Turkman Gate Bulldozer Action: राजधानी दिल्ली का तुर्कमान गेट इलाका एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह कोई राजनीतिक बयान या चुनावी हलचल नहीं, बल्कि अदालत के निर्देश पर की गई बुलडोजर कार्रवाई है। फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया जैसे ही शुरू हुई, हालात तेजी से बिगड़ते चले गए। पत्थरबाजी, आगजनी, आंसू गैस और लाठीचार्ज—यह सब कुछ कुछ ही घंटों में देखने को मिला।
दिल्ली हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देश पर यह कार्रवाई की गई थी। प्रशासन के पास इसे टालने का कोई विकल्प नहीं था। अवैध निर्माण वर्षों से मौजूद था और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही इसे हटाने का फैसला लिया गया। लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि जिन इलाकों में लोग पीढ़ियों से रह रहे हों, वहां अचानक बुलडोजर की आवाज सिर्फ निर्माण नहीं तोड़ती, बल्कि लोगों की असुरक्षा की भावना को भी उभार देती है।
कार्रवाई शुरू होते ही बिगड़े हालात
जैसे ही मस्जिद के आसपास अवैध ढांचों को गिराने की प्रक्रिया शुरू हुई, कुछ शरारती तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। पुलिस पर पथराव हुआ, वाहनों में आगजनी की खबरें सामने आईं और स्थिति देखते ही देखते नियंत्रण से बाहर होने लगी। कई पुलिसकर्मी घायल हुए, जो यह बताने के लिए काफी है कि हालात कितने तनावपूर्ण हो चुके थे।
आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा
स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और लाठीचार्ज भी करना पड़ा। यह फैसला आसान नहीं होता, लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस के पास कई बार यही अंतिम विकल्प बचता है। फिर भी, हर बार जब लाठीचार्ज होता है, तो आम लोगों के मन में पुलिस के प्रति दूरी और बढ़ जाती है।
बुलडोजरों की संख्या और कार्रवाई का दायरा
फैज-ए-इलाही मस्जिद को छोड़कर पूरे प्रांगण में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई। शुरुआत में सात बुलडोजर मौके पर लाए गए थे, लेकिन बाद में इनकी संख्या बढ़कर करीब 20 हो गई। यह अपने आप में बताता है कि अवैध निर्माण कितना व्यापक था। बुधवार सुबह से ही बुलडोजरों की आवाज इलाके में गूंजती रही और देखते ही देखते कई ढांचे जमींदोज हो गए।
भारी पुलिस बल और सुरक्षा इंतजाम
प्रशासन को पहले से आशंका थी कि हालात बिगड़ सकते हैं। इसी वजह से रामलीला मैदान के पास और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। जैसे-जैसे तनाव बढ़ा, पुलिसकर्मियों की संख्या और बढ़ा दी गई। वरिष्ठ अधिकारियों को अलग-अलग जोन में तैनात किया गया, ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
शांति समितियों से संवाद की कोशिश
पुलिस का कहना है कि कार्रवाई से पहले स्थानीय शांति समितियों के साथ समन्वय बैठकें की गई थीं। उद्देश्य यही था कि किसी तरह का बवाल न हो। लेकिन तुर्कमान गेट की घटना यह भी दिखाती है कि केवल औपचारिक बैठकें काफी नहीं होतीं। जब लोगों के मन में डर और गुस्सा जमा हो, तो उसे शांत करने के लिए लंबे समय तक भरोसा बनाने की जरूरत होती है।
हिरासत और कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने छह लोगों को हिरासत में लिया है और एफआईआर दर्ज कर ली गई है। जांच जारी है और दोषियों की पहचान की जा रही है। प्रशासन का साफ कहना है कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी उठता है कि क्या सिर्फ गिरफ्तारी से भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकती हैं।