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नालंदा में आदर्श आचार संहिता की उड़ी धज्जियां, रातभर चला बार-बालाओं का डांस, प्रशासन मौन

नालंदा में आदर्श आचार संहिता की उड़ी धज्जियां, रातभर चला बार-बालाओं का डांस, प्रशासन मौन
Nalanda Model Code Violation - बिहार के नालंदा में आचार संहिता की अनदेखी, रातभर चला डांस प्रोग्राम
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Aakash Srivastava
Aakash Srivastava
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नालंदा में आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

बिहार विधानसभा चुनाव के बीच नालंदा जिले के पावापुरी थाना क्षेत्र में प्रशासन की लापरवाही चर्चा में है। साईंडीह गांव में बिना अनुमति रातभर डांस प्रोग्राम चला। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद भी प्रशासन चुप है।

बिना अनुमति हुआ कार्यक्रम, प्रशासन मौन

स्थानीय सूत्रों के अनुसार साईंडीह गांव में आयोजकों ने बिना अनुमति के सांस्कृतिक कार्यक्रम रखा। चुनाव आयोग द्वारा लागू आचार संहिता के बावजूद रातभर बार-बालाओं का डांस चलता रहा। प्रशासन को सूचना मिलने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

घटना का वीडियो फेसबुक और व्हाट्सएप पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में सैकड़ों लोग मौजूद दिखाई दे रहे हैं। मंच पर बार-बालाएं डांस करती दिख रही हैं और आयोजक भीड़ को उत्साहित कर रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बावजूद पुलिस प्रशासन ने अब तक कोई जांच शुरू नहीं की है।

स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी

गांव के कई लोगों ने कहा कि चुनाव के दौरान इस तरह के आयोजन लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मजाक उड़ाते हैं। एक स्थानीय निवासी ने कहा कि “जब आम नागरिक से एक पर्चा चिपकाने पर सवाल होता है, तो इस तरह के कार्यक्रम पर प्रशासन मौन क्यों है?”

चुनाव आयोग की सख्त हिदायतें नज़रअंदाज़

चुनाव आयोग की स्पष्ट गाइडलाइन है कि आचार संहिता लागू होने के बाद किसी भी सार्वजनिक आयोजन के लिए प्रशासनिक अनुमति अनिवार्य है। लेकिन साईंडीह गांव में बिना अनुमति रातभर कार्यक्रम चलना गाइडलाइन की सीधी अवहेलना है।

पुलिस का बचावात्मक रुख

जब मीडिया ने इस मामले पर पावापुरी थाना प्रभारी से बात की, तो उन्होंने कहा कि “हमें इस कार्यक्रम की कोई औपचारिक जानकारी नहीं थी। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।” लेकिन अब तक कोई औपचारिक रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है।

प्रशासन पर उठे सवाल

घटना ने नालंदा प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनावी माहौल में इस तरह की लापरवाही मतदाताओं में गलत संदेश देती है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रशासन प्रभावशाली लोगों के दबाव में निष्क्रिय बना हुआ है।

स्थानीय नेताओं की प्रतिक्रिया

स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने इसे “कानून के प्रति उदासीनता” बताया। एक युवा नेता ने कहा कि “अगर प्रशासन इस पर कार्रवाई नहीं करता, तो जनता का भरोसा कमजोर होगा।”

वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वीडियो की प्रामाणिकता की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि वीडियो में दिख रहे दृश्य और गांव की पहचान स्थानीय लोग साईंडीह से जोड़ रहे हैं।

चुनाव की गरिमा पर असर

ऐसे मामलों से चुनावी माहौल प्रभावित होता है। आचार संहिता का सम्मान लोकतंत्र की नींव है। यदि कानून के प्रति यह उदासीनता जारी रही, तो निष्पक्ष चुनाव की भावना पर असर पड़ेगा।

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