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अथमलगोला की मनीषा देवी – लोहे की कील के बिछावन पर कलश और निर्जला उपवास से बनीं आस्था का केंद्र

अथमलगोला की मनीषा देवी – लोहे की कील के बिछावन पर कलश और निर्जला उपवास से बनीं आस्था का केंद्र
Athmalgola woman Manisha Devi becomes center of faith with nail bed fast in Bihar | Patna News
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Aryan Ambastha
Aryan Ambastha
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Manisha Devi News Patna: बिहार के पटना ज़िले के बाढ़ अनुमंडल के अथमलगोला प्रखंड के गंजपर गांव में इन दिनों आस्था और कौतूहल का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। गांव की महिला मनीषा देवी नवरात्रि के अवसर पर ऐसी तपस्या कर रही हैं, जिसने आसपास के इलाके में चर्चा और श्रद्धा दोनों को जन्म दिया है।

मनीषा देवी बीते चार दिनों से iron nails के bed पर लेटी हुई हैं। उनके सीने पर एक पवित्र Kalash रखा है और वे बिना अन्न-जल यानी पूर्ण Nirjala fast का पालन कर रही हैं।

Manisha Devi: तपस्या का संकल्प

ग्रामीणों के अनुसार, नवरात्र शुरू होने से पहले ही मनीषा देवी ने अपनी तपस्या की तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने लोहे की कीलों का बिछावन बनवाया और निश्चय किया कि पूरे नौ दिनों तक उसी पर लेटकर निर्जला उपवास करेंगी। गांव के दुर्गा स्थान पर लेटने की अनुमति न मिलने पर उन्होंने सड़क किनारे ही अपनी तपस्या आरंभ कर दी।

श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

उनके इस अद्भुत संकल्प को देखने और आशीर्वाद लेने के लिए आसपास के गांवों से हजारों लोग जुट रहे हैं। महिलाएं उनकी सेवा में लगी रहती हैं—कोई पंखा झलता है तो कोई पैर दबाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह मां दुर्गा का आशीर्वाद है और मनीषा देवी के माध्यम से देवी की शक्ति प्रकट हो रही है।

Athmalgola woman Manisha Devi becomes center of faith with nail bed fast in Bihar
Athmalgola woman Manisha Devi becomes center of faith with nail bed fast in Bihar

“देवताओं का आगमन” और चिलम की मांग

गांव के लोगों का कहना है कि दिन में कई बार अलग-अलग देवता मनीषा देवी के शरीर में आते हैं। जब वे Mahadev के रूप में आती हैं तो Chilam की मांग करती हैं और गांजा पीती हैं। आश्चर्य की बात यह है कि मनीषा देवी सामान्य जीवन में कभी नशे की आदी नहीं रहीं। उनके भाई कल्लू कुमार ने बताया कि “पहले कई जगह उनका झाड़-फूंक कराया गया, लेकिन अब वे खुद देवताओं की इच्छा से चिलम की मांग करती हैं।”

वेब स्टोरी:

नौ दिनों तक कठिन तपस्या

मनीषा देवी ने संकल्प लिया है कि वे पूरे नौ दिनों तक बिना अन्न और जल ग्रहण किए इसी स्थिति में रहेंगी। ग्रामीण इसे अद्भुत तपस्या और मानसिक शक्ति का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि कई लोग इसे divine miracle मानते हुए उनके चरणों में मत्था टेक रहे हैं।

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गांव में माहौल पूरी तरह धार्मिक रंग में रंग गया है। नवरात्रि के इस पर्व पर मनीषा देवी की तपस्या न केवल आस्था का केंद्र बनी है, बल्कि यह चर्चा का विषय भी है कि क्या यह अध्यात्म की शक्ति है या मानसिक दृढ़ता का परिणाम।