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बस्तर की संस्कृति को नया जीवन दे रही छत्तीसगढ़ सरकार, पांच साल में बनेगा विकसित बस्तर

बस्तर की संस्कृति को नया जीवन दे रही छत्तीसगढ़ सरकार, पांच साल में बनेगा विकसित बस्तर
Bastar Culture Revival: छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर की संस्कृति को दे रही नया जीवन (Image source: dprcg)

Bastar Culture Revival: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर पंडुम समापन पर कहा कि बस्तर भारत की संस्कृति का आभूषण है। छत्तीसगढ़ सरकार यहां की परंपरा को नया जीवन दे रही है। 53 हजार से अधिक कलाकारों ने 12 विधाओं में प्रदर्शन किया। मार्च 2026 तक माओवाद समाप्त होगा। बस्तर में औद्योगिक क्षेत्र, सिंचाई परियोजना और पर्यटन विकास की घोषणा की गई।

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Asfi Shadab
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बस्तर छत्तीसगढ़ का एक ऐसा क्षेत्र है जो अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहां की आदिवासी संस्कृति सदियों पुरानी है और इसे संजोकर रखने का काम यहां के लोगों ने किया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर पंडुम 2026 के समापन समारोह में कहा कि बस्तर भारत की संस्कृति का आभूषण है। छत्तीसगढ़ सरकार इस संस्कृति को नए प्राण देने का काम कर रही है। जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम में 53 हजार से अधिक लोक कलाकारों ने 12 विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

बस्तर पंडुम की महत्ता और सांस्कृतिक पहचान

बस्तर पंडुम केवल एक कार्यक्रम नहीं है बल्कि यह बस्तर की पहचान का उत्सव है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि माता दंतेश्वरी से ही बस्तर की पहचान है। इस आयोजन में बस्तर संभाग के सात जिलों की 32 जनपद पंचायतों और 1885 ग्राम पंचायतों के कलाकारों ने भाग लिया। यहां की संस्कृति, खान-पान, वेशभूषा, स्थानीय साहित्य, लोकनृत्य, गीत, शिल्प, बस्तरिया पेय, औषधि, चित्रकला, वाद्ययंत्र और नाटक की विधाओं का प्रदर्शन हुआ। प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले कलाकारों को राजधानी दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किया जाएगा जहां वे अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।

Bastar Culture Revival: छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर की संस्कृति को दे रही नया जीवन
Bastar Culture Revival: छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर की संस्कृति को दे रही नया जीवन (Image source: dprcg)

धरती आबा योजना से आदिवासी विरासत का संरक्षण

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि बस्तर जैसी संस्कृति विश्व के किसी देश में नहीं है। इसे प्रभु श्री राम के समय से संजोकर यहां के लोगों ने बनाए रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की 700 से अधिक जनजातियों की आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक विरासतों को पुनर्जीवित करने के लिए धरती आबा योजना और पीएम जनमन योजना जैसी अनेक योजनाएं लागू की हैं। इन योजनाओं से आदिवासी समुदाय को उनकी परंपराओं को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है। छत्तीसगढ़ सरकार भी इस दिशा में लगातार काम कर रही है।

Bastar Culture Revival: छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर की संस्कृति को दे रही नया जीवन
Bastar Culture Revival: छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर की संस्कृति को दे रही नया जीवन (Image source: dprcg)

माओवाद उन्मूलन की दिशा में ठोस कदम

अमित शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमारी लड़ाई किसी से नहीं बल्कि यहां की भोली-भाली आदिवासी जनता को सुरक्षा देना है। माओवाद उन्मूलन की समय सीमा अभी भी वही है। जवानों के अदम्य साहस और बहादुरी से 31 मार्च 2026 तक माओवाद को घुटने टेकने पड़ेंगे। उन्होंने प्रदेश में संचालित की जा रही नक्सल पुनर्वास नीति की सराहना की। पुनर्वास केंद्रों में नक्सलियों को रोजगारमूलक और सृजनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। जो लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनका सम्मान के साथ पुनर्वास किया जा रहा है।

Bastar Culture Revival: छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर की संस्कृति को दे रही नया जीवन
Bastar Culture Revival: छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर की संस्कृति को दे रही नया जीवन (Image source: dprcg)

नियद नेल्ला नार योजना से गांवों का विकास

नियद नेल्ला नार यानी आपका अच्छा गांव योजना के तहत प्रदेश सरकार लगातार माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्य कर रही है। सड़क, पुल, पुलिया, मोबाइल टॉवर स्थापित करने के साथ-साथ राशन वितरण, शुद्ध पेयजल, आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड बनाने का काम किया जा रहा है। बस्तर संभाग के माओवाद प्रभावित गांवों में जहां विकास कोसों दूर था, वहां के 40 गांवों में स्कूल फिर से खोले गए हैं। अब वहां गोलियों की आवाज की जगह स्कूल की घंटियां सुनाई देती हैं। यह बदलाव बस्तर के नए भविष्य की तस्वीर है।

औद्योगिक विकास और ऊर्जा परियोजनाएं

केंद्रीय गृहमंत्री ने मंच से कई बड़ी घोषणाएं कीं। बस्तर जिले में 118 एकड़ में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किया जाएगा। पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले में दो लाख 75 हजार एकड़ में सिंचाई के लिए 220 मेगावॉट बिजली उत्पादन का काम शीघ्र शुरू किया जाएगा। इससे यहां के किसानों को सिंचाई सुविधा मिलेगी और बिजली की समस्या भी दूर होगी। दूरस्थ अंचलों को मुख्यालयों से जोड़ने के लिए रेल परियोजनाओं और नदी जोड़ो परियोजना को विस्तार दिया जाएगा।

पर्यटन के क्षेत्र में बस्तर का उदय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में बस्तर तेजी से आगे बढ़ रहा है। धुड़मारास गांव को संयुक्त राष्ट्र द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव घोषित किया जाना गर्व की बात है। ईको टूरिज्म, होम-स्टे, ट्रेकिंग जैसे पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार सतत प्रयत्नशील है। इससे बस्तर ही नहीं छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और सभ्यता की जानकारी पर्यटकों को मिल सकेगी। देश-विदेश से पर्यटक यहां आकर्षित होंगे और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।

बस्तर की बदलती तस्वीर

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले बस्तर की चर्चा देश भर में माओवादी के नाम से होती थी, लेकिन अब बस्तर की संस्कृति, पर्यटन और समृद्ध विरासत की चर्चा होने लगी है। बस्तर की सुंदर धरती लंबे समय तक नक्सलवाद की पीड़ा से गुजरी है। गौर, माड़िया, मुरिया, भतरा, धुरवा, गोंड जैसे विभिन्न नृत्य की लय धीमी पड़ गई थी, मांदर की थाप खामोश हो गई थी। लेकिन आज बस्तर बदल रहा है। यहां तरक्की की एक नई सुबह देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रही है।

पुलिस और सुरक्षा बलों का योगदान

मुख्यमंत्री ने पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने घने जंगलों में, विपरीत परिस्थितियों में, अपनी जान की परवाह किए बिना नक्सलवाद पर कड़ा प्रहार किया है। उनकी बहादुरी की वजह से ही आज बस्तर में शांति और विकास का माहौल बन पाया है। आत्मसमर्पण नीति को और अधिक मानवीय और संवेदनशील बनाया गया है। जो लोग हिंसा का रास्ता छोड़ना चाहते हैं, उन्हें सम्मान के साथ समाज की मुख्यधारा में लाया जा रहा है।

समाज-नेतृत्व वाला आयोजन

उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने बस्तर पंडुम को समाज-नेतृत्व वाला आयोजन बताया। उन्होंने कहा कि इसके असली सूत्रधार मांझी-चालकी, गयाता और पुजारी जैसे पारंपरिक समाज प्रमुख हैं। उनके सहयोग से ही बस्तर पंडुम का आयोजन सफल हुआ। छेरछेरा पंडुम, तिहार और विजा पंडुम जैसे पारंपरिक उत्सव जनजातीय जीवन, प्रकृति और कृषि से जुड़ी अमूल्य परंपराएं हैं। पिछले कुछ वर्षों में बस्तर के दूरस्थ और उपेक्षित क्षेत्रों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और राष्ट्रीय ध्वज की उपस्थिति पहुंची है।

संस्कृति और पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने बस्तर पंडुम 2026 के उद्देश्य और 12 विधाओं में भाग लेने वाले कलाकारों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह आयोजन बस्तर की समृद्ध संस्कृति को देश-विदेश तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। इस अवसर पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप, पद्म श्री अजय मंडावी, बुधरी ताती, हेमचंद मांझी, पंडीराम मांझी, सांसद भोजराज नाग, बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लता उसेंडी सहित कई जनप्रतिनिधि, गायता, पुजारी, मांझी-चालकी, बस्तर पंडुम के कलाकार, महापौर संजय पांडे, कमिश्नर डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पी, कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

बस्तर अब संभावनाओं की भूमि बन चुका है। यह नए भारत का नया बस्तर है। प्रधानमंत्री के प्रयासों से बस्तर के विकास की चर्चा देश भर में हो रही है। पांच साल में बस्तर पूरी तरह विकसित बनेगा और यहां की आदिवासी संस्कृति देश-दुनिया में अपनी पहचान बनाएगी।

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।