Rashtra Bharat Logo

प्रशांत किशोर का सियासी प्रहार: ‘राजद ने मुसलमानों को केवल डर दिखाया, भाजपा की दाल अब नहीं गलने वाली’

प्रशांत किशोर का सियासी प्रहार: ‘राजद ने मुसलमानों को केवल डर दिखाया, भाजपा की दाल अब नहीं गलने वाली’
aBihar Politics – प्रशांत किशोर का भाजपा और राजद पर करारा प्रहार, कहा बदलाव ही अब समाधान (File Photo)
Updated:
·by
Asfi Shadab
Asfi Shadab
Share:

विषयसूची

पूर्णिया में प्रशांत किशोर का सियासी संदेश: ‘जात-पात से ऊपर उठकर बच्चों के भविष्य के लिए वोट करें’

पूर्णिया। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (पीके) ने बिहार की राजनीति में फिर हलचल मचा दी है। आगामी विधानसभा चुनाव के प्रचार के तहत उन्होंने पूर्णिया, बायसी और अमौर में विशाल रोड शो और नुक्कड़ सभाएँ कीं।
इस दौरान उन्होंने भाजपा और राजद दोनों दलों पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि बिहार की जनता अब परिवर्तन के मूड में है और उसे जात-पात की राजनीति नहीं, अपने बच्चों का भविष्य चाहिए।


भाजपा पर तीखा हमला: ‘डर और दमन से सरकार नहीं चलती’

प्रशांत किशोर ने भाजपा सरकार पर सीधा वार करते हुए कहा कि “सरकार चाहे जितनी एसआईआर या एफआईआर करवा ले, जब जनता उसके खिलाफ हो जाती है, तो कोई ताकत उसे नहीं बचा सकती।”
उन्होंने कहा कि बिहार में सरकार ने अनेक एसआईआर दर्ज कराईं, पर जनता के मन का निर्णय किसी कागज या धमकी से नहीं बदलता।

पीके ने चुनौती भरे स्वर में कहा —

“भाजपा जितनी जुगत लगा ले, इस बार उसकी दाल नहीं गलने वाली। 12 राज्यों में केस दर्ज करने के बावजूद लोगों का मूड नहीं बदला। अगर भाजपा सोचती है कि डर और दमन से जनता को अपने पक्ष में रख लेगी, तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल है।”

उन्होंने बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि “भाजपा ने वहां भी पूरी ताकत झोंकी, पर जनता ने नकार दिया। बिहार में भी वही दोहराया जाएगा।”


राजद पर निशाना: ‘30 सालों से मुसलमानों को सिर्फ डर दिखाया गया’

प्रशांत किशोर ने लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा,

“राजद ने 30 सालों से मुसलमानों को केवल भाजपा का डर दिखाकर वोट लिया है। लालटेन का केरोसीन मुसलमान जला रहे हैं और रोशन लालूजी का घर हो रहा है।”

पीके ने आगे कहा कि जन सुराज की सोच साफ है —

“भाजपा से नहीं, अल्लाह से डरिए और अपने हक की बात कीजिए।”


अब जात-पात और धर्म नहीं, बच्चों का भविष्य हो मुद्दा

अपने संबोधन में प्रशांत किशोर ने जनता से भावुक अपील की —

“तीन साल से समझा रहा हूँ, अगर बदलाव चाहिए तो बदलाव का बटन दबाइए। वरना अगले पाँच साल तक गरीबी और बदहाली बनी रहेगी।”

उन्होंने कहा कि छठ पर्व पर लाखों बिहारी प्रवासी मजदूरों की स्थिति देखकर मन व्यथित होता है।
“80 लाख से अधिक लोग ट्रेन और बसों में धक्के खाकर घर लौटते हैं, और फिर उसी व्यवस्था को वोट देते हैं जिसने उन्हें पलायन के लिए मजबूर किया। जो बोएंगे वही काटेंगे,” पीके ने कहा।


अब बिहार को नई सोच की ज़रूरत

पीके ने कहा कि अब बिहार के लोगों को तय करना है कि वे जात-पात और धर्म की राजनीति में उलझे रहेंगे या अपने बच्चों की पढ़ाई, रोज़गार और विकास के लिए वोट देंगे।
उन्होंने जनता से कहा —

“बस एक बार अपने बच्चों के लिए वोट करें। अगर अब भी नहीं बदले, तो अगले पाँच साल भी आंसू बहाने पड़ेंगे।”


जनता का अपार उत्साह, रोड शो में उमड़ा सैलाब

पूर्णिया, बायसी और अमौर में पीके के रोड शो में भारी भीड़ उमड़ी। जगह-जगह लोगों ने ढोल-नगाड़ों, फूल-मालाओं और नारेबाज़ी के साथ उनका स्वागत किया।
लोगों ने “जन सुराज ज़िंदाबाद” और “बदलाव का बटन दबाओ” जैसे नारे लगाए।
इस जनसंपर्क अभियान ने स्पष्ट कर दिया कि प्रशांत किशोर अब केवल रणनीतिकार नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक सशक्त विकल्प बन चुके हैं।


बदलाव की आहट

पूर्णिया से शुरू हुई यह सियासी यात्रा अब बिहार के अन्य जिलों में भी गूंजने लगी है।
प्रशांत किशोर का संदेश साफ है

“अगर अब भी बिहार नहीं बदला, तो आने वाली पीढ़ियाँ भी उसी बदहाली में जिएंगी।”

उनका यह वक्तव्य न केवल एक राजनीतिक चुनौती, बल्कि जन-जागरण का आह्वान भी बन गया है।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।

Asfi Shadab

Asfi Shadab

असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।