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मिजोरम के IPS अफसर ने दिल्ली में की फर्जी छापेमारी, विदेशी नागरिक को बनाया बंधक

मिजोरम के IPS अफसर ने दिल्ली में की फर्जी छापेमारी, विदेशी नागरिक को बनाया बंधक
IPS Officer Fake Raid Case: मिजोरम के अफसर पर दिल्ली में फर्जी छापेमारी का मामला दर्ज (File Photo)

IPS Officer Fake Raid Case: दिल्ली पुलिस ने मिजोरम कैडर के IPS अधिकारी शंकर चौधरी के खिलाफ धोखाधड़ी और अवैध बंधक बनाने का मामला दर्ज किया है। छुट्टी पर रहते हुए अफसर ने बिना अनुमति छापेमारी की और एक नाइजीरियाई नागरिक को तीन दिन तक मिजोरम हाउस में गैरकानूनी तरीके से कैद रखा। विजिलेंस जांच में गंभीर नियम उल्लंघन सामने आए हैं।

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Asfi Shadab
Asfi Shadab
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IPS Officer Fake Raid Case: देश में कानून का पालन करवाने वाले खुद जब कानून तोड़ने लगें, तो यह व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी होती है। ऐसा ही एक मामला दिल्ली से सामने आया है, जहां एक IPS अधिकारी पर फर्जी छापेमारी, अवैध बंधक बनाने और सरकारी सामान हड़पने के गंभीर आरोप लगे हैं। मिजोरम कैडर के एसपी शंकर चौधरी के खिलाफ दिल्ली पुलिस की विजिलेंस शाखा ने एफआईआर दर्ज की है। यह मामला नवंबर 2023 का है, जब अफसर छुट्टी पर दिल्ली आए थे, लेकिन उन्होंने बिना किसी अनुमति के रेड को अंजाम दिया।

छुट्टी खत्म होने के बाद भी रुके रहे दिल्ली में

शंकर चौधरी उस समय मिजोरम में एसपी नारकोटिक्स के पद पर तैनात थे। रिकॉर्ड के मुताबिक, उनकी छुट्टी 20 नवंबर 2023 को समाप्त हो गई थी। लेकिन इसके बाद भी वे दिल्ली में रुके रहे और 21 से 29 नवंबर के बीच डाबरी-बिंदापुर इलाके में एक कथित छापेमारी की। यह छापेमारी न तो दिल्ली पुलिस की जानकारी में थी और न ही मिजोरम सरकार ने इसकी मंजूरी दी थी। विजिलेंस की जांच में पता चला कि पूरा ऑपरेशन अनधिकृत और गैरकानूनी था।

रात के अंधेरे में घर में घुसे अफसर

एफआईआर में CCTV फुटेज के हवाले से बताया गया है कि 26 नवंबर की रात 3:34 बजे शंकर चौधरी एक नाइजीरियाई नागरिक के घर में दाखिल हुए। करीब दो घंटे तक वहां रहने के बाद सुबह 5:40 बजे वे एक लॉकर और दो बैग लेकर बाहर निकले। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पूरे ऑपरेशन के दौरान कोई सीजर मेमो नहीं बनाया गया। जब्त किए गए सामान की कोई सूची तैयार नहीं की गई और न ही वह सामान सरकारी मालखाने में जमा कराया गया। यह साफ तौर पर पुलिस प्रक्रिया का घोर उल्लंघन है।

मिजोरम हाउस बना अस्थायी जेल

रेड के बाद नाइजीरियाई नागरिक को वसंत विहार स्थित मिजोरम हाउस ले जाया गया। वहां उसे तीन दिनों तक अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। न तो उसकी गिरफ्तारी का कोई रिकॉर्ड बनाया गया और न ही उसे 24 घंटे के अंदर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। यह संविधान के अनुच्छेद 22(2) का सीधा उल्लंघन है, जो किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर अदालत में पेश करने का अधिकार देता है। इस तरह की हरकत किसी आम अपराधी से नहीं, बल्कि एक IPS अधिकारी से हुई है, जो और भी गंभीर है।

पीसीआर कॉल के बाद हड़बड़ी में छोड़ा गया बंधक

विजिलेंस रिपोर्ट के अनुसार, 29 नवंबर को दिल्ली पुलिस को एक पीसीआर कॉल आई, जिसमें शंकर चौधरी और मिजोरम पुलिस द्वारा वसूली की शिकायत की गई थी। कॉल आने के तुरंत बाद उसी रात संदिग्ध को रिहा कर दिया गया। यह घटना साफ करती है कि पूरा मामला संदिग्ध था और अफसर को अपनी करतूत पकड़े जाने का डर था। इसलिए उन्होंने जल्दबाजी में उस व्यक्ति को छोड़ दिया।

दिल्ली पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर दिल्ली पुलिस ने IPS शंकर चौधरी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 166 (सरकारी अधिकारी द्वारा कानून का उल्लंघन), 341-342 (गलत तरीके से किसी को बंधक बनाना) और 409 (अमानत में खयानत) के तहत एफआईआर दर्ज की है। यह धाराएं बेहद गंभीर हैं और इनमें सजा का प्रावधान भी काफी कड़ा है।

निचले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की सिफारिश

विजिलेंस टीम ने अपनी रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस के उन निचले अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की है, जिन्होंने इस अवैध छापेमारी में शंकर चौधरी का साथ दिया था। यह कदम यह संदेश देता है कि कानून की नजर में सब बराबर हैं और गलत काम में शामिल होने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

पुलिस सुधार की जरूरत

IPS Officer Fake Raid Case: यह मामला एक बार फिर पुलिस व्यवस्था में सुधार की जरूरत को रेखांकित करता है। IPS जैसे उच्च पद पर बैठे अधिकारी अगर खुद कानून का मजाक बनाएं, तो आम जनता का भरोसा टूटना लाजिमी है। जरूरी है कि ऐसे मामलों में जांच पारदर्शी हो और दोषियों को सख्त सजा मिले।

आगे क्या होगा

अब यह देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है। क्या शंकर चौधरी को निलंबित किया जाएगा? क्या मिजोरम सरकार इस मामले में अपनी भूमिका स्पष्ट करेगी? और सबसे बड़ा सवाल, क्या न्याय मिल पाएगा उस विदेशी नागरिक को, जिसके साथ इतना बड़ा अन्याय हुआ? समय ही बताएगा कि व्यवस्था अपनी साख बचा पाती है या नहीं।

जनता का भरोसा बहाल करना जरूरी

पुलिस और जनता के बीच विश्वास की डोर बेहद नाजुक होती है। एक गलत कदम इसे तोड़ने के लिए काफी है। इस मामले में अगर सही तरीके से कार्रवाई नहीं हुई, तो यह एक खतरनाक मिसाल बन सकता है। इसलिए जरूरी है कि दिल्ली पुलिस और संबंधित अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लें और जल्द से जल्द सच सामने लाएं। तभी आम जनता का भरोसा बहाल हो सकेगा और कानून का राज कायम रह सकेगा।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।