Rashtra Bharat Logo

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण पर जताई गहरी चिंता, कहा स्थिति अत्यंत गंभीर और वर्चुअल सुनवाई की सलाह

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण पर जताई गहरी चिंता, कहा स्थिति अत्यंत गंभीर और वर्चुअल सुनवाई की सलाह
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण पर जताई गहरी चिंता, कहा स्थिति अत्यंत गंभीर और वर्चुअल सुनवाई की सलाह (File Photo)

दिल्ली में वायु प्रदूषण ने खतरनाक स्तर पार कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति को “बहुत गंभीर” बताते हुए अधिवक्ताओं से वर्चुअल सुनवाई का आग्रह किया। कई इलाकों में AQI 450 के पार पहुंचा। अदालत ने केंद्र और राज्यों को प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की चेतावनी दी।

Updated:
·by
Asfi Shadab
Asfi Shadab
Share:

विषयसूची

दिल्ली में प्रदूषण संकट पर सुप्रीम कोर्ट की गंभीर टिप्पणी

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एक बार फिर जहरीली हवा की गिरफ्त में है। लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण ने लोगों का सांस लेना मुश्किल कर दिया है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि “स्थिति बहुत गंभीर है।” कोर्ट ने सभी अधिवक्ताओं से आग्रह किया कि वे शारीरिक रूप से अदालत में उपस्थित होने के बजाय वर्चुअल सुनवाई की सुविधा का उपयोग करें।

अदालत में कपिल सिब्बल और जस्टिस नरसिम्हा के बीच संवाद

सुनवाई के दौरान जब वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल अदालत में उपस्थित हुए, तो जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा ने कहा, “स्थिति बहुत गंभीर है! आप सभी यहाँ क्यों उपस्थित हैं? हमारे पास वर्चुअल सुनवाई की सुविधा है, कृपया इसका लाभ उठाएँ। यह प्रदूषण स्थायी नुकसान पहुँचा सकता है।” इस पर कपिल सिब्बल ने जवाब दिया, “हम मास्क का उपयोग कर रहे हैं।” इसके उत्तर में न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा, “मास्क भी पर्याप्त नहीं हैं। यह पर्याप्त सुरक्षा नहीं देगा।”

दिल्ली में एक्यूआई गंभीर श्रेणी में, कई क्षेत्र हुए प्रभावित

वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार “गंभीर श्रेणी” में बना हुआ है। गुरुवार को दिल्ली के कई क्षेत्रों में AQI खतरनाक स्तर पर पहुंच गया।

  • बुराड़ी – 433

  • चांदनी चौक – 455

  • आनंद विहार – 431

  • मुंडका – 438

  • पूसा – 302

  • बवाना – 460

  • वजीरपुर – 452

मंगलवार को दिल्ली का समग्र AQI 428 दर्ज किया गया था, जो दिसंबर 2024 के बाद पहली बार “गंभीर” स्तर पर पहुंचा था।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की सख्त कार्रवाई

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने बढ़ते प्रदूषण के मद्देनज़र पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में “GRAP चरण-III” के तहत 9-सूत्रीय कार्ययोजना को तत्काल प्रभाव से लागू किया है। इसमें निर्माण गतिविधियों पर रोक, स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाओं का विकल्प और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने जैसे उपाय शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट की अन्य पीठ भी प्रदूषण पर रख रही नज़र

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के कारणों पर लगातार सुनवाई कर रही है। इस दौरान पंजाब और हरियाणा सरकारों से पराली जलाने पर नियंत्रण के लिए की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई है। पराली जलाना उत्तर भारत के प्रदूषण का एक प्रमुख कारण माना जाता है, जिससे दिल्ली और आसपास के राज्यों में हवा की गुणवत्ता तेजी से गिरती है।

राजधानी में सांस लेना हुआ कठिन

दिल्ली में प्रदूषण का स्तर इस कदर बढ़ गया है कि आम नागरिकों को अब सुबह-सुबह आंखों में जलन, खांसी और गले में खराश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कई अस्पतालों में सांस और फेफड़ों की बीमारियों के मामलों में इजाफा हुआ है।

सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी

राजधानी के पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि केवल वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग या अदालत के निर्देश पर्याप्त नहीं होंगे, जब तक कि राज्य सरकारें मिलकर स्थायी समाधान नहीं निकालतीं। पराली जलाना, डीजल वाहनों का अधिक उपयोग, और निर्माण धूल इस समस्या की मुख्य जड़ हैं।

अदालत की चेतावनी और आगे की दिशा

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि यदि वायु प्रदूषण की स्थिति और बिगड़ती है तो वह दिल्ली सरकार, केंद्र और पड़ोसी राज्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने पर विचार करेगा। न्यायालय ने यह भी कहा कि प्रदूषण अब एक मौसमी नहीं बल्कि स्थायी आपदा बनता जा रहा है, जिसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों तक रहेगा।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।
Asfi Shadab

Asfi Shadab

असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।