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Bihar Chunav: चुनावी प्रचार में सोशल मीडिया का प्रभुत्व, रील और लोकगीत से मतदाताओं को रिझाने की होड़

Bihar Chunav: चुनावी प्रचार में सोशल मीडिया का प्रभुत्व, रील और लोकगीत से मतदाताओं को रिझाने की होड़
Election Campaign Social Media Reels Lokgeet - चुनावी प्रचार में सोशल मीडिया और लोकगीत का प्रभाव
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Asfi Shadab
Asfi Shadab
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चुनाव प्रचार का नया रूप

पूर्णिया। समय के साथ चुनाव प्रचार का स्वरूप पूरी तरह बदल रहा है। अब प्रत्याशी केवल जनसंपर्क और रोड शो तक सीमित नहीं रह गए हैं। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रचार की नई शैली ने इस क्षेत्र में आम जनमानस तक पहुंचने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। खासकर युवा मतदाता और महिला वर्ग को आकर्षित करने के लिए चुनावी अभियान में रील (Reel) और लोकगीत का व्यापक उपयोग हो रहा है।

सोशल मीडिया रील का बढ़ता प्रभाव

वर्तमान चुनावी माहौल में रील का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। प्रतिद्वंदी दलों के प्रत्याशी अपने चुनाव प्रचार की रचनात्मकता को दिखाने के लिए रील के माध्यम से भोजपुरी गानों, छठ गीतों और लोकगीतों का भरपूर उपयोग कर रहे हैं। उदाहरण के लिए हाल ही में चर्चित भोजपुरी गीत “जेका बाघ का करेजा देकर ऊपर वाला भेजा” का रील बनाकर प्रचार में इस्तेमाल किया जा रहा है।

प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से यह रील मतदाताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ने का माध्यम बन रहा है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र में लोकगीत और छठ गीतों का प्रयोग अधिक प्रभावशाली साबित हो रहा है।

युवाओं और महिलाओं पर विशेष ध्यान

चुनावी रणनीतियों में युवाओं और महिलाओं पर विशेष फोकस देखा जा रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रील, वीडियो और लाइव सत्र के माध्यम से मतदाताओं को सीधे प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। इस प्रक्रिया में प्रत्याशी और उनके कार्यकर्ता सोशल मीडिया चैनलों के माध्यम से संदेश भेज रहे हैं, ताकि मतदाता उनके विचार और नीतियों से जुड़ सकें।

लोकगीत और छठ गीत का चुनावी उपयोग

पूर्णिया जिले में आस्था और परंपरा का महत्व देखते हुए, चुनावी प्रचार में छठ गीतों का विशेष महत्व है। प्रत्येक दल और प्रत्याशी इस अवसर का लाभ उठाकर स्थानीय लोकगीतों और भक्ति गीतों के माध्यम से मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ा रहे हैं। यह न केवल भावनात्मक जुड़ाव पैदा करता है, बल्कि ग्रामीण मतदाता वर्ग के बीच प्रत्याशी की लोकप्रियता भी बढ़ाता है।

जनसंपर्क और लाइव बैठकों का संयोजन

डिजिटल प्रचार के साथ-साथ प्रत्यक्ष जनसंपर्क भी जारी है। उम्मीदवार कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें आयोजित कर रहे हैं और उन्हें लाइव प्रसारित कर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं। इससे मतदाताओं को यह भरोसा मिलता है कि उम्मीदवार उनके मुद्दों को गंभीरता से सुन रहे हैं और कार्यवाही कर रहे हैं।

चुनावी प्रचार का नया दौर

इस प्रकार, सोशल मीडिया, रील, लोकगीत और लाइव बैठकों का संयोजन चुनाव प्रचार के एक नए युग का संकेत दे रहा है। कैमरा, दृश्य फोकस और प्रचार के रंग को प्रभावी ढंग से दिखाने की यह होड़ मतदाताओं को कितना आकर्षित कर पाएगी, यह चुनाव परिणाम के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन इतना तय है कि डिजिटल और पारंपरिक माध्यमों के इस संयुक्त प्रयास से प्रचार की शैली पहले से अधिक सजीव और आकर्षक बन गई है।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।