जरूर पढ़ें

बुद्ध की विरासत घर लौटी: पीएम मोदी ने किया पिपरहवा अवशेषों की अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन

पीएम मोदी ने किया पिपरहवा अवशेषों की अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन
पीएम मोदी ने किया पिपरहवा अवशेषों की अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन (Pic Credit- AIR)
प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली में पिपरहवा बुद्ध अवशेषों की अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। 127 वर्षों बाद यह पवित्र विरासत भारत की सभ्यतागत चेतना, आध्यात्मिक परंपरा और वैश्विक शांति संदेश को नई पहचान देती है।
Updated:

Piprahwa Buddha: नई दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। “प्रकाश और कमल: प्रबुद्ध व्यक्ति के अवशेष” नामक यह प्रदर्शनी केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की उस आत्मा का उत्सव है, जो हजारों वर्षों से करुणा, शांति और ज्ञान के मूल्यों को दुनिया तक पहुंचाती रही है।

विरासत की वापसी और राष्ट्रीय आत्मगौरव

सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि लंबे इंतजार के बाद देश की पवित्र धरोहर वापस लौटी है। यह केवल ऐतिहासिक अवशेषों की वापसी नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत चेतना का पुनर्जागरण है। उन्होंने कहा कि अब देशवासी भगवान बुद्ध के इन पवित्र अवशेषों के दर्शन कर सकेंगे और उनसे आध्यात्मिक ऊर्जा तथा दिव्य आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे।

पिपरहवा अवशेषों का ऐतिहासिक महत्व

1898 में खोजे गए पिपरहवा अवशेष प्रारंभिक बौद्ध धर्म के अध्ययन में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ये अवशेष भगवान बुद्ध से सीधे जुड़े सबसे प्राचीन साक्ष्यों में शामिल हैं। पुरातात्विक प्रमाण पिपरहवा स्थल को प्राचीन कपिलवस्तु से जोड़ते हैं, वही स्थान जहां सिद्धार्थ गौतम ने संन्यास से पूर्व अपना जीवन व्यतीत किया था।

इन अवशेषों का महत्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भी है। यह हमें उस काल से जोड़ते हैं, जब भारत ज्ञान और दर्शन का वैश्विक केंद्र था।

एक सदी बाद स्वदेश वापसी की कहानी

पिपरहवा अवशेषों को एक सदी से भी अधिक समय के बाद भारत में व्यापक रूप से प्रदर्शित किया जा रहा है। इसके कुछ हिस्से अब तक नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय और कोलकाता के भारतीय संग्रहालय में सुरक्षित रखे गए थे। अब इन्हें एक साथ प्रदर्शनी में देखकर यह अहसास होता है कि बिखरी हुई विरासत फिर से एक सूत्र में बंध रही है।

यह वापसी सरकार के निरंतर प्रयासों, संस्थागत सहयोग और सार्वजनिक-निजी भागीदारी का परिणाम है, जिसने भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को भी नई ऊंचाई दी है।

संस्कृति मंत्रालय की भूमिका

केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि 127 वर्षों बाद पिपरहवा रत्न अवशेषों की वापसी पूरे देश के लिए प्रेरणा और गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि संस्कृति मंत्रालय प्रधानमंत्री के “विकास के साथ विरासत” के दृष्टिकोण के अनुरूप कार्य कर रहा है।

मंत्रालय न केवल पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण पर ध्यान दे रहा है, बल्कि पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत करने की दिशा में भी ठोस कदम उठा रहा है।

बुद्ध की शिक्षाएं और आज का भारत

यह प्रदर्शनी भगवान बुद्ध की शिक्षाओं और भारत के गहरे सभ्यतागत संबंध को उजागर करती है। आज जब दुनिया संघर्ष, हिंसा और असहिष्णुता से जूझ रही है, तब बुद्ध का संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है।

प्रधानमंत्री मोदी बार-बार वैश्विक मंचों से शांति, संवाद और करुणा की बात करते रहे हैं। पिपरहवा अवशेषों की यह प्रदर्शनी उसी सोच का विस्तार है, जहां भारत अपनी आध्यात्मिक विरासत के माध्यम से विश्व को दिशा देने का प्रयास कर रहा है।

आने वाली पीढ़ियों के लिए संदेश

यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक संदेश छोड़ता है कि विरासत केवल संग्रहालयों में सजाने की वस्तु नहीं, बल्कि उसे जीने और समझने की आवश्यकता है। जब युवा इन अवशेषों को देखेंगे, तो वे अपने अतीत से जुड़ेंगे और भविष्य के लिए प्रेरणा पाएंगे।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।

Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।