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Bihar Politics: तीन प्रतिशत वाला उपमुख्यमंत्री बने तो सत्रह प्रतिशत वाला मुख्यमंत्री क्यों नहीं? असदुद्दीन ओवैसी का बिहार में तीखा प्रश्न

Bihar Politics: तीन प्रतिशत वाला उपमुख्यमंत्री बने तो सत्रह प्रतिशत वाला मुख्यमंत्री क्यों नहीं? असदुद्दीन ओवैसी का बिहार में तीखा प्रश्न
Asaduddin Owaisi Bihar Politics – बिहार में ओवैसी ने पूछा, तीन प्रतिशत उपमुख्यमंत्री तो सत्रह प्रतिशत मुख्यमंत्री क्यों नहीं? (FIle Photo)
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Asfi Shadab
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ओवैसी का सवाल: प्रतिनिधित्व की राजनीति या वोट बैंक की सच्चाई?

गोपालगंज जिले के उचकागांव प्रखंड में मंगलवार को एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार की राजनीति पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने एक भावनात्मक और सशक्त प्रश्न उठाया—“अगर तीन प्रतिशत वाला उपमुख्यमंत्री बन सकता है, तो सत्रह प्रतिशत वाला मुख्यमंत्री क्यों नहीं बन सकता?” यह सवाल केवल चुनावी भाषण का हिस्सा नहीं था, बल्कि बिहार की सामाजिक-सांख्यिकीय राजनीति पर एक गंभीर टिप्पणी थी।

ओवैसी ने यह बयान गोपालगंज विधानसभा क्षेत्र से अपनी पार्टी के प्रत्याशी अनस सलाम के समर्थन में आयोजित एक चुनावी सभा के दौरान दिया। सभा स्थल पर ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ी, जो उनके हर शब्द को ध्यानपूर्वक सुन रही थी।


आरएसएस और आजादी की लड़ाई पर ओवैसी का प्रहार

अपने भाषण के दौरान ओवैसी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर ऐतिहासिक आरोप लगाते हुए कहा कि आजादी की लड़ाई में संघ का कोई योगदान नहीं रहा। उन्होंने कहा, “आरएसएस का कोई भी सदस्य न जेल गया, न उसने देश के लिए बलिदान दिया।” यह वक्तव्य न केवल संघ की विचारधारा पर सवाल उठाता है बल्कि मौजूदा सत्ता की नैतिक वैधता को भी चुनौती देता है।


मोदी, नीतीश और लालू पर करारा हमला

ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव पर एक साथ निशाना साधा। उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार को राजगीर की चिंता है, मोदी को गुजरात की और लालू प्रसाद को अपने बेटे की। जनता की फिक्र किसी को नहीं।”
यह टिप्पणी एक ऐसे समय पर आई है जब बिहार की जनता बेरोजगारी, महंगाई और जातीय असमानता से जूझ रही है। ओवैसी ने इन मुद्दों को सीधे सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से जोड़कर जनता के सामने पेश किया।


मुसलमानों के वोट बैंक की राजनीति पर तीखी टिप्पणी

ओवैसी ने मुसलमान समुदाय को चेताते हुए कहा कि “अब मुसलमान किसी के झांसे में नहीं आने वाले।” उन्होंने कहा कि दशकों से मुसलमानों के वोट का इस्तेमाल सत्ता हासिल करने के लिए किया गया, पर बदले में उन्हें उपेक्षा ही मिली।
उनके इस बयान से यह स्पष्ट संकेत मिला कि एआईएमआईएम अब बिहार में मुस्लिम मतदाताओं के बीच ‘स्वतंत्र राजनीतिक आवाज़’ बनने की कोशिश में है।


जंगलराज की पुनर्परिभाषा: ओवैसी का दो टूक बयान

ओवैसी ने राजद और एनडीए दोनों पर करारा हमला बोलते हुए कहा, “लालू का 15 साल जंगलराज पार्ट-1 था, और मौजूदा एनडीए सरकार जंगलराज पार्ट-2।”
यह बयान बिहार के शासन तंत्र की विफलताओं को उजागर करता है। बेरोजगारी, शिक्षा की गिरती गुणवत्ता और कानून व्यवस्था की समस्याओं पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि दोनों ही गठबंधन ने मुसलमानों को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया।


‘सबका साथ, सबका विकास’ पर सवाल

भाजपा पर हमला बोलते हुए ओवैसी ने कहा कि “प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास’ की सच्चाई यह है कि भाजपा ने एक भी मुसलमान को टिकट नहीं दिया।” यह वक्तव्य सीधे केंद्र सरकार की नीतियों पर प्रहार करता है, विशेषकर प्रतिनिधित्व और समान अवसर के मुद्दे पर।


महागठबंधन पर व्यंग्य: तीन प्रतिशत बनाम सत्रह प्रतिशत की राजनीति

ओवैसी ने महागठबंधन पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, “महागठबंधन में तीन प्रतिशत वाला उपमुख्यमंत्री बनने का दावा कर सकता है, लेकिन सत्रह प्रतिशत वाला मुख्यमंत्री बनने का सपना क्यों नहीं देख सकता?”
यह कथन राजनीतिक संतुलन के उस समीकरण को चुनौती देता है, जहाँ अल्पसंख्यक समुदायों की राजनीतिक भागीदारी हमेशा सीमित रखी जाती है।


ओवैसी की चुनौती: अब आर-पार की लड़ाई

अपने भाषण के अंत में ओवैसी ने कहा कि अब मुसलमानों को अपना हक खुद लेना होगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि “यह अब आर-पार की लड़ाई है, जिसमें अपनी राजनीतिक ताकत साबित करनी होगी।”
सभा की अध्यक्षता पूर्व मुखिया रहमत अली ने की, जबकि संचालन पार्टी जिलाध्यक्ष फरहान शेख ने किया। मंच पर पार्टी के कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे।

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।