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भारत में AI क्रांति का नया अध्याय: दिल्ली में शुरू हुआ ऐतिहासिक AI इम्पैक्ट समिट

AI Impact Summit 2026 In New Delhi: नई दिल्ली में शुरू हुआ वैश्विक AI सम्मेलन, 100 देश हुए शामिल
AI Impact Summit 2026 In New Delhi: नई दिल्ली में शुरू हुआ वैश्विक AI सम्मेलन, 100 देश हुए शामिल (File Photo)

AI Impact Summit 2026 In New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में AI इम्पैक्ट समिट 2026 का उद्घाटन किया। यह ग्लोबल साउथ में पहला AI समिट है जिसमें 100 देशों के प्रतिनिधि, 20 विश्व नेता और Google तथा OpenAI के CEO शामिल हैं। थीम "सर्वजन हिताय" के साथ यह समिट भारत की वैश्विक AI नेतृत्व की क्षमता को दर्शाता है।

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AI Impact Summit 2026 In New Delhi: नई दिल्ली में सोमवार को एक ऐतिहासिक घटना हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम में AI इम्पैक्ट समिट 2026 का उद्घाटन किया। यह पहली बार है जब कोई ग्लोबल साउथ देश इतने बड़े AI सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।

ग्लोबल साउथ में पहली बार AI समिट

भारत ने इतिहास रच दिया है। यह पहला मौका है जब ग्लोबल साउथ के किसी देश में AI पर वैश्विक शिखर सम्मेलन हो रहा है। ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया और फ्रांस के बाद भारत चौथा देश बन गया है जो इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की मेजबानी कर रहा है। पांच दिन तक चलने वाले इस समिट में 100 से अधिक देशों को बुलाया गया है और दो लाख से ज्यादा लोगों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि दुनिया को AI पर चर्चा के लिए एक साथ लाना एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि भारत AI बदलाव की अगली कतार में खड़ा है और यह समिट इसका सबूत है।

विश्व नेताओं का जमावड़ा

इस समिट में लगभग 20 देशों के राष्ट्रप्रमुख हिस्सा ले रहे हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा, स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज, स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन, नीदरलैंड के प्रधानमंत्री डिक शूफ और UAE के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान शामिल हैं।

इसके अलावा मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ नवीनचंद्र रामगुलाम, श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायक, सेशेल्स के उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिले और भूटान के प्रधानमंत्री त्शेरिंग टोबगे भी मौजूद हैं। विदेश मंत्रालय ने बताया कि बोलीविया, क्रोएशिया, एस्टोनिया, फिनलैंड, ग्रीस, गुयाना, कजाकिस्तान, लिकटेंस्टीन, सर्बिया और स्लोवाकिया के नेता भी इसमें भाग ले रहे हैं।

45 से ज्यादा देशों के मंत्री स्तर के प्रतिनिधिमंडल आए हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी भी चर्चा में शामिल होंगे।

टेक कंपनियों के बड़े नाम भी शामिल

Google के CEO सुंदर पिचाई और OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन जैसे तकनीकी दिग्गज भी इस कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं। यह दिखाता है कि भारत अब सिर्फ AI का इस्तेमाल करने वाला देश नहीं, बल्कि इसकी दिशा तय करने वाला देश बनना चाहता है।

इतने बड़े स्तर पर उद्योग जगत के लोगों की मौजूदगी यह साबित करती है कि भारत में AI के क्षेत्र में निवेश और विकास की बड़ी संभावनाएं हैं।

सर्वजन हिताय का संदेश

इस समिट की थीम है “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” यानी सभी का भला, सभी की खुशी। यह संस्कृत का एक सूत्र है जो भारत की सोच को दर्शाता है। यहां यह संदेश दिया जा रहा है कि AI सिर्फ अमीर लोगों या बड़ी कंपनियों के लिए नहीं होनी चाहिए। इसका फायदा आम लोगों तक पहुंचना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत का AI में कदम महत्वाकांक्षा और जिम्मेदारी दोनों को दर्शाता है। उनका कहना है कि तकनीक का विकास करते समय नैतिकता और मानवीय मूल्यों को नहीं भूलना चाहिए।

तीन सूत्र और सात चक्र

यह समिट तीन मुख्य सूत्रों पर आधारित है – लोग, धरती और प्रगति। इन तीन सिद्धांतों के आधार पर ही AI के भविष्य की योजना बनाई जा रही है। समिट में सात चक्र या वर्किंग ग्रुप बनाए गए हैं जो अलग-अलग विषयों पर चर्चा करेंगे।

ये सात चक्र हैं – मानव पूंजी, समावेशन और सामाजिक सशक्तिकरण, सुरक्षित और भरोसेमंद AI, विज्ञान, लचीलापन, नवाचार और दक्षता, AI संसाधनों का लोकतंत्रीकरण, और आर्थिक विकास और सामाजिक भलाई के लिए AI। हर चक्र में विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे और ठोस सुझाव देंगे।

इंडिया AI एक्सपो 2026

प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को ही “इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026” का भी उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी में 13 देशों के पैवेलियन लगाए गए हैं। यहां भारत की AI में उपलब्धियों और क्षमताओं को दिखाया जा रहा है।

यह प्रदर्शनी विदेशी कंपनियों और निवेशकों को भारत की AI ताकत से परिचित कराने का मौका है। इससे भविष्य में भारत में निवेश बढ़ सकता है और नई तकनीकी साझेदारी बन सकती है।

दिल्ली की सड़कों पर भी असर

समिट के कारण दिल्ली में यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने रविवार को एडवाइजरी जारी करके बताया कि भैरों मार्ग, सुब्रमण्यम भारती मार्ग, राजेश पायलट मार्ग और केंद्रीय दिल्ली के कई अन्य रास्तों पर यातायात सीमित रहेगा।

यह CBSE की कक्षा 10 और 12 की परीक्षाओं के साथ भी मेल खा रहा है जो मंगलवार से शुरू हो रही हैं। हालांकि आम लोगों को कुछ परेशानी हो सकती है, लेकिन यह कार्यक्रम भारत के लिए लंबे समय में फायदेमंद साबित हो सकता है।

भारत की बढ़ती साख

G-20 की सफल मेजबानी के बाद यह दूसरा बड़ा अंतरराष्ट्रीय आयोजन है जिसे भारत ने संभाला है। इससे साफ होता है कि भारत अब वैश्विक मुद्दों पर नेतृत्व करने की स्थिति में है। AI जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा का मंच बनना भारत की बढ़ती साख का प्रमाण है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार यह समिट भारत को वैश्विक AI एजेंडा तय करने वाले देशों में शामिल करेगा। भारत सिर्फ भागीदार नहीं बल्कि आयोजक और मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहा है।

चुनौतियां भी हैं सामने

AI Impact Summit 2026 In New Delhi: हालांकि इस समिट से उम्मीदें बहुत हैं, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि AI का फायदा गांव-देहात तक कैसे पहुंचेगा। अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के पास इंटरनेट और स्मार्टफोन की सुविधा नहीं है।

डेटा की सुरक्षा एक और बड़ा मुद्दा है। भारत में अभी तक मजबूत डेटा संरक्षण कानून नहीं हैं। AI के लिए जरूरी कंप्यूटिंग पावर और बुनियादी ढांचे में भारी निवेश की जरूरत है। साथ ही भारतीय AI विशेषज्ञों का विदेश जाना भी एक समस्या है।

भविष्य की राह

16 से 20 फरवरी तक चलने वाला यह सम्मेलन भारत के AI इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। अगर भारत वाकई “सर्वजन हिताय” के सिद्धांत को अमल में लाता है तो यह सिर्फ तकनीकी ताकत नहीं बल्कि नैतिक नेतृत्व की मिसाल भी बनेगा।

यह समिट भारत के लिए अपनी क्षमता दिखाने का मौका है। दुनिया देख रही है कि भारत AI के क्षेत्र में क्या योगदान दे सकता है। इस अवसर का सही इस्तेमाल करके भारत वैश्विक AI नीतियों में अपनी अहम भूमिका बना सकता है।


नोट: यह लेख भारत AI इम्पैक्ट समिट 2026 के पहले दिन की रिपोर्टिंग पर आधारित है।

 

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।