Pappu Yadav Arrest: बिहार की राजनीति में एक बार फिर उबाल देखने को मिल रहा है। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी और उसके बाद अचानक बिगड़ी तबीयत ने पूरे घटनाक्रम को संवेदनशील और विवादित बना दिया है। मामला अब सिर्फ कानून तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मानवता, स्वास्थ्य और सत्ता की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
पटना स्थित मंदिरी आवास से देर रात हुई गिरफ्तारी के बाद पुलिस सांसद को सीधे अस्पताल लेकर गई। यह अपने आप में इस बात का संकेत था कि उनकी सेहत सामान्य नहीं थी। इसके बावजूद जिस तरह से इलाज और कानूनी प्रक्रिया साथ-साथ चली, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
गिरफ्तारी के बाद स्वास्थ्य बना सबसे बड़ा मुद्दा
पुलिस की कार्रवाई के बाद सबसे पहले पप्पू यादव को इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान यानी IGIMS ले जाया गया। बताया गया कि यहां उन्हें लंबे समय तक स्ट्रेचर पर रखा गया और बेड उपलब्ध नहीं कराया गया। यह दावा सांसद के समर्थकों और उनके आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से किया गया।
समर्थकों का कहना है कि जब किसी व्यक्ति की हालत ठीक नहीं है, तो सबसे पहले उसे स्थिर और सम्मानजनक चिकित्सा सुविधा मिलनी चाहिए। लेकिन इस मामले में इलाज को लेकर लापरवाही बरते जाने के आरोप लग रहे हैं।
क्या #PappuYadav को #Patna #Neet #छात्रा के लिए इंसाफ की मांग उठाने की सजा दी जा रही है ??
या
पटना पुलिस कानून के हिसाब से अपना फर्ज निभा रही है ??
– आपको क्या लगता है- #PappuYadav निर्दलीय सांसद , पूर्णिया .. की देर रात गिरफ्तारी का मतलब क्या है???? pic.twitter.com/bTWG9Z01ZN— Romana Isar Khan (@romanaisarkhan) February 7, 2026
IGIMS से PMCH तक, इलाज पर उठते सवाल
IGIMS में प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें आगे की जांच के लिए पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल भेज दिया। PMCH शिफ्ट किए जाने की खबर फैलते ही समर्थकों की चिंता और बढ़ गई। बार-बार अस्पताल बदले जाने को लेकर प्रशासन की मंशा पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
परिजनों का कहना है कि सांसद पहले से अस्वस्थ थे और गिरफ्तारी के तनाव ने उनकी हालत और खराब कर दी। ऐसे में उन्हें पूरी तरह मेडिकल निगरानी में रखा जाना चाहिए था।
तीन दशक पुराना मामला अचानक कैसे उठा
पुलिस के अनुसार, यह गिरफ्तारी वर्ष 1995 में दर्ज एक मामले से जुड़ी है। गर्दनीबाग थाने में दर्ज इस केस में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उनका मकान धोखे से किराए पर लिया गया और उसे सांसद कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किया गया।
पुलिस का कहना है कि अदालत में लगातार पेश न होने के कारण पहले गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। इसके बाद इश्तेहार चस्पा करने और अंत में संपत्ति कुर्की का आदेश दिया गया। इन्हीं आदेशों के तहत यह कार्रवाई की गई।
पप्पू यादव का पुलिस पर गंभीर आरोप
गिरफ्तारी के दौरान पप्पू यादव ने पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उन्हें आशंका थी कि पुलिस उन्हें नुकसान पहुंचा सकती है। उनका दावा है कि वे सीधे अदालत में पेश होने को तैयार थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें थाने ले जाने की कोशिश की।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई पुलिसकर्मी सिविल ड्रेस में थे, जिससे उन्हें लगा कि उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। यह आरोप अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।
राजनीति और बदले की भावना का दावा
सांसद के समर्थकों का कहना है कि यह सिर्फ कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित कदम है। उनका आरोप है कि हाल ही में नीट छात्रा के मामले में आवाज उठाने के बाद पप्पू यादव प्रशासन के निशाने पर आ गए।
इस दावे ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है। विपक्षी दल भी अब इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाने लगे हैं।
कानूनी प्रक्रिया पर भी उठ रहे सवाल
कानूनी जानकारों का कहना है कि इतने पुराने मामले में अचानक तेज कार्रवाई अपने आप में सवाल पैदा करती है। यह भी पूछा जा रहा है कि क्या गिरफ्तारी के समय सांसद की स्वास्थ्य स्थिति को पर्याप्त महत्व दिया गया।
वकीलों का मानना है कि अगर कोई व्यक्ति अस्वस्थ है, तो कानून भी मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की बात करता है।