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Sonam Wangchuk Arrest: लेह से जोधपुर जेल शिफ्ट, जानिए कितना सख्त है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA)

Sonam Wangchuk Arrested under NSA: Shifted from Leh to Jodhpur Jail
Sonam Wangchuk Arrested under NSA: Shifted from Leh to Jodhpur Jail (Photo: Wiki)
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Sonam Wangchuk Arrest News LIVE Updates: लद्दाख के प्रख्यात पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक Sonam Wangchuk को National Security Act (NSA) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्हें गृह मंत्रालय के निर्देश पर लेह से करीब 977 किलोमीटर दूर Jodhpur Central Jail में शिफ्ट किया गया।

वेब स्टोरी:

जानकारी के अनुसार, वांगचुक लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और 6th Schedule में शामिल किए जाने की मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे थे। Leh Festival के तीसरे दिन हुए हिंसक प्रदर्शन में चार लोगों की मौत और लगभग 70 लोग घायल हुए। पुलिस का आरोप है कि यह हिंसा सोनम वांगचुक के भड़काऊ भाषण के बाद भड़की।

NGO पर भी कार्रवाई

सिर्फ गिरफ्तारी ही नहीं, सरकार ने उनके NGO Students’ Educational and Cultural Movement of Ladakh (SECMOL) का विदेशी फंड से जुड़ा लाइसेंस भी रद्द कर दिया है। इससे साफ है कि सरकार इस पूरे आंदोलन और उसके अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को गंभीरता से देख रही है।

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Sonam Wangchuk Arrest: क्या है National Security Act (NSA)?

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA Act, 1980 को आज़ादी के बाद लाए गए तीसरे बड़े सुरक्षा कानून के रूप में जाना जाता है। इससे पहले Preventive Detention Act, 1950 और Maintenance of Internal Security Act (MISA), 1971 लागू थे।

MISA का आपातकाल (Emergency, 1975-77) के दौरान दुरुपयोग हुआ, जिसके चलते 1978 में इसे समाप्त कर दिया गया। इसके बाद 1980 में संसद ने National Security Act पारित किया, जो आज भी प्रभावी है।

NSA कानून के सख्त प्रावधान (5 मुख्य पॉइंट्स)

  1. कब लागू होता है?
    यह कानून भारत की रक्षा, विदेशी शक्तियों के साथ संबंधों, राष्ट्रीय सुरक्षा, या सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के मामलों में लागू किया जाता है। यह Punishment नहीं बल्कि Preventive Action के तौर पर काम करता है।

  2. हिरासत आदेश (Detention Order)
    NSA के तहत हिरासत का आदेश किसी Arrest Warrant की तरह माना जाता है। हिरासत में लिया गया व्यक्ति सरकार द्वारा तय शर्तों पर किसी भी जेल में रखा जा सकता है।

  3. नजरबंदी का कारण बताना
    हिरासत में लिए गए व्यक्ति को कम से कम 5 दिन और अधिकतम 15 दिन के भीतर यह बताया जाना ज़रूरी है कि उसे क्यों नजरबंद किया गया है।

  4. समीक्षा का अधिकार
    हिरासत में रखे गए व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है। हाई कोर्ट के जजों की एक Advisory Board तीन हफ्तों के भीतर मामले की समीक्षा करती है। अगर बोर्ड मानता है कि मामला नहीं बनता, तो तुरंत रिहाई का आदेश दिया जा सकता है।

  5. लंबी नजरबंदी की शक्ति
    अगर कमेटी और सरकार इसे सही ठहराती है, तो NSA सरकार को किसी भी व्यक्ति को लंबी अवधि तक हिरासत में रखने की शक्ति देता है।

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Sonam Wangchuk Arrest: क्यों विवादित है NSA?

NSA को लेकर कई बार सवाल उठते रहे हैं कि यह कानून सरकार को “अत्यधिक शक्तियां” दे देता है। Experts का कहना है कि अक्सर इसका इस्तेमाल Political Dissent दबाने या Activists को चुप कराने के लिए किया जाता है। हाल ही में सोनम वांगचुक का मामला इसी बहस को और तेज कर रहा है।

राजनीतिक और सामाजिक असर

लद्दाख में पहले से ही राज्य का दर्जा और 6th Schedule की मांग को लेकर असंतोष है। वांगचुक की गिरफ्तारी से यह आंदोलन और तेज हो सकता है। कई सामाजिक संगठनों ने सरकार की कार्रवाई की निंदा की है और इसे Democratic Rights पर हमला बताया है।

वहीं, सरकारी सूत्रों का कहना है कि वांगचुक के भाषण ने भीड़ को भड़काया, जिससे हिंसा हुई और कई निर्दोष लोगों की जान गई। ऐसे में Law & Order बनाए रखने के लिए NSA लागू करना मजबूरी थी।

Sonam Wangchuk News:

सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि Activism vs State Power की बड़ी बहस बन चुकी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में High Court की Advisory Board इस मामले पर क्या रुख अपनाती है।

Aryan Ambastha

राष्ट्रभारत डॉट कॉम में लेखक एवं विचारक | वित्त और उभरती तकनीकों में गहरी रुचि | राजनीति एवं समसामयिक मुद्दों के विश्लेषक | कंटेंट क्रिएटर | नालंदा विश्वविद्यालय से स्नातक।

प्रौद्योगिकी, वित्त, राजनीति और समाज के आपसी संबंधों को समझने और व्याख्या करने का विशेष कौशल रखते हैं। जटिल विषयों को सरल, शोध-आधारित और संतुलित दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुँचाना इनकी पहचान है। संपर्क: aryan.ambastha@rashtrabharat.com

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