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Delhi Blast: अल-फलाह विश्वविद्यालय में बर्खास्त प्रोफेसर की नियुक्ति ने बढ़ाई जांच की रफ्तार

Delhi Blast: अल-फलाह विश्वविद्यालय में बर्खास्त प्रोफेसर की नियुक्ति ने बढ़ाई जांच की रफ्तार
Delhi Blast: अल-फलाह विश्वविद्यालय में बर्खास्त प्रोफेसर की नियुक्ति ने बढ़ाई जांच की रफ्तार (File Photo)

दिल्ली धमाके की जांच में एनआईए ने फरीदाबाद के अल-फलाह विश्वविद्यालय को जांच के दायरे में लिया है। विश्वविद्यालय ने उस प्रोफेसर को नियुक्त किया था, जिसे जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने आतंकवादी संगठनों से संबंध के आरोप में बर्खास्त किया था। यह मामला अब राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

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Asfi Shadab
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Delhi Blast: अल-फलाह विश्वविद्यालय में बर्खास्त प्रोफेसर की नियुक्ति से उठे सवाल

नई दिल्ली। दिल्ली के लाल किला क्षेत्र में हुए हालिया धमाके की जांच ने नया मोड़ ले लिया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने इस मामले में कई अहम संस्थानों को अपने दायरे में लिया है, जिनमें हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। जांच में पता चला है कि विश्वविद्यालय ने उस प्रोफेसर को नियुक्त किया था, जिसे जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने आतंकवादी संगठनों से कथित संबंध के चलते सेवा से बर्खास्त किया था।

एनआईए की जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

एनआईए सूत्रों के अनुसार, यह खुलासा दिल्ली धमाके की जांच के दौरान हुआ जब एजेंसी ने संदिग्ध संपर्कों और नियुक्तियों की जांच शुरू की। बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालय के चिकित्सा विभाग में कार्यरत डॉ. निसार-उल-हसन को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने संविधान के अनुच्छेद 311(2)(सी) के तहत बर्खास्त किया था। यह अनुच्छेद राज्य की सुरक्षा के मद्देनजर सरकार को बिना विभागीय जांच के किसी लोक सेवक को बर्खास्त करने की अनुमति देता है।

प्रोफेसर की पृष्ठभूमि और पूर्व पदस्थापन

डॉ. निसार-उल-हसन पहले श्रीनगर के श्री महाराजा हरि सिंह (एसएमएचएस) अस्पताल में मेडिसिन विभाग में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थे। वर्ष 2023 में जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया था, क्योंकि खुफिया रिपोर्टों के अनुसार उनके कुछ संपर्क आतंकवादी समूहों से जुड़े पाए गए थे।

21 नवंबर 2023 को जारी आदेश में उपराज्यपाल कार्यालय ने यह स्पष्ट किया था कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निसार-उल-हसन की गतिविधियां “राज्य की सुरक्षा के लिए हानिकारक” पाई गईं, जिसके चलते उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा से हटा दिया गया।

अल-फलाह विश्वविद्यालय ने दी नियुक्ति, जांच के घेरे में संस्था

बर्खास्तगी के बाद भी डॉ. हसन को अल-फलाह विश्वविद्यालय, फरीदाबाद में प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया। यह विश्वविद्यालय हरियाणा का एक निजी शैक्षणिक संस्थान है, जो चिकित्सा, प्रौद्योगिकी और प्रबंधन के क्षेत्रों में शिक्षा प्रदान करता है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक ऐसे व्यक्ति को नियुक्त करने से पहले पृष्ठभूमि की पूरी जांच क्यों नहीं की, जिसे जम्मू-कश्मीर सरकार ने सुरक्षा कारणों से सेवा से हटाया था।

विश्वविद्यालय प्रशासन की सफाई

Delhi Blast: विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने प्रोफेसर को उनकी योग्यता और अनुभव के आधार पर नियुक्त किया था, और उन्हें उनकी बर्खास्तगी की पृष्ठभूमि की पूरी जानकारी नहीं थी। प्रशासन ने कहा कि यदि एनआईए या अन्य जांच एजेंसी किसी भी प्रकार की अनियमितता पाती है, तो वे पूरी तरह सहयोग करेंगे।

एनआईए ने बढ़ाई जांच की रफ्तार

इस खुलासे के बाद एनआईए ने फरीदाबाद स्थित विश्वविद्यालय से कई दस्तावेज मांगे हैं। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं यह नियुक्ति किसी संगठित नेटवर्क के तहत तो नहीं की गई।
सूत्रों के मुताबिक, विश्वविद्यालय के कुछ अधिकारियों से पूछताछ भी की जा सकती है। साथ ही, प्रोफेसर के संपर्कों और हाल के वर्षों में उनकी गतिविधियों की विस्तृत जांच की जा रही है।

सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

दिल्ली धमाके के बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। जांच अधिकारी इस मामले को एक “संवेदनशील सुरक्षा लिंक” के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है कि ऐसे मामलों में शैक्षणिक संस्थानों की लापरवाही गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।

यह पूरा मामला इस बात की ओर संकेत करता है कि नियुक्तियों में सुरक्षा से जुड़ी जांच प्रक्रिया को और सख्त करने की आवश्यकता है। यदि एनआईए की जांच में आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह न केवल अल-फलाह विश्वविद्यालय की साख पर सवाल उठाएगा, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों की भर्ती प्रक्रिया पर भी गहरा प्रभाव डालेगा।

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।