर नए कानूनों से जुड़ा है। पिछली हड़तालें ज्यादातर वेतन और सुविधाओं को लेकर थीं लेकिन इस बार मुद्दा बुनियादी अधिकारों का है। यूनियनों का कहना है कि अगर ये कानून लागू हुए तो भविष्य में कर्मचारियों के लिए अपनी आवाज उठाना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए वे इसे एक निर्णायक लड़ाई मान रहे हैं और पूरी ताकत से विरोध कर रहे हैं।

डिजिटल बैंकिंग पर निर्भरता बढ़ेगी

Bharat Band Bank Strike 12 Feb: इस हड़ताल से एक बात साफ हो रही है कि डिजिटल बैंकिंग की अहमियत लगातार बढ़ रही है। जो लोग पहले से नेट बैंकिंग और मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करते हैं उन्हें ज्यादा दिक्कत नहीं होगी। लेकिन जो लोग अभी भी शाखा में जाकर काम करवाते हैं उन्हें परेशानी हो सकती है। यह समय है जब लोगों को डिजिटल माध्यमों से परिचित होना चाहिए। सरकार भी डिजिटल इंडिया के तहत लोगों को प्रोत्साहित कर रही है कि वे ऑनलाइन बैंकिंग का इस्तेमाल करें। इस हड़ताल के बाद शायद और ज्यादा लोग डिजिटल बैंकिंग की तरफ बढ़ेंगे।

आने वाले दिनों में क्या हो सकता है

अगर 12 फरवरी की हड़ताल सफल रही और सरकार ने यूनियनों की बात नहीं सुनी तो आने वाले समय में और भी हड़तालें हो सकती हैं। यूनियनों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं वे अपना विरोध जारी रखेंगे। दूसरी तरफ सरकार का मानना है कि नए कानून जरूरी सुधार हैं और देश के विकास के लिए आवश्यक हैं। इस टकराव का समाधान बातचीत से ही हो सकता है। ग्राहकों को उम्मीद है कि जल्द ही कोई रास्ता निकल आए और बैंकिंग सेवाएं सामान्य हो जाएं। लेकिन फिलहाल 12 फरवरी के लिए सभी को तैयार रहना होगा।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।