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ट्रेन की धक्का-मुक्की से मिलेगी राहत, होली पर बिहार सरकार चलाएगी 200 स्पेशल बसें, 1 फरवरी से बुकिंग

ट्रेन की धक्का-मुक्की से मिलेगी राहत, होली पर बिहार सरकार चलाएगी 200 स्पेशल बसें, 1 फरवरी से बुकिंग
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होली पर प्रवासी बिहारियों को राहत देने के लिए बिहार सरकार 15 फरवरी से 15 मार्च तक 200 विशेष फेस्टिवल बसें चलाएगी। एसी और नॉन-एसी बसों में सस्ती, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा मिलेगी। टिकट बुकिंग 1 फरवरी से शुरू होगी।

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Dipali Kumari
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Holi Special Bus: होली का नाम आते ही रंग, उमंग और अपनों से मिलने की खुशी आंखों के सामने आ जाती है। लेकिन बिहार से बाहर काम कर रहे लाखों प्रवासी मजदूरों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह खुशी अक्सर यात्रा की चिंता में बदल जाती है। ट्रेनों में भीड़, कन्फर्म टिकट न मिलना और महंगे निजी साधन—ये सभी समस्याएं हर साल त्योहार से पहले सामने आती हैं। इसी परेशानी को समझते हुए बिहार सरकार ने इस बार होली के मौके पर बड़ी राहत देने का फैसला किया है।

बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की ओर से होली को लेकर विशेष फेस्टिवल बसों के संचालन की योजना तैयार की गई है। इस पहल का मकसद सिर्फ यात्रियों को घर पहुंचाना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित, आरामदायक और किफायती सफर का भरोसा देना भी है।

15 फरवरी से 15 मार्च तक चलेगी विशेष सेवा

बीएसआरटीसी के अनुसार, होली के त्योहार को ध्यान में रखते हुए 15 फरवरी से 15 मार्च तक करीब 200 अंतरराज्यीय फेस्टिवल बसें चलाई जाएंगी। यह समय वही होता है, जब बाहर रहने वाले लोग बड़ी संख्या में अपने गांव और शहर लौटते हैं।

इन बसों में एसी डीलक्स और नॉन-एसी डीलक्स दोनों तरह की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। हर बस में 50 से 60 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी, ताकि लंबी दूरी का सफर भी थकाऊ न लगे।

1 फरवरी से शुरू होगी टिकट बुकिंग

यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इन विशेष बसों के लिए टिकट बुकिंग की शुरुआत 1 फरवरी से की जाएगी। बीएसआरटीसी की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे लोगों को काउंटर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

सरकार की ओर से किराए में विशेष छूट देने की भी तैयारी की जा रही है। इसका सीधा फायदा उन यात्रियों को मिलेगा, जो सीमित आय के कारण महंगे निजी साधनों से सफर नहीं कर पाते।

किन राज्यों और रूटों पर मिलेगी सुविधा

इन फेस्टिवल बसों का संचालन पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर किया जाएगा। परिवहन विभाग के मुताबिक, बस सेवाएं दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे प्रमुख राज्यों के लिए उपलब्ध होंगी। फिलहाल विभाग रूट निर्धारण और किराया तय करने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है। कोशिश यह है कि ऐसे रूट चुने जाएं, जहां से सबसे ज्यादा प्रवासी बिहार लौटते हैं। साथ ही किराया ऐसा हो, जो आम आदमी की जेब पर भारी न पड़े।

होली के दौरान सबसे ज्यादा परेशानी प्रवासी मजदूरों और छात्रों को होती है। कई बार महीनों पहले ट्रेन टिकट बुक कराने के बावजूद कन्फर्म सीट नहीं मिल पाती। ऐसे में ये फेस्टिवल बसें उनके लिए किसी राहत पैकेज से कम नहीं होंगी। बीएसआरटीसी ने बताया कि चयनित बस पड़ावों पर महिला और पुरुष यात्रियों के लिए स्वच्छ शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। यह सुविधा खासतौर पर परिवार के साथ यात्रा करने वालों और महिलाओं के लिए अहम मानी जा रही है।

ट्रेनों की भीड़ से मिलेगी राहत

परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने साफ कहा है कि होली जैसे बड़े त्योहारों के दौरान ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ हो जाती है। इसका असर न सिर्फ यात्रियों की सुरक्षा पर पड़ता है, बल्कि असुविधा भी बढ़ जाती है।

उनके मुताबिक, सरकार का उद्देश्य है कि लोगों को ट्रेन के अलावा एक भरोसेमंद विकल्प मिले, जिससे वे समय पर और सुरक्षित तरीके से घर पहुंच सकें। फेस्टिवल बसें इसी सोच का हिस्सा हैं।

पिछले साल का अनुभव बना आधार

बीएसआरटीसी ने पिछले वर्ष भी त्योहारी सीजन में 220 अंतरराज्यीय फेस्टिवल बसों का संचालन किया था। उस दौरान बड़ी संख्या में यात्रियों ने इस सुविधा का लाभ उठाया और सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। पिछले अनुभव के आधार पर ही इस बार बसों की संख्या और सुविधाओं को और बेहतर बनाने की योजना बनाई गई है। सरकार मानती है कि जब लोगों को समय पर घर पहुंचने का भरोसा मिलता है, तो त्योहार की खुशी दोगुनी हो जाती है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।