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दिल्ली धमाका: तुर्किये से लेकर कानपुर तक फैला आतंकी जाल, NIA की जांच ने खोले कई देशों के कनेक्शन

दिल्ली धमाका: तुर्किये से लेकर कानपुर तक फैला आतंकी जाल, NIA की जांच ने खोले कई देशों के कनेक्शन
Suvendu Adhikari: दिल्ली विस्फोट के बाद पाकिस्तान और सऊदी अरब से धमकी भरे कॉल, सुवेंदु ने जताई गंभीर चिंता (File Photo)

लाल किले के पास हुआ दिल्ली धमाका अब एक अंतरराष्ट्रीय आतंकी साजिश के रूप में सामने आया है। NIA की जांच में तुर्किये, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और यूपी के डॉक्टरों की संलिप्तता उजागर हुई है। फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी और ISI कनेक्शन ने जांच को और गहराया है।

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Asfi Shadab
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NIA की जांच में खुला अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क

नई दिल्ली। लाल किले के पास हुए भयानक धमाके ने दिल्ली को एक बार फिर दहला दिया है। लेकिन अब इस घटना का दायरा सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की गहन पड़ताल में सामने आया है कि यह हमला एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय आतंकी साजिश का हिस्सा था, जिसका संचालन तुर्किये से किया जा रहा था।

इस साजिश का मास्टरमाइंड डॉक्टर उमर मोहम्मद बताया जा रहा है, जो ‘डॉ. उमर उन नबी’ के नाम से भी जाना जाता है। वह तुर्किये में स्थित आतंकी हैंडलर ‘उकासा’ के संपर्क में था।


‘स्पेक्टैक्युलरस्ट्राइक’ का हिस्सा था दिल्ली धमाका

NIA की शुरुआती रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि यह ब्लास्ट “स्पेक्टैक्युलरस्ट्राइक” योजना का हिस्सा था — यानी एक साथ कई शहरों में धमाकों को अंजाम देने की योजना। इस योजना के तहत दिसंबर 6 और गणतंत्र दिवस 2026 पर दिल्ली और अयोध्या में धमाके करने की तैयारी थी।

डॉ. उमर के साथ काम करने वाले डॉक्टरों के समूह ने कथित रूप से 26 लाख रुपये जुटाए और विस्फोटक सामग्री की खरीदारी की।


16 घंटे की रहस्यमयी यात्रा और मौत की ड्राइव

CCTV फुटेज में सामने आया है कि धमाके के दिन डॉ. उमर ने मेवात से दिल्ली तक का सफर किया। रास्ते में उसने एक ढाबे पर रात बिताई और अगले दिन सुबह लाल किले की ओर गया। शाम 7 बजे के करीब लाल बत्ती पर जैसे ही उसकी i20 कार रुकी, तभी तेज धमाके से गाड़ी आग का गोला बन गई। इस हादसे में 10 लोगों की मौत हुई, जिनमें उमर खुद भी शामिल था।


अल-फलाह यूनिवर्सिटी की भूमिका पर जांच

फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी NIA के निशाने पर है। यहां से गिरफ्तार किए गए डॉक्टरों में डॉ. शाहीना शाहिद अंसारी, डॉ. अदील अहमद राठर, डॉ. मुजम्मिल गनई और डॉ. उमर नबी शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि यूनिवर्सिटी का प्रयोग आतंकी प्रशिक्षण और फंड ट्रांसफर के लिए किया जा रहा था।

डॉ. शाहीना के पास से धार्मिक साहित्य और तस्बीह मिली है। पूछताछ में उसने कबूल किया कि “उनका असली काम शाम 4 बजे के बाद शुरू होता था।”


जम्मू-कश्मीर से लेकर अफगानिस्तान तक पहुंची जांच

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने काजीगुंड के डॉक्टर मुजफ्फर के खिलाफ इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की है। वह इस आतंकी मॉड्यूल से जुड़ा बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, वह 2021 में तुर्किये गया था और अब अफगानिस्तान में छिपा माना जा रहा है।


पंजाब पुलिस की बड़ी कार्रवाई

उधर, पंजाब पुलिस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो पंजाब में ग्रेनेड हमले की साजिश रच रहा था। दस आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह नेटवर्क दिल्ली ब्लास्ट से भी जुड़ा बताया जा रहा है।


कानपुर और सहारनपुर से मिले अहम सुराग

दिल्ली धमाके की जांच अब यूपी तक पहुंच गई है। कानपुर के डॉ. आरिफ मीर और सहारनपुर के डॉ. आदिल अहमद को हिरासत में लिया गया है। सहारनपुर में आदिल के घर से श्रीनगर-दिल्ली की फ्लाइट टिकट बरामद की गई है, जो 31 अक्टूबर की थी। यह इस बात का संकेत है कि वह धमाके से पहले दिल्ली आया था।


पारिवारिक खुलासे और नई परतें

गिरफ्तार डॉक्टर डॉ. शाहीन के पूर्व पति ने बताया कि तलाक के बाद उनका कोई संपर्क नहीं रहा। उन्होंने कहा कि शाहीन अक्सर विदेश जाने की बात करती थी और बाद में रहस्यमय तरीके से लापता हो गई।


सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ी

लाल किले के पास हुए धमाके के बाद दिल्ली सरकार और गृह मंत्रालय पूरी तरह अलर्ट हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और गृह मंत्री आशीष सूद ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर सुरक्षा समीक्षा की है।

NIA अब फॉरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे मॉड्यूल का नक्शा तैयार कर रही है।

दिल्ली धमाके ने यह साफ कर दिया है कि भारत की धरती पर आतंकी संगठन अभी भी सक्रिय हैं और उनका जाल अब शैक्षणिक संस्थानों तक फैल चुका है। यह जांच केवल एक धमाके की नहीं, बल्कि उस सोच की पड़ताल है जो युवाओं को हिंसा की राह पर धकेल रही है।

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।