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बजट 2026 पर कैबिनेट की मुहर, MSME के लिए 10 हजार करोड़, देश को मिले 7 नए हाई स्पीड रेल कॉरिडोर

Budget 2026: क्या हुआ सस्ता और क्या महंगा ?
Budget 2026: क्या हुआ सस्ता और क्या महंगा ? (Credit- X @chiranjeevik0)

केंद्रीय बजट 2026 पर कैबिनेट की मंजूरी के बाद संसद में बजट भाषण जारी है. सरकार ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए आत्मनिर्भर भारत, उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर, गरीब और युवाओं पर केंद्रित कई बड़े ऐलान किए हैं, जिनसे आने वाले वर्षों की आर्थिक दिशा तय होगी.

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Budget 2026: देश की आर्थिक दिशा तय करने वाला केंद्रीय बजट 2026 आज अपने निर्णायक पड़ाव पर पहुंच गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में बजट को मंजूरी दे दी गई, जिसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट भाषण शुरू कर दिया है. सुबह 11 बजे शुरू हुए इस भाषण पर देश भर की निगाहें टिकी हुई हैं.

यह बजट ऐसे समय में पेश हो रहा है, जब देश की अर्थव्यवस्था स्थिरता और विकास के बीच संतुलन तलाश रही है. सरकार का दावा है कि यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि विकसित भारत की ओर बढ़ती ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ का रोडमैप है.

ऐतिहासिक बजट का दावा और सियासी उम्मीदें

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बजट से पहले कहा कि यह एक ऐतिहासिक बजट होगा, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुधारों के एजेंडे को और गति देगा. वहीं भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने भी उम्मीद जताई कि बजट के बाद देश में सकारात्मक माहौल बनेगा और आम लोगों को राहत महसूस होगी.

सरकार की ओर से यह संकेत साफ हैं कि बजट में लोकलुभावन घोषणाओं से ज्यादा संरचनात्मक सुधारों पर जोर दिया गया है. खासतौर पर आयकर, जीएसटी और रोजगार से जुड़े मोर्चों पर बड़े ऐलानों की संभावना पहले से जताई जा रही थी.

गरीब, किसान और युवाओं तक विकास पहुंचाने का लक्ष्य

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण के दौरान साफ कहा कि सरकार का लक्ष्य महत्वाकांक्षाओं को उपलब्धियों में बदलना है. उन्होंने जोर देकर कहा कि विकास का लाभांश किसानों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, युवाओं और गरीबों तक समान रूप से पहुंचना चाहिए.

सरकार का मानना है कि जब तक विकास का असर अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक नहीं पहुंचेगा, तब तक आर्थिक प्रगति अधूरी रहेगी. इसी सोच के साथ बजट के प्रस्तावों को आकार दिया गया है.

आर्थिक विकास को टिकाऊ रखने के छह स्तंभ

बजट 2026 में आर्थिक वृद्धि को सतत बनाए रखने के लिए छह प्रमुख क्षेत्रों को आधार बताया गया है. इनमें विनिर्माण क्षेत्रों को रणनीतिक रूप से मजबूत करना, परंपरागत उद्योगों को संरक्षित रखना, चैम्पियन एमएसएमई का निर्माण, मजबूत संरचनात्मक ढांचा तैयार करना, स्थिरता का वातावरण बनाना और शहरों को आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करना शामिल है.

सरकार का मानना है कि इन्हीं क्षेत्रों पर ध्यान देकर आने वाले वर्षों में तेज और स्थायी विकास हासिल किया जा सकता है.

10 हजार करोड़ का बड़ा निवेश और उद्योगों पर फोकस

वित्त मंत्री ने घोषणा की कि अगले पांच वर्षों में वैश्विक स्तर पर कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया जाएगा. इससे न केवल घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत भूमिका मिलेगी.

इसके साथ ही मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने, भारत को फार्मा हब बनाने, देश भर में एक हजार क्लीनिकल ट्रायल शुरू करने और रेयर अर्थ संसाधनों पर विशेष फोकस के प्रस्ताव रखे गए हैं.

राज्यों को सौगात और नए कॉरिडोर की घोषणा

बजट 2026 में तमिलनाडु, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और केरल को बड़ी सौगात दी गई है. इन राज्यों में डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव पेश किया गया है. इससे न केवल क्षेत्रीय विकास को बल मिलेगा, बल्कि रणनीतिक संसाधनों में आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी.

अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग शुरू किए जाएंगे. इसके साथ ही कोस्टल कार्गो प्रमोशन स्कीम और सी-प्लेन वीजीएफ स्कीम की शुरुआत का ऐलान किया गया है. सरकार का मानना है कि इससे लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और व्यापार को नई रफ्तार मिलेगी.

आत्मनिर्भर भारत और सेमीकंडक्टर मिशन

बजट में आत्मनिर्भर भारत निधि में 2000 करोड़ रुपये के टॉपअप का प्रस्ताव रखा गया है. साथ ही 10 हजार करोड़ रुपये की एसएमई विकास निधि की घोषणा की गई है. घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए रसायनिक पार्क और वृहद कपड़ा पार्क बनाने की योजना भी सामने आई है.

सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के तहत भारतीय बौद्धिक संपदा के लिए आवश्यक उपकरण और सामग्री के उत्पादन पर जोर दिया जाएगा.

हाई स्पीड रेल से बदलेगा देश का नक्शा

वित्त मंत्री ने सात नए हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने का ऐलान किया है. इनमें मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलिगुड़ी शामिल हैं. यह परियोजनाएं देश की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा देंगी.

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।