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Bihar Assembly Elections 2025: एनडीए में सीटें कम, महागठबंधन में वामदल और वीआईपी का वर्चस्व

Bihar Assembly Elections 2025: एनडीए में सीटें कम, महागठबंधन में वामदल और वीआईपी का वर्चस्व
Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की सीटों में कमी, महागठबंधन में वामदल और वीआईपी का लाभ (file photo)
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Asfi Shadab
Asfi Shadab
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बिहार विधानसभा चुनाव की स्थिति और दोनों गठबंधनों की रणनीति

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नामांकन प्रक्रिया के प्रथम और द्वितीय चरण सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं। इस चुनाव में राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहे हैं। एनडीए और महागठबंधन दोनों ही प्रमुख राजनीतिक गठबंधन अपने-अपने दलों के लिए सीटों के बंटवारे पर गंभीर मंथन कर रहे हैं। एनडीए के सभी दलों की सीटें पिछले चुनाव की तुलना में घट गई हैं, जबकि महागठबंधन में वामदल और वीआईपी को लाभ हुआ है।

एनडीए की सीटों में कमी और कारण

एनडीए में भाजपा और जदयू सहित अन्य दलों की सीटों में कमी का मुख्य कारण आपसी तालमेल की कमी और नए दलों के प्रवेश को माना जा रहा है। भाजपा इस बार 101 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जो पिछली बार की 110 सीटों की तुलना में कम है। जदयू की सीटें 115 से घटकर 101 रह गई हैं। एनडीए में इस बार हम पार्टी को 6 सीटें, रालोमो को 6 और लोजपा (रा) को 29 सीटें मिली हैं।

विशेष रूप से यह देखा गया कि एनडीए के भीतर नए दलों के प्रवेश ने सीटों के पुनर्वितरण को प्रभावित किया है। लोजपा (रा) ने पिछले चुनाव में एनडीए से अलग होकर 134 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन इस बार एनडीए में वापसी के साथ 29 सीटें ही मिली हैं।

महागठबंधन में सीटों का लाभ और कांग्रेस का बलिदान

महागठबंधन में राजद को पिछले चुनाव की तुलना में केवल एक सीट कम मिली है, जो इसे 143 सीटों पर चुनाव लड़ने का अवसर देती है। कांग्रेस ने नौ सीटों का बलिदान किया और इस बार केवल 61 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। वाम दलों के लिए यह चुनाव काफी लाभकारी रहा है। भाकपा-माले की सीटें 19 से बढ़कर 20, सीपीआइ की सीटें 6 से बढ़कर 9 और सीपीएम की सीटें 4 से बढ़कर 6 हो गई हैं।

वीआईपी ने महागठबंधन में रहते हुए इस बार 15 सीटों पर चुनाव लड़ने का अवसर पाया है, जबकि पिछली बार एनडीए के साथ रहते हुए केवल 11 सीटें थीं। इस कारण महागठबंधन की स्थिति मजबूत दिख रही है और राज्य की राजनीति में इसका प्रभाव बढ़ा है।

नए दलों की आमद और राजनीतिक समीकरण

दोनों प्रमुख गठबंधनों में नए दलों के प्रवेश ने बिहार की राजनीतिक तस्वीर को बदल दिया है। एनडीए ने चिराग पासवान की लोजपा (रा) के लिए स्थान सुनिश्चित किया, जबकि महागठबंधन ने मुकेश सहनी की वीआईपी को शामिल किया। दोनों गठबंधन अब अपनी रणनीति पर पुनर्विचार कर रहे हैं ताकि चुनाव में पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति बनाए रखी जा सके।

सीटों का विश्लेषण

एनडीए (2025 बनाम 2020)

  • भाजपा: 101 – 110

  • जदयू: 101 – 115

  • लोजपा: 29 – 134 (एनडीए से अलग)

  • हम: 06 – 07

  • रालोमो: 06 – 104

महागठबंधन (2025 बनाम 2020)

  • राजद: 143 – 144

  • कांग्रेस: 61 – 70

  • भाकपा-माले: 20 – 19

  • वीआईपी: 15 – 11 (एनडीए के साथ)

  • सीपीआइ: 09 – 06

  • सीपीएम: 06 – 04

इस विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि एनडीए के सभी घटक दलों की सीटें घट गई हैं, जबकि महागठबंधन में वामदल और वीआईपी का लाभ हुआ है। आगामी विधानसभा चुनाव में दोनों गठबंधनों को अपनी रणनीति और उम्मीदवार चयन पर गंभीर पुनर्विचार करना होगा।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजनीतिक समीकरण पहले से अधिक जटिल हो गए हैं। एनडीए को अपनी सीटों में कमी के बावजूद संगठन और तालमेल बनाए रखना होगा। वहीं, महागठबंधन वामदल और वीआईपी की मदद से चुनाव में अपने प्रभाव को और मजबूत करने का प्रयास करेगा। यह चुनाव बिहार की राजनीति में नए रुझान और दलों के बीच संतुलन की दिशा निर्धारित करेगा।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।