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बिहार में महागठबंधन टूटने की आशंका, कांग्रेस नेता राजद से गठबंधन पर उठा रहे सवाल

Bihar Election 2025: महागठबंधन में दरार, कांग्रेस नेता राजद गठबंधन पर उठा रहे सवाल
Bihar Election 2025: महागठबंधन में दरार, कांग्रेस नेता राजद गठबंधन पर उठा रहे सवाल (File Photo)
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में करारी हार के बाद कांग्रेस और राजद के गठबंधन में दरार आ गई है। 243 में से महज 35 सीटों पर जीत के बाद कांग्रेस नेताओं ने राजद से गठबंधन को हार की मुख्य वजह बताया है। दिल्ली में हुई समीक्षा बैठक में उम्मीदवारों ने गठबंधन तोड़ने की मांग की। राजद अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने कहा कि किसी को जबरदस्ती नहीं रोका जा सकता। 1 दिसंबर से विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले महागठबंधन की बैठक में रणनीति तय की जाएगी।
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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मिली करारी हार के बाद महागठबंधन के भीतर गहरे मतभेद सामने आने लगे हैं। कांग्रेस के कई नेताओं ने राष्ट्रीय जनता दल से गठबंधन को ही इस हार की मुख्य वजह बताते हुए आलाकमान से इसे तोड़ने की मांग कर डाली है। इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या कांग्रेस और लालू-तेजस्वी यादव की पार्टी के रास्ते अब अलग हो जाएंगे।

महागठबंधन को मिली शर्मनाक हार

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने महागठबंधन के सभी घटक दलों को झकझोर कर रख दिया है। कुल 243 विधानसभा सीटों में से महागठबंधन महज 35 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाया। इस गठबंधन में शामिल कांग्रेस ने 71 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन केवल 6 सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकी। राजद की स्थिति भी बेहद निराशाजनक रही, जिसने 143 सीटों पर चुनाव लड़ा और सिर्फ 25 सीटों पर जीत मिली। अन्य घटक दलों का प्रदर्शन भी उम्मीद से काफी कम रहा।

यह हार उन उम्मीदों पर पानी फेर गई जो महागठबंधन ने चुनाव से पहले जगाई थीं। विपक्ष ने सोचा था कि वे सत्ता में बदलाव ला सकेंगे, लेकिन नतीजे बिल्कुल उलट आए। एनडीए गठबंधन ने प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए एक बार फिर सत्ता पर कब्जा कर लिया।

समीक्षा बैठक में उठे सवाल

हार के बाद कांग्रेस ने बीते गुरुवार को नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की। इस बैठक में चुनाव लड़ने वाले सभी 61 उम्मीदवारों को बुलाया गया था। बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने व्यक्तिगत रूप से सभी प्रत्याशियों से बातचीत की। उम्मीदवारों को 10-10 के समूह में बांटकर उनके अनुभव और हार के कारणों को समझने की कोशिश की गई।

इस बैठक में जो बातें सामने आईं, वे महागठबंधन के भविष्य के लिए चिंताजनक हैं। सूत्रों के मुताबिक, अधिकतर उम्मीदवारों ने राजद से गठबंधन को ही हार का मुख्य कारण बताया। कई प्रत्याशियों ने यहां तक कहा कि अगर कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ती तो नतीजे बेहतर होते। उन्होंने आलाकमान को सुझाव दिया कि राजद से गठबंधन तोड़ देना चाहिए।

सीट बंटवारे और फ्रेंडली फाइट की शिकायतें

समीक्षा बैठक में उम्मीदवारों ने कई अन्य मुद्दे भी उठाए। सीट बंटवारे में देरी को भी हार की एक बड़ी वजह बताया गया। गठबंधन के घटक दलों के बीच सीटों के आवंटन को लेकर लंबी खींचतान चली, जिसके कारण चुनाव प्रचार के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। इसके अलावा, लगभग एक दर्जन सीटों पर फ्रेंडली फाइट यानी गठबंधन के ही दो उम्मीदवार आमने-सामने लड़ रहे थे, जिससे वोट बंट गए और फायदा विरोधियों को मिला।

उम्मीदवारों ने यह भी शिकायत की कि मैदान में समन्वय की कमी रही। राजद के कार्यकर्ताओं ने कई जगह कांग्रेस उम्मीदवारों का भरपूर साथ नहीं दिया, जबकि कांग्रेस के कार्यकर्ता राजद के उम्मीदवारों के लिए मेहनत करते रहे। इस असंतुलन ने भी नतीजों को प्रभावित किया।

वरिष्ठ नेताओं का मौन

दिलचस्प बात यह है कि इन सब आरोपों और मांगों के बावजूद कांग्रेस के किसी भी वरिष्ठ नेता ने गठबंधन के भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है। समीक्षा बैठक के बाद जब बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह से राजद से गठबंधन तोड़ने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने साफ कहा कि यह फैसला पार्टी का आलाकमान करेगा। उनका यह जवाब स्थिति की नाजुकता को दर्शाता है।

पार्टी के शीर्ष नेतृत्व अभी इस मसले पर विचार कर रहा है और जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहता। कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा दांव है क्योंकि राजद से गठबंधन तोड़ने के अपने फायदे और नुकसान दोनों हैं।

राजद का जवाब

राजद की तरफ से भी इस मामले पर प्रतिक्रिया आई है। राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने शनिवार को एक टीवी चैनल से बातचीत में साफ लहजे में कहा कि गठबंधन में किसी को जबरदस्ती पकड़कर नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस की मर्जी है कि अकेले और अलग चलना है तो उनकी मर्जी। राजद उन्हें जबरदस्ती नहीं रोक सकती।

मंडल ने यह भी दावा किया कि राजद का बिहार में मजबूत जनाधार है और पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस को लगता है कि गठबंधन में रहने से हार हुई और अलग होना चाहते हैं तो यह उनका फैसला है।

राजद का यह रुख दिखाता है कि उसे भी कांग्रेस के साथ रिश्ते जारी रखने की कोई जल्दी नहीं है। दोनों पार्टियों के बीच के ये मतभेद आने वाले समय में और गहरे हो सकते हैं।

घटक दलों की अपनी समीक्षा

फिलहाल महागठबंधन में शामिल सभी घटक दल अपने-अपने स्तर पर हार की समीक्षा कर रहे हैं। राजद ने प्रमंडलवार अपने उम्मीदवारों से फीडबैक लेना शुरू कर दिया है। पार्टी ने यह भी तय किया है कि जिन नेताओं या कार्यकर्ताओं ने चुनाव के दौरान विरोधियों के पक्ष में काम किया है, उन्हें चिन्हित किया जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे भितरघातियों की पहचान करना और उन्हें पार्टी से बाहर करना राजद की प्राथमिकता है। यह कदम पार्टी को भविष्य के चुनावों के लिए मजबूत करने की दिशा में उठाया जा रहा है।

विधानसभा सत्र की तैयारी

इस बीच, बिहार विधानसभा का सत्र 1 दिसंबर से शुरू होने वाला है। इस सत्र में नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी। प्रचंड बहुमत के साथ जीतने वाली नीतीश कुमार सरकार अपना अनुपूरक बजट भी सदन में पेश करेगी। यह सत्र राज्य की राजनीति में नई शुरुआत का प्रतीक होगा।

विधानसभा सत्र से पहले शनिवार को पटना में तेजस्वी यादव के आवास पर महागठबंधन की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में राजद, कांग्रेस और वाम दलों के विधायक शामिल होंगे। बैठक में विधानसभा सत्र के दौरान अपनाई जाने वाली रणनीति पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक में यह भी देखना होगा कि गठबंधन में आई दरार को कैसे संभाला जाता है।

महागठबंधन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह अपनी एकता बनाए रखे और विधानसभा में विपक्ष की भूमिका को मजबूती से निभाए। हालांकि, भीतरी मतभेदों के बीच यह काम आसान नहीं होगा।

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