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बजट सत्र का दूसरा दिन: आज आएगा आर्थिक सर्वे, 1 फरवरी को पेश होगा देश का बजट

बजट सत्र का दूसरा दिन: आज आएगा आर्थिक सर्वे
बजट सत्र का दूसरा दिन: आज आएगा आर्थिक सर्वे (File Photo)

संसद के बजट सत्र के दूसरे दिन आज आर्थिक सर्वे पेश किया जाएगा। 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2026 आएगा। विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है, जबकि सरकार आर्थिक सुधारों और विकास पर जोर दे रही है। आने वाले दिन सियासी और आर्थिक दृष्टि से अहम होंगे।

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Budget Session 2026: संसद के बजट सत्र का आज दूसरा दिन है और देश की नजरें एक बार फिर संसद भवन पर टिकी हुई हैं। आज वह दिन है, जब सरकार देश की अर्थव्यवस्था का हाल पूरे देश के सामने रखेगी। आर्थिक सर्वे केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं होता, बल्कि यह आने वाले बजट की दिशा और सरकार की सोच को भी साफ तौर पर दिखाता है। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता, अमेरिकी टैरिफ और जियोपॉलिटिकल तनाव का असर साफ नजर आ रहा है, आज पेश होने वाला आर्थिक सर्वे बेहद अहम माना जा रहा है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2026 पेश करेंगी। यह उनका लगातार 9वां बजट होगा, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। ऐसे में आज पेश होने वाला आर्थिक सर्वे सरकार के लिए न केवल उपलब्धियों का ब्योरा होगा, बल्कि आगे की चुनौतियों का संकेत भी देगा।

बजट सत्र और आर्थिक सर्वे का महत्व

आर्थिक सर्वे को बजट की भूमिका कहा जाता है। इसमें सरकार बीते एक साल में देश की आर्थिक स्थिति, विकास दर, महंगाई, रोजगार, निर्यात और राजकोषीय घाटे जैसे मुद्दों पर अपनी रिपोर्ट पेश करती है। आम आदमी के लिए यह जानना जरूरी होता है कि सरकार अर्थव्यवस्था को किस नजर से देख रही है और किन क्षेत्रों पर उसका फोकस रहने वाला है।

इस बार का आर्थिक सर्वे ऐसे समय में आ रहा है, जब दुनिया के कई बड़े देशों की अर्थव्यवस्था दबाव में है। वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के बदलते समीकरण भारत के लिए चुनौती भी हैं और अवसर भी। ऐसे में सरकार किन सुधारों की बात करती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।

दो हिस्सों में चलेगा बजट सत्र

इस बार संसद का बजट सत्र दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। पहला चरण 13 फरवरी तक चलेगा, जिसके बाद सत्र को अवकाश के लिए स्थगित कर दिया जाएगा। दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होगा और 2 अप्रैल को समाप्त होगा। कुल मिलाकर 65 दिनों में 30 बैठकें प्रस्तावित हैं।

लंबे सत्र का मतलब यह है कि सरकार के पास अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने का समय भी है और विपक्ष के पास सवाल उठाने का पूरा मौका भी। यही वजह है कि इस सत्र को राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है।

विपक्ष का आक्रामक रुख

बजट सत्र शुरू होने से पहले ही विपक्ष ने साफ कर दिया है कि वह सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ेगा। वीबी-जी राम जी कानून, एसआईआर, विदेश नीति और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष सरकार को कठघरे में खड़ा करने की तैयारी में है।

पिछले कुछ सत्रों को देखें तो सदनों की कार्यवाही के दौरान हंगामा आम बात बन चुकी है। ऐसे में इस सत्र के दौरान भी तीखी बहस और शोर-शराबे के आसार जताए जा रहे हैं। विपक्ष का मानना है कि आर्थिक चुनौतियों और सामाजिक मुद्दों पर सरकार को जवाबदेह ठहराना उसकी जिम्मेदारी है।

सरकार का एजेंडा और नए बिल

फिलहाल सरकार ने इस बजट सत्र के लिए किसी नए बिल की सूची जारी नहीं की है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार का मुख्य फोकस बजट और उससे जुड़े आर्थिक सुधारों पर रहेगा। हालांकि सत्र के दौरान कुछ महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जा सकते हैं, इस पर अभी स्थिति साफ नहीं है।

सरकार की कोशिश यही रहेगी कि बजट को लेकर सकारात्मक माहौल बनाया जाए और आर्थिक सर्वे के जरिए यह दिखाया जाए कि देश की अर्थव्यवस्था सही दिशा में आगे बढ़ रही है।

संसद में पीएम मोदी का संदेश

आर्थिक सर्वे पेश होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद पहुंचे और मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण का जिक्र करते हुए कहा कि यह 140 करोड़ भारतीयों के भरोसे और उम्मीदों का प्रतिबिंब है। खासकर युवाओं की आकांक्षाओं को राष्ट्रपति के भाषण में प्रमुखता से रखा गया है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ने सांसदों को मार्गदर्शन देने वाली कई अहम बातें कही हैं और उन्हें पूरा भरोसा है कि सभी सांसद इन बातों को गंभीरता से लेंगे। पीएम मोदी के इस बयान को आने वाले बजट और सत्र के लिए सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

बजट 2026 से क्या हैं उम्मीदें

देश के आम नागरिक, व्यापारी, किसान और युवा सभी को बजट 2026 से काफी उम्मीदें हैं। महंगाई पर काबू, रोजगार के नए अवसर, किसानों के लिए राहत और मिडिल क्लास के लिए टैक्स में संभावित राहत जैसे मुद्दे चर्चा में हैं।

वहीं सरकार के सामने राजकोषीय संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी है। वैश्विक हालात को देखते हुए आर्थिक सुधारों के साथ-साथ सामाजिक संतुलन साधना भी आसान नहीं होगा।

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Dipali Kumari

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