दिल्ली का लाल किला हमला JeM के पुनरुत्थान की नहीं बल्कि व्यापक आतंकवादी पुनरुद्धार की निशानी है

इतालवी संवाददाता फ्रांसेस्का मरीनो ने खुलासा किया कि दिल्ली लाल किले का हमला JeM के व्यापक पुनरुद्धार का प्रमाण है। इंटेलिजेंस सूचनाओं के अनुसार यह हमला मूलतः 6 दिसंबर को करने की योजना थी। JeM महिला आत्मघाती बमवर्षकों का विंग भी विकसित कर रहा है और पाकिस्तानी सेना इसमें भूमिका निभा रही है।
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JeM का पुनरुत्थान: दिल्ली धमाकों की गहरी पड़ताल
लाल किले पर हुए आत्मघाती हमले से जुड़ी नई जानकारियाँ सामने आ रही हैं जो भारतीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। इतालवी की मशहूर संवाददाता फ्रांसेस्का मरीनो ने अपनी किताब “फ्रॉम पुलवामा टू पेबैक: द इनसाइड स्टोरी” के लॉन्च के दौरान सीधे तौर पर कहा है कि दिल्ली का लाल किला हमला न तो अकेली घटना है और न ही किसी आकस्मिक योजना का नतीजा बल्कि यह जैश-ए-मुहम्मद (JeM) के व्यापक पुनरुद्धार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यह घटना 10 नवंबर को घटी जिसमें 13 लोग मारे गए और 20 से अधिक लोग घायल हुए। इस हमले के लिए आतंकवादियों ने TATP यानी ट्राइएसिटोन ट्राइपेरोक्साइड का इस्तेमाल किया जिसे “शैतान की माँ” भी कहा जाता है। यह बिल्कुल वही विस्फोटक है जिसका इस्तेमाल यूरोप के विभिन्न आतंकवादी हमलों में किया गया था।
Pulwama से Delhi तक का सफर
फ्रांसेस्का मरीनो ने अपने विश्लेषण में एक महत्वपूर्ण बात कही है कि 2019 के पुलवामा हमले और उसके बाद भारतीय वायु सेना के बालाकोट स्ट्राइक ने JeM के विकास की दिशा को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली का यह हमला दरअसल उसी प्रतिशोध की श्रृंखला का हिस्सा है जिसकी शुरुआत बालाकोट स्ट्राइक के बाद हुई थी। इतालवी पत्रकार ने अपनी किताब में बालाकोट के दिन जो देखा था उसके बारे में विस्तार से बात की है।
बालाकोट स्ट्राइक: पाकिस्तान की सच्चाई
मरीनो के अनुसार जब भारतीय वायु सेना ने बालाकोट पर स्ट्राइक की थी उस रात अकेले पाकिस्तान ने 35 लाशें ले जाई थीं। लेकिन पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने तुरंत ही एक समन्वित सूचना प्रचार अभियान शुरू किया और दावा किया कि भारतीय वायु सेना ने सिर्फ “पेड़ों को तोड़ा है”। मरीनो कहती हैं कि वह घटना स्थल पर मौजूद थीं और देखा कि कैसे सैन्य अधिकारियों ने फोन जब्त किए, मलबा साफ किया और घायलों को सेना की सुविधा में ले जाया गया। पूरा इलाका सील कर दिया गया।
JeM की नई रणनीति और महिला आत्मघातियों का खतरा
इतालवी संवाददाता ने एक और चिंताजनक बात कही है कि JeM न केवल अपनी संरचना को दुबारा बना रहा है बल्कि महिला आत्मघाती बमवर्षकों का एक अलग विंग भी विकसित कर रहा है। यह विंग मुख्य रूप से JeM के नेता मसूद अजर के रिश्तेदारों से जुड़ा है। मरीनो ने कहा कि गुप्त सूचना के आधार पर यह संभावना जताई गई थी कि लाल किले का हमला आसलन 6 दिसंबर को करने की योजना थी क्योंकि यह बाबरी मस्जिद विध्वंस की वर्षगांठ है और इसका निशाना कोई हिंदू धार्मिक स्थल हो सकता था।
JeM की अस्मिता का संकट और भारत को निशाना
मरीनो के विश्लेषण के अनुसार JeM का अस्तित्व पूरी तरह से भारत को निशाना बनाने के लिए है। यह संगठन सिर्फ अपनी मौजूदगी साबित करने और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फंडिंग हासिल करने के लिए हमले करता है। इसका मतलब यह है कि जब तक JeM को भारत के खिलाफ हमले करने की क्षमता रहेगी तब तक यह संगठन सक्रिय रहेगा।
पाकिस्तानी सेना और कट्टरपंथी नेतृत्व की भूमिका
फ्रांसेस्का मरीनो ने पाकिस्तानी सैन्य स्थापना के भीतर बढ़ते कट्टरवाद की ओर भी ध्यान दिलाया है। उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया है। उनके विचार में यह तरह का नेतृत्व ही JeM और लश्कर-ए-तोईबा जैसे संगठनों को मजबूत बनाता है। इसीलिए पाकिस्तान न केवल इन संगठनों को संरक्षण देता है बल्कि सक्रिय रूप से उनकी गतिविधियों में भी भागीदारी निभाता है।
दिल्ली धमाका: आत्मविश्वास और पुनरुद्धार का प्रतीक
लाल किले का हमला दरअसल JeM के नवीकृत आत्मविश्वास का एक प्रमाण है। बालाकोट स्ट्राइक से संगठन को नुकसान जरूर हुआ लेकिन उसका संचालन केंद्र और मूल संरचना बिल्कुल ठीक है और वह हमेशा प्रतिशोध का इंतजार कर रही थी।
चेतावनी और भविष्य की संभावनाएँ
मरीनो की किताब और उनके विश्लेषण का मुख्य मकसद सुरक्षा विश्लेषकों और आम जनता दोनों को आतंकवाद की वास्तविकता से परिचित कराना है। वह चाहती हैं कि लोग समझें कि कैसे JeM जैसे संगठन काम करते हैं, कैसे उन्हें संरक्षण मिलता है और कैसे पुलवामा, बालाकोट और दिल्ली के हमले एक ही रणनीति का हिस्सा हैं। भारत को इन सभी जानकारियों के आधार पर अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।
ये न्यूज IANS एजेंसी के इनपुट के साथ प्रकाशित हो गई है।

